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रविवारी सेहत: कोरोना से डरें नहीं, बचाव पर दें ध्यान

कोरोना विषाणु पशुजन्य हैं। कोरोना विषाणुओं के उस बड़े परिवार का हिस्सा है जिसके कारण सामान्य ठंड से शुरू होकर गंभीर बीमारी तक हो सकती है। मिडिल ईस्ट रेस्परेटॉरी सिंड्रोम (एमईआरएस-कोव) और सिवियर एक्यूट रेस्परेटॉरी सिंड्रोम (एसएआरएस-कोव), ऐसी ही बीमारियां हैं।

कोरोना वायरस से पीड़ित लोग (फाइल फोटो)।

डॉ. रवि मलिक
नोवल कोरोना वायरस (एन-कोव) एक नई चिंता बढ़ाने वाली बीमारी है, जिसका प्रभाव इससे पहले कभी मनुष्य के ऊपर नहीं देखा गया था। एसएआरएस-कोव गंधबिलाव या बिलाव कस्तूरी से मनुष्य तक पहुंचता है, जबकि एमईआरएस-कोव ऊंटों से मनुष्य तक पहुंचता है। कोरोना विषाणु से संक्रमित होने वालों की संख्या देखते-देखते काफी बढ़ गई है। इसका प्रसार तेजी से विश्व के विभिन्न हिस्सों में हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब तक 118 देशों में 1.25 लाख से ज्यादा मामलों की पुष्टि की है। बीते दो हफ्तों में चीन से बाहर कोरोना संक्रमण का शिकार होने वालों की संख्या में तकरीबन 13 गुना वृद्धि देखी गई है। इसके साथ ही इससे प्रभावित होने वाले देशों की संख्या तिगुनी हो गई है।

चीन में इसका सबसे ज्यादा असर हुवाई प्रांत में हुआ है। यहां अब तक कोरोना संक्रमण के 80,924 मामले सामने आए हैं, वहीं इससे 3,140 लोगों की जान जा चुकी है। चीन के बाद कोराना का सर्वाधिक प्रभाव यूरोप में देखने को मिला है। वहां 15,135 मामले सामने आए हैं, जबकि इससे होने वाली मौतों की संख्या 533 है। कोरोना के कारण खासी परेशानी झेल रहे देशों में इटली भी है। वहां कोरोना संक्रमण के अब तक 9,172 मामले सामने आए हैं, जबकि 463 लोगों की जान जा चुकी है। दक्षिण कोरिया में ऐसे 7,513 मामले प्रकाश में हैं। वहां अब तक 54 मौत चुकी हैं। फ्रांस और जर्मनी में क्रमश: 1,402 और 1,139 मामले हैं, जबकि इसे अब तक 30 और दो लोग जान गंवा चुके हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने कोरोना वायरस के खतरे को महामारी करार दिया है। डब्लूएचओ ने कहा कि इसका सबसे ज्यादा खतरा इटली और ईरान को है। उसके मुताबिक दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के शिकार लोगों की संख्या 1,26,100 है और इससे अब तक 4000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। फिलहाल जो सूरते हाल है, उसमें विश्व में 1,500 से ज्यादा कोरोना संक्रमित लोगों को विशेष निगरानी में रखा गया है। भारत में ऐसे मामलों की संख्या 74 है।

कोरोना संक्रमण के लक्षण
कोरोना संक्रमण के लक्षणों में बुखार, कफ, सांस लेने में तकलीफ या कम सांस ले पाना सबसे अहम हैं। गंभीर मामलों में निमोनिया, सिवियर एक्यूट रेस्परेटॉरी सिंड्रोम (एसएआरएस सिंड्रोम) और किडनी के नाकाम होने से लेकर मौत तक की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

कोई टीका नहीं
कोरना वायरस (कोविड-19) से बचाव के लिए अब तक कोई टीका नहीं है। इससे बचाव का सबसे बेहतर तरीका यही है कि हम इसके विषाणुओं से खुद को दूर रखने के लिए हरसंभव परहेज पर ध्यान दें। यह विषाणु एक व्यक्तिसे दूसरे व्यक्तितक पहुंचता है, इसलिए हमें इससे बचाव पर खास ध्यान देने की जरूरत है। कोशिश करनी चाहिए कि हम अपने नजदीकी लोगों से कम से कम छह फीट की दूरी बनाकर रहें या कोई काम करें। छींक या कफ के जरिए कोरोना संक्रमण का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्तितक पहुंचने का खतरा रहता है।

संक्रमण से बचाव
’अपने हाथों को बराबर साफ करते रहें। हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से बराबर साफ करें। सार्वजनिक स्थलों पर रहने पर या छींक अथवा कफ आने के बाद ऐसा बार-बार करें।
’अगर साबुन और पानी उपलब्ध न हों तो हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें, जिसमें कम से कम 60 फीसद अल्कोहल की मात्रा हो। इसका इस्तेमाल अच्छी तरह पूरे हाथ पर करें और इसे लगाकर हाथ तब तक मलते रहें जब तक वह पूरी तरह सूख न जाए।
’बिना धुले हाथ से आंख, नाक और मुंह को न छुएं।
’लोगों के ज्यादा नजदीक न जाएं। बीमार लोगों से परहेज बरतें।
’सामुदायिक क्षेत्र में कोरोना संक्रमण फैल रहा है तो विशेष संयम बरतें। खासकर वैसे लोग जिनके बीमार होने का खतरा सर्वाधिक होता है।

बीमार होने और न होने की स्थिति में
’अगर आपको स्वास्थ्य निगरानी में नहीं रखा गया है तो घर पर ही रहें।
’छींक और कफ को बाहर फैलने से रोकें।
’इस्तेमाल किए गए टिश्यूज को सावधानी से कूड़ेदान में फेंके। अगर आप बीमार हैं तो फेस मास्क जरूर पहनें। अगर सांस लेने में तकलीफ के कारण आप फेस मास्क नहीं पहनना चाहते तो ध्यान रखें कि आपकी छींक और कफ के संपर्क में दूसरे लोग न आएं।
’ अगर आप बीमार नहीं हैं तो फेस मास्क पहनने की जरूरत नहीं है। हां, तब भी आप खुद को स्वच्छ बनाए रखने पर जरूर ध्यान दें।
’आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि जिन चीजों को आप बार-बार इस्तेमाल करते हैं या छूते हों, वे भी पूरी तरह स्वच्छ हों। मसलन- फोन, कीबोर्ड, स्विचबोर्ड, टेबल-कुर्सी आदि।


बचाव में रखें ध्यान

कोविड-19 से बचाव के लिए सामान्य मेडिकल मास्क पर्याप्त नहीं हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने खासतौर पर एन-95 फेस मास्क इसके लिए सुझाया है। यह फेस मास्क हवा में मिले कणों को सांस में जाने से रोकता है। यह मास्क 0.3 माइक्रॉन तक के बारीक कण को भी 95 फीसद तक रोकने में कारगर है। एन-95 को छोड़कर दूसरे मास्क एक तो अपनी बनावट में काफी ढीले-ढाले होते हैं, दूसरे इससे पर्याप्त बचाव भी नहीं हो पाता है।

आखिर में जो एक बात ध्यान रखने की है, वह यह कि कोरोना का कोई इलाज नहीं है। हां, इसके लक्षणों के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं की मदद ली जा सकती है। यह भी कि एंटीबॉयोटिक इस बीमारी में काम नहीं करता क्योंकि विषाणु संक्रमण के मामले में यह निष्प्रभावी है।

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