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बेसन में लिपटा स्वाद

खाने की परंपरा में कई व्यंजन ऐसे बनाए जाते रहे हैं, जिसमें सब्जी का काम अनाज से लेत हैं और वह बखूबी पसंद किया जाता है। आज ऐसे ही व्यंजन के बारे में जानते हैं।

गट्टे की सब्जी और झुनका घरों में आज भी बनाई और पसंद की जाती है।

मानस मनोहर
पहले जब आज की तरह बाजार का विस्तार नहीं हुआ था, भंडारण और ढुलाई के साधन नहीं थे, सब्जी सबको सहज उपलब्ध नहीं थी तो ग्रामीण इलाकों के लोग अनाज और दालों से अनेक तरह की तरकारी बना लिया करते थे। उनमें से कई तरकारी आज भी खाई जाती है। महाराष्ट्र का झुनका और राजस्थान का गट्टा भी ऐसा ही स्वादिष्ट व्यंजन है।

गट्टे की सब्जी
गट्टे की सब्जी मुख्य रूप से राजस्थान में बनाई और खाई जाती है। गट्टे बनाने के लिए एक कटोरी बेसन लें। उसमें आधा चम्मच अजवाइन, चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, चुटकी भर हींग, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, चौथाई चम्मच गरम मसाला और चौथाई चम्मच नमक डाल कर सारी चीजों को अच्छी तरह मिला लें। अब दो चम्मच खाने का तेल गरम करें और बेसन में डाल दें। बेसन को रगड़ते हुए मिलाएं, ताकि सारा तेल अच्छी तरह मिल जाए। कई लोग गट्टों को मुलायम बनाने के लिए ईनो या मीठा सोडा इस्तेमाल करते हैं, मगर उसकी जरूरत नहीं। उसकी जगह एक चम्मच देसी घी डालें और फिर से बेसन को रगड़ते हुए अच्छी तरह मिला लें। फिर थोड़ा-थोड़ा दही डालते हुए गूंथें। ध्यान रखें कि गुंथने के बाद बेसन न तो बहुत अधिक कड़ा रहे और न बहुत ढीला, क्योंकि उससे हमें बेलनाकार गट्टे बनाने हैं। जैसा रोटी के लिए आटा गूंथते हैं कुछ उसी तरह का गूंथें।

अब एक भगोने या पैन में दो-तीन गिलास पानी डाल कर उबलने रख दें। गुंथे हुए बेसन में से छोटी-छोटी लोइयां लेकर उसे बेलनाकार बना लें। जब पानी में उबाल आने लगे तो बेलनाकार बनाए बेसन यानी गट्टों को पानी में डाल दें। आंच मध्यम कर दें। ऊपर से ढक्कन लगा दें और दस मिनट पकने दें। दस मिनट बाद ढक्कन हटा कर देखें। अगर गट्टों के ऊपर गोल-गोल सफेद दाने जैसा उभर आया है और गट्टे पानी पर तैरने लगे हैं, तो समझिए कि वे तैयार हैं। उन्हें ज्यादा देर न उबालें। आंच बंद कर दें। गट्टों को अलग बर्तन में निकाल लें और उन्हें ठंडा होने दें। इसका पानी फेंके नहीं, उसे तरी के लिए उपयोग करेंगे।

इस दौरान गट्टों के लिए ग्रेवी यानी तरी बनाने की तैयारी कर लें। यों पारंपरिक तौर पर गट्टों की ग्रेवी दही से बनाई जाती है, पर कई लोग इसे अधिक चटपटा बनाने के लिए प्याज-टमाटर-लहसुन की तरी बनाते हैं। कुछ लोग इसमें मलाई का भी उपयोग करते हैं। पर आप पारंपरिक तरीके से तरी बनाएं। इसके लिए डेढ़ से दो कटोरी दही लें। उसमें आधा चम्मच देगी मिर्च पाउडर, चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, चुटकी भर हींग, आधा चम्मच गरम मसाला और आधा चम्मच नमक डालें और मथानी से अच्छी तर फेंट लें। इस मिश्रण को अलग रख दें। इस तरह पकाते समय दही फटेगा नहीं।

