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दाना-पानीः बरसात में खानपान

परवल यों तो आजकल हर मौसम में मिल जाता है, पर इस मौसम में उसकी पैदावार अधिक होती है। इसकी खेती असम, बंगाल, ओड़िशा, बिहार और उत्तर प्रदेश में की जाती है।

भरवां परवल

परवल यों तो आजकल हर मौसम में मिल जाता है, पर इस मौसम में उसकी पैदावार अधिक होती है। इसकी खेती असम, बंगाल, ओड़िशा, बिहार और उत्तर प्रदेश में की जाती है। जनि क्षेत्रों में बरसात अधिक होती है, वहां परवल बड़े आकार का, गाढ़ा हरा और धारीदार होता है। उत्तर प्रदेश, बिहार में परवल हल्के हरे रंग का, आकार में कुछ छोटा और बिना धारी का होता है। परवल को तमिल में ‘कोवाककई’, कन्नड़ में ‘थोंड़े काई’ और असमिया, संस्कृत, ओड़िया और बंगाली में ‘पटल’ तथा भोजपुरी, उर्दू, और अवधी में ‘परोरा’ के नाम से भी जाना जाता है। यह देश के लगभग सभी हिस्सों में खाया जाता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह अत्यंत लाभकारी सब्जी है। इसमें विटामिन ए, बी-1, बी-2, विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसमें बहुत कम कैलोरी होती है, इसलिए यह कोलेस्ट्राल को भी नियंत्रित रखता है। यह खून को साफ रखता और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है।

परवल की सब्जी सूखी और रसेदार दोनों तरह से बनती है। आमतौर पर इसे लोग आलू के साथ मिला कर बनाते हैं। कुछ लोग सिर्फ परवल की सूखी सब्जी भी खाते हैं। मगर भरवां परवल का मजा ही अलग है। भरवां परवल बनाने में थोड़ी मशक्कत जरूर करनी पड़ती है, पर इसका स्वाद लाजवाब होता है और इसे भरवां करेले की तरह दो-तीन दिन तक भी खा सकते हैं, खराब नहीं होता।

विधि

भरवां परवल बनाने के लिए भी वही विधि अपनानी पड़ती है, जो भरवां करेला बनाने के लिए अपनाई जाती है। कुछ लोग भरवां परवल बनाने के लिए भी टमाटर और प्याज का इस्तेमाल करते हैं, पर वास्तव में इसकी जरूरत नहीं होती। इसके लिए परवल के भीतर का गूदा और सूखे मसाले ही पर्याप्त होते हैं।

परवल को मल कर ठीक से धो और सुखा लें। फिर उसमें एक तरफ चीरा लगा कर उसके भीतर का सारा गूदा सावधानी से निकाल लें। इस गूदे को मिक्सर में दरदरा पीस लें। इससे इसके बीज पिस जाएंगे और पेट में जाकर नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। परवल के बीज बहुत फायदेमंद होते हैं, पिसने के बाद उसके तत्त्व पूरी तरह आपके शरीर को मिल सकेंगे, नहीं तो हमारा शरीर इन्हें ठीक से पचा नहीं पाता।

अब दो से तीन चम्मच राई या सरसों, एक चम्मच जीरा, एक चम्मच साबुत धनिया, एक चम्मच सौंफ, एक चम्मच अजवाइन, एक चम्मच खसखस और एक चम्मच खटाई लें। इन सबको मिक्सर में पीस लें।

एक कड़ाही में दो चम्मच सरसों का तेल गरम करें। उसमें परवल का गूदा और मसाले डाल कर चलाते हुए भून लें। भूनते समय चुटकी भर हल्दी पाउडर, थोड़ा हींग और जरूरत भर का नमक भी डाल दें। जब ये सारी चीजें भुन जाएं तो आंच बंद कर दें। मिश्रण को ठंडा होने दें।

मिश्रण ठंडा हो जाए तो चम्मच से थोड़ा-थोड़ा मिश्रण सभी परवलों में भर कर ठीक से बंद कर लें।

अब एक चौड़े पेंदे की कड़ाही या पैन में दो-तीन चम्मच तेल गरम करें और उसमें भरे हुए परवलों को सावधानी से रख दें। आंच धीमी रखें और ऊपर से थोड़ा नमक छिड़क कर ढक्कन लगा दें। थोड़ी देर बाद जब नीचे का हिस्सा सिंक जाए तो उन्हें पलट कर दूसरी तरफ से भी सेंक लें। परवलों को सिंकने में बीस से पच्चीस मिनट का समय लगेगा।

अब खाने के लिए भरवां परवल तैयार है। इसे परांठे या फिर दाल-चावल के साथ खाया जा सकता है।

बरसात में कुछ देसी नुस्खे

बरसात के समय पौधों की बढ़वार तेजी से होती है। जब जाड़े का मौसम शुरू होता है, तो उनके पत्ते कड़े होने लगते हैं, फिर उन पर धूल-धुआं आदि जमने से उनका रंग काला पड़ने लगता है। इसलिए उनके उपयोग से बचने का प्रयास किया जाता है। इसलिए अगर कुछ पौधों के पत्तों को इसी मौसम में सुखा कर रख लें तो साल भर उनका उपयोग किया जा सकता है।

  1. तुलसी के पत्ते बहुत गुणकारी होते हैं। ये अच्छे एंटीबायोटिक हैं। अगर इनका नियमित सेवन किया जाए, तो सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी परेशानियां पैदा करने वाले बैक्टीरिया शरीर पर हमला नहीं करने पाते। बरसात में तुलसी के पौधे हरेभरे रहते हैं। पत्ते धुले रहते हैं। तुलसी के पत्ते तोड़ कर छाए में सुखा लें। फिर उन्हें हाथों से मसल कर या पीस कर मोटा चूर्ण बना लें। जब आप चाय बनाएं, तो उसमें थोड़ा-सा तुलसी का चूर्ण डाल लें। इससे चाय का स्वाद बढ़ जाएगा और सेहत के लिए भी लाभकर होगा। इसी तरह इस चूर्ण को रायता और चटनी वगैरह में भी थोड़ा-थोड़ा डाल कर इस्तेमाल किया जा सकता है।
  2. बरसात में सबसे अधिक बैक्टीरिया पनपते हैं। इसलिए जब फ्रिज में पानी रखें तो पानी के बोतलों में दो-तीन तुलसी के पत्ते भी डाल दें। इस तरह तुलसी का रस पानी को स्वादिष्ट बना देगा और बैक्टीरिया के प्रभाव से भी मुक्त रखेगा। पूरी बरसात तुलसी का सेवन करें और स्वस्थ रहें।
  3. तुलसी की तरह कढ़ी पत्ते को भी सुखा और चूर्ण बना कर रख सकते हैं। इसका उपयोग पोहा, रायता वगैरह में कर सकते हैं।
  4. बरसात में मसालों में सीलन आने लगती है। उन्हें सीलन और कीड़ों से बचाने के लिए एक महीन कपड़े में कुछ चावल और कुछ नीम के सूखे पत्ते बांध कर डिब्बे में डाल दें। चावल सीलन को सोख लेता है और नीम से कीड़े नहीं आते।