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अनाज मोटा स्वाद अनूठा

सर्दी के मौसम में मोटे अनाज जैसे बाजरा, मक्का आदि इसलिए खाने को कहा जाता है कि इनकी तासीर गरम मानी जाती है। ये शरीर को गरम रखते हैं। आजकल तो मोटे अनाज यानी मिलेट्स की खेती पर भी जोर दिया जा रहा है और कई शहरों में सिर्फ मोटे अनाज से बने व्यंजन परोसने वाले रेस्तरां भी खुल गए हैं। तो इस बार मोटे अनाज।

Dana Pani, Life Style
बाजरा पराठा (ऊपर) और मक्का के लड्डू (नीचे)।

बाजरे का परांठा
बाजरे का परांठा बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरी मेथी के हरे पत्ते साफ करके काट कर अलग रख लें। आधा कटोरी धनिया पत्ता भी बारीक काट कर रख लें। इसके अलावा लहसुन और अदरक को कूट कर दो चम्मच उसका पेस्ट बना लें। दो हरी मिर्च बारीक काट लें।

अब दो कटोरी बाजरे का आटा, आधा कटोरी या दो खाने के चम्मच बराबर बेसन और एक कटोरी गेहूं का आटा लें। इन्हें अच्छी तरह मिलाएं। इसमें एक चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच गरम मसाला, चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच कुटी लाल मिर्च, एक चम्मच नमक, एक छोटा चम्मच अजवाइन रगड़ कर डालें। इसके अलावा आधा छोटा चम्मच साबुत जीरा, आधा चम्मच हरी सौंफ और चुटकी भर हींग डाल कर अच्छी तरह मिलाएं।

अब सारी सब्जियां डालें और दो से तीन चम्मच घी गरम करके मिलाएं। इस आटे को थोड़ा-थोड़ा दही डाल कर गूंथ लें। आटा वैसा ही लचीला होना चाहिए जैसे रोटी के लिए गूंथते हैं। तवा गरम करें। आटे में से रोटी के बराबर की लोइयां लें और इन्हें बेल कर तवे पर घी लगा कर परांठे की तरह सेंकते जाएं। रायता और चटनी के साथ इसे गरमागरम परोसें, मजेदार मसालेदार बाजरे का परांठा सबको पसंद आएगा। नाक-भौं सिकोड़ने वाले बच्चे भी इसे मजे से खाएंगे।

बाजरे का चीला
जायका बदलने के लिए बाजरे के आटे का परांठा बनाने के बजाय चीला भी बना सकते हैं। इसमें सामग्री सभी वही रहेगी, बस गेहूं का आटा और बेसन उपयोग न करें। केवल बाजरे का आटा लें। इसमें दही के बजाय पानी का इस्तेमाल करें। सब्जियां सारी वही रहेंगी, जो परांठे के लिए इस्तेमाल की हैं।

बाजरे के आटे में सब्जियां और मसाले डालें और थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए गाढ़ा घोल तैयार कर लें। घोल को दस से पंद्रह मिनट के लिए आराम करने को छोड़ दें। फिर एक नान स्टिक तवा या पैन गरम करें। उस पर हल्का घी चुपड़ें और बाजरे के घोल में से दो कलछी घोल डाल कर अच्छी तरह फैला दें। ऊपर से ढक्कन लगा दें ताकि चीले का ऊपरी हिस्सा भाप से पक जाए।

जब नीचे का हिस्सा सुनहरा होकर तवा छोड़ दे तो सावधानी से पलटें और दूसरी तरफ से भी पका लें। थोड़ी देर बिना ढंके दोनों तरफ से पलट कर पकाएं ताकि दोनों हिस्से कुरकुरे हो जाएं। दही या रायता और हरी चटनी के साथ गरमागरम परोसें।

मक्के के लड्डू
मक्का भी बाजरे की तरह ही मोटे अनाज की श्रेणी में आता है। इसके आटे का इस्तेमाल भी आमतौर पर रोटी और चूरमा वगैरह बनाने में किया जाता है। कई लोग पहले इसकी रोटी सेंक कर इसमें घी और गुड़ मसल कर चूरमा बना लेते हैं। इसका चूरमा खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है। इसी तरह इसका लड्डू भी बहुत मजेदार बनता है।

सबसे पहले इसकी सामग्री की मात्रा जान लेते हैं। जितनी मात्रा मक्के के आटे की ले रहे हैं, उसकी आधी मात्रा गेहूं के आटे की भी लें। इसके अलावा काजू, अखरोट, बादाम आदि जो भी मेवे आपको पसंद हों अपनी इच्छानुसार अवश्य लें। इसके अलावा कम से कम आधा कटोरी सफेद तिल और चौथाई कटोरी अलसी यानी फ्लेक्स सीड लें।

सर्दियों के लिए ये दोनों चीजें औषधि का काम करती हैं। शरीर को गरम रखने और रक्तको शुद्ध करने में इनसे मदद मिलती है। इसके अलावा दोनों आटे की आधी मात्रा चीनी यानी अगर तीन कप आटा है, तो डेढ़ कप चीनी लें और उसे पीस कर पाउडर बना लें। लड्डू में डालने के लिए आटे की मात्रा के करीब चौथाई मात्रा देसी घी की जरूरत पड़ेगी। घी की मात्रा बढ़ा भी सकते हैं।

अब लड्डू बनाने की तैयारी। सबसे पहले कड़ाही में मक्के के आटे को मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक भूनें, जब तक कि उसमें महक न उठने लगे और उसका रंग न बदल जाए। इसी तरह गेहूं के आटे को भी महक आने और रंग बदलने तक भून लें। इन्हें भूनना इसलिए जरूरी होता है कि ये कच्चा न रहें और लड्डू अच्छा बने।

इन्हें भूनते समय ध्यान रखें कि जलने न पाएं। हमने इन्हें बिना घी डाले भूना है, अगर आपको मुश्किल आ रही है, तो थोड़ा घी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। दोनों आटा भूनने के बाद परात में ठंडा होने के लिए रख दें।

उसी कड़ाही को साफ करें और एक चम्मच घी डाल कर मेवों को हल्का भूनें और फिर ठंडा होने के बाद उन्हें दरदरा पीस लें। यही काम अलसी और तिल के साथ भी करें। ध्यान रखें कि अलसी और तिल रंग बदलने लगें तो उन्हें कड़ाही से बाहर निकालें और ठंडा होने के बाद उन्हें भी दरदरा पीस लें।

अब पिसे हुए मेवे, अलसी और तिल को आटे में मिलाएं। अच्छी तरह रगड़ कर मिला लें। फिर पिसी हुई चानी डालें। फिर से रगड़ कर मिलाएं। अब घी को पिघला कर मिलाएं और दोनों हथेलियों से रगड़ कर एकसार करें।

अगर मिश्रण मुट्ठी में बंध कर लड्डू की तरह बन रहा है तो ठीक, नहीं तो थोड़ा घी और पिघला कर डालें और अच्छी तरह मिला लें। अब थोड़ी-थोड़ी मात्रा लेकर लड्डू बनाते जाएं। यह लड्डू बाजार के लड्डू से अलग, पौष्टिक और गुणकारी है। डिब्बे में भर कर रख दें और एक-डेढ़ महीने तक खाते रहें।

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