गट्टे ठंडा हो गए हैं। उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। फिर कड़ाही में दो-तीन चम्मच तेल गरम करें और इन गट्टे के टुकड़ों को उसमें डाल कर हल्का तल लें ताकि उनके ऊपर की परत कुछ सख्त हो जाए। इस तरह गड्डे ऊपर से थोड़े सख्त और भीतर से मुलायम बनेंगे, ग्रेवी में डालने पर फूटेंगे नहीं। गट्टे सिंक जाएं, तो उसी कड़ाही में एक चम्मच तेल और डालें और उसमें जीरा, अजवाइन, सौंफ का तड़का दें और फिर दही के मिश्रण को डाल कर मध्यम आंच पर चलाते हुए पकाएं। जब उबाल आ जाए और दही कुछ गाढ़ा हो जाए, तो उसमें गट्टों को उबालने के बाद बचा हुआ सारा पानी डाल दें। जब तरी में उबाल आना शुरू हो जाए तो उसमें गट्टे डालें और एक बार चलाने के बाद ढक्कन लगा कर पकने के लिए छोड़ दें। पांच मिनट बाद आंच बंद कर दें। गट्टे तैयार हैं। इन्हें रोटी, परांठे, बेड़मी पूड़ी, किसी के भी साथ खा सकते हैं।

झुनका
झुनका मुख्य रूप से महाराष्ट्र में खाई जाने वाली सब्जी है। इसके लिए मुख्य रूप से बेसन, प्याज और रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले कुछ मसालों की जरूरत पड़ती है। सबसे पहले एक कटोरी बेसन लें। अगर अधिक बनाना हो, तो मात्रा बढ़ा सकते हैं। फिर कड़ाही में दो खाने के चम्मच बराबर सरसों का तेल गरम करें। तेल गरम हो जाए, तो बेसन को उसमें डाल कर मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक भूनें, जब तक उसमें से सोंधी गंध न उठने लगे। आंच बंद कर दें और चलाते हुए बेसन को कड़ाही के गरम रहने तक भूनें। जब बेसन ठंडा हो जाए तो उसे छन्नी से छान लें, ताकि गांठें न रह जाएं।

झुनका में हरे प्याज का स्वाद अच्छा लगता है, इसलिए चार-पांच हरा प्याज लें और उसे अच्छी तरह धोने के बाद गांठ समेत बारीक-बारीक काट लें। अगर हरा प्याज नहीं है, तो भी चिंता की बात नहीं। दो मध्यम आकार के या फिर एक बड़ा प्याज बारीक-बारीक काट लें। इसके अलावा चार-पांच लहसुन की कलियां, एक-डेढ़ इंच बड़ा अदरक और दो-तीन हरी मिर्चें भी बारीक-बारीक काट लें। अब कड़ाही में तीन-चार चम्मच सरसों का तेल गरम करें। उसमें जीरा और हींग का तड़का दें। फिर कटी हुई हरी मिर्च, लहसुन अदरक और प्याज डाल कर मध्यम आंच पर चलाते हुए तीन से चार मिनट तक भूनें।

प्याज को सुनहरा नहीं करना है। जैसे प्याज पारदर्शी हो जाए, उसमें चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच गरम मसाला डालें और एक बार चलाने के बाद उसमें भुना हुआ बेसन डाल दें। दो-तीन मिनट चलाते हुए पकाएं और फिर जरूरत भर का नमक डालें। थोड़ा-थोड़ा करके गुनगुना या गरम पानी डालते हुए चलाते रहें। ध्यान रखें कि बेसन में गांठें न पड़ने पाएं और सारा बेसन अच्छी तरह पानी सोख ले। यह सब्जी सूखी बनती है। सूखी का मतलब इतना कम पानी भी न डालें कि बेसन कड़ा रहे और खाते वक्त गले में फंसे। पानी की मात्रा उतनी ही हो कि बेसन नरम और मुलायम हो जाए। थोड़ी देर के लिए कड़ाही पर ढक्कन लगाएं और आंच को धीमी कर दें। इस तरह भाप से बेसन अच्छी तरह नरम हो जाएगा और उसमें सारे मसाले रच-बस जाएंगे। झुनका तैयार है। ऊपर से धनिया पत्ता डाल कर इसे परोसें।

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