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सेहत: कानों की देखभाल

कुछ लोगों को कानों में खुजली होती है और वे लगातार कान साफ करने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग राह चलते कान साफ करने वालों की मदद भी लेते हैं।

Author July 29, 2018 6:59 AM
पने कान साफ करने के लिए लोग कई अनोखी चीजों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से कुछ तो बहुत खतरनाक होती हैं।

कुछ लोगों को कानों में खुजली होती है और वे लगातार कान साफ करने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग राह चलते कान साफ करने वालों की मदद भी लेते हैं। इसके कई नुकसान हो सकते हैं। इससे न केवल कान के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है, बल्कि कई अन्य संभावित खतरे भी पैदा हो सकते हैं। अपने कान साफ करने के लिए लोग कई अनोखी चीजों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से कुछ तो बहुत खतरनाक होती हैं। लोग कॉटन स्कैब, हेयर पिन, चिमटी, कलम या पेंसिल, स्ट्रॉ, पेपर क्लिप आदि का इस्तेमाल करते हैं।

खुजलाने के खतरे

कान की कोशिकाएं कैरुमन का निर्माण करती हैं, जिसे सामान्य भाषा में ईयर वैक्स या मैल कहा जाता है। कुछ लोगों में यह दूसरों के मुकाबले अधिक बनती है। इससे जमी मैल कुछ हद तक सुनने की क्षमता को कम कर देती है। साथ ही इसमें दर्द भी होता है। किसी डॉक्टर की मदद लेने के बजाय अधिकतर लोग कॉटन स्कैब से यह वैक्स हटाने का आसान रास्ता अपनाते हैं। लोगों को लगता है कि डॉक्टर के पास जाकर समय और पैसे बर्बाद करने से अच्छा है कि इस मैल को खुद ही निकाल लिया जाए। लेकिन इससे उन्हें फायदा कम, नुकसान ज्यादा होता है।

पर्दे को नुकसान

कॉटन स्कैब यानी रुई का फाहा आसानी से कान के पर्दे तक पहुंच जाता है। कान का पर्दा बहुत संवेदनशील होता है और स्कैब के मामूली दबाव से भी वह क्षतिग्रस्त हो सकता है। जिस व्यक्ति के कान का पर्दा क्षतिग्रस्त हुआ हो, उससे पूछिए कि इसका दर्द क्या होता है। यह दर्द इतना भयानक होता है कि व्यक्ति को खाने-पीने में भी तकलीफ होती है। कान के पर्दे में सूराख हो जाए तो वह धीरे-धीरे ठीक हो जाता है, लेकिन सुनने की क्षमता को सामान्य स्तर पर पहुंचने में समय लगता है।

क्या करें

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हमें वाकई अपने कान साफ करने की जरूरत होती है। इसका जवाब थोड़ा दुविधा भरा है। इसके जवाब में हां और ना दोनों शामिल हैं। कान का बाहरी हिस्सा जो नजर आता है, उसे कभी-कभार साफ किया जाना चाहिए। इस काम को आप थोड़े से साबुन, पानी और तौलिए से कर सकते हैं।

जा सकती है सुनने की क्षमता

ज्यादातर मामलों में ईयर कैनाल को साफ करने की जरूरत नहीं होती। नहाते समय हमारे कान में इतना पानी चला जाता है कि जमी हुई मैल अपने आप ढीली हो जाती है। इसके साथ ही कान के अंदर की त्वचा कुदरती रूप से कुंडलीय आकार में बढ़ती रहती है। जैसे ही यह हटती है, मैल भी अपने आप हट जाती है। कई बार जब आप सो रहे होते हैं, तो मैल अपने आप बाहर निकल जाती है। कॉटन स्कैब की जरूरत सही मायनों में है ही नहीं।

’जिन लोगों के कान में बहुत ज्यादा मैल जमा होती है, उन्हें डॉक्टरी सहायता की जरूरत होती है। डॉक्टर पानी में थोड़ा-सा पेरोक्साइड मिला कर उसे कान में डाल कर आसानी से मैल को बाहर निकाल सकते हैं। इस प्रक्रिया में दर्द बिलकुल नहीं होता। कान में जमी मैल निकालने के लिए यह तरीका बेहद प्रभावशाली है। अगर यह समस्या काफी ज्यादा रहती है, तो मरीज अपने डॉक्टर से यह प्रक्रिया समझ कर इसे घर पर ही कर सकता है।

’आप चिकित्सक से पूछ सकते हैं कि सुरक्षित तरीके से अपने कान कैसे साफ किए जाएं। अपने कान में कभी भी कोई चीज न डालें, अपनी उंगली भी नहीं। इससे मैल बढ़ेगी और साथ ही इससे आपका कान का पर्दा भी क्षतिग्रस्त हो सकता है। सही तरीका तो यह है कि अगर आपको समझ में न आ रहा हो कि क्या किया जाए, तो आपको डॉक्टर से सहायता लेनी चाहिए।

सफाई

कान में जमा होने वाली मैल कान के भीतरी हिस्से की मृत त्वचा कोशिकाओं को पकड़ लेती है। जहां बाकी शरीर की मृत कोशिकाएं कपड़ों से रगड़ कर और पानी आदि से अपने आप हट जाती हैं। वहीं कान की मृत त्वचा मैल के जरिए ही हटती है।

चिकनाई

कान की मैल कान की चिकनाई बनाए रखने में भी मदद करती है। यह एपिडर्मिस यानी बाहरी त्वचा को हाइड्रेट करती है। इससे जलन की आशंका कम हो जाती है।

कान की मैल कान की अंदरूनी त्वचा की रक्षा करती है। धूल, मिट्टी और गंदगी इससे चिपक जाती है, जिससे कान को नुकसान होने का खतरा कम हो जाता है।

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