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रविवारी दाना-पानी: परंपरा और प्रयोग

कुछ खाद्य ऐसे हैं, जो लगभग हर घर में बनते और खाए जाते हैं। बनाने की विधि के चलते उनके स्वाद में थोड़ा अंतर जरूर आ जाता है, नहीं तो सब जगह वे समान ही रहते हैं। मगर उन खाद्य पदार्थों को बनाते समय कुछ नया मोड़ दे दिया जाए, तो भोजन की एकरसता टूटती है और स्वाद भी बदल जाता है। इस बार ऐसे ही कुछ खाद्य में प्रयोग करेंगे।

Author Published on: March 29, 2020 5:03 AM
जनसत्ता रविवारी विशेष दाना-पानी -अचारी आलू रसेदार और मेथी प्याज की कचौड़ी।

मानस मनोहर
अचारी आलू रसेदार
रसेदार आलू प्राय: सभी घरों में बनता है। खासकर पूड़ी के साथ इसका मेल बहुत अच्छा बैठता है, इसलिए घरों से लेकर दुकानों तक में इसे बनाया जाता है। कुछ लोग रसेदार आलू बनाने के लिए टमाटर-प्याज का इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ दही का। कुछ लोग इनमें से कोई सामग्री नहीं डालते, सिर्फ पानी और मसालों का रसा तैयार करते हैं। कुछ लोग इसे खट्टा-मीठा बनाते हैं, तो कुछ तीखा। मगर बनाने का तरीका सबका लगभग एक जैसा होता है। यों रसेदार आलू बनाने में बहुत मेहनत या नए प्रयोग करने की गुंजाइश नहीं रहती, पर अचारी आलू बनाएं, तो उसमें नयापन आ जाता है। इसे पूड़ी, परांठे या फिर रोटी के साथ खाया जा सकता है। कई लोग चावल के साथ भी रसेदार आलू खाना पसंद करते हैं। उनके लिए अचारी स्वाद मजेदार होगा।

अचारी आलू बनाने के लिए बहुत मेहनत नहीं करनी पड़ती। बस, इसके लिए कुछ चीजें जरूरी होती हैं। अचारी स्वाद लाने के लिए सौंफ, कलौंजी और अमचूर जरूरी सामग्री है। इसमें दही के बजाय टमाटर-प्याज का उपयोग उचित रहता है। जो लोग प्याज पसंद नहीं करते, वे इसे छोड़ सकते हैं।

अचारी आलू बनाने के लिए छिलका उतार कर आलुओं को बड़े आकार में काट लें। टमाटर और प्याज को छोटे-छोटे आकार में काटें। कुछ कलियां लहसुन की और थोड़ा अदरक लेकर कूट लें।

अब कुकर में सरसों तेल गरम करें और उसमें मेथी दाना, राई, साबुत धनिया, सौंफ, कलौंजी, जीरा और अजवाइन का तड़का लगाएं। इसमें सौंफ और अजवाइन की मात्रा कुछ अधिक रखें। इसी से अचारी स्वाद आता है। तड़का चटक जाए तो उसमें पहले प्याज, फिर कुटा लहसुन-अदरक और फिर टमाटर डाल और थोड़ा नमक डाल कर धीमी आंच पर चलाते हुए गलने तक पकाएं। फिर आलुओं को छौंकें। अच्छी तरह मिला लें। फिर इसमें हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, एक चम्मच सब्जी मसाला और एक से डेढ़ चम्मच अमचूर पाउडर डालें। सारी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं और इतना पानी डालें कि आलू अच्छी तरह पानी में डूब जाएं। अब कुकर का ढक्कन लगा दें। आंच धीमी रखें और तीन सीटी आने या फिर पंद्रह मिनट तक पकने दें।

फिर आंच बंद कर दें। कुकर की भाप निकल जाने दें। खोल कर देखें, प्याज और टमाटर पूरी तरह गल चुके होंगे। कलछी से चलाते हुए फेंटें। इस तरह गाढ़ी ग्रेवी बन जाएगी और आलू टूट कर रसे में मिल जाएंगे। अचारी आलू रसेदार तैयार है। इसमें कटा हुआ धनिया और थोड़ा अदरक डाल कर जैसे खाना चाहें, खाएं।

मेथी-प्याज की कचौड़ी
भारतीय व्यंजन में कचौड़ी एक लोकप्रिय नाश्ता है। उत्तर भारत में लगभग हर जगह यह खाई जाती है। कचौड़ी भी कई तरह से बनती है। यों आमतौर पर कचौड़ी में उड़द या मूंग दाल का भरावन डाला जाता है। कुछ लोग आलू-प्याज का भरावन डालते हैं, तो कुछ सिर्फ प्याज का। कुछ मोठ या हरी मटर भर कर बनाते हैं, तो कुछ लोग सूखे मेवे और बेसन या दालों का भरावन बनाते हैं। कचौड़ी को मीठी चटनी या फिर रसेदार आलू के साथ खाना अच्छा लगता है। जब रसेदार आलू बनाए हैं, तो कुछ अलग तरीका अपनाते हुए कचौड़ी भी बना लेते हैं।

प्याज और मेथी की भरावन वाली कचौड़ी बनाएं, स्वाद अलग ही आएगा। यह कचौड़ी बनाने में सिर्फ भरावन में अलग प्रयोग करने की जरूरत है। सो, पहले भरावन तैयार करते हैं। इसके लिए दो बड़े चम्मच बेसन को बिना तेल-घी डाले कड़ाही में चलाते हुए महक उठने तक भून लें। फिर छन्नी से छान कर गांठें दूर करें और ठंडा होने के लिए रख दें। इसी तरह एक बड़ा चम्मच साबुत धनिया और एक बड़ा चम्मच सौंफ गरम करें। जब महक उठने लगे, तो उन्हें बाहर निकाल लें और कूट कर मोटा दरदरा बना लें।

अब मेथी के पत्ते साफ कर बारीक काटें। जितनी मात्रा में मेथी के पत्ते लिए हैं, उतनी ही मात्रा में हरे प्याज के सफेद वाले हिस्से को बारीक काट कर ले लें। इन्हें अलग-अलग रख दें। फिर एक कड़ाही में एक बड़ा चम्मच तेल और एक बड़ा चम्मच देसी घी मिला कर गरम करें और उसमें मेथी के पत्ते डाल कर तेज आंच पर चलाते हुए सिकुड़ने तक तलें और बाहर निकाल लें।

फिर उसी तेल में जीरा, हींग, चार-छह साबुत काली मिर्च, अजवाइन और थोड़ी कलौंजी डाल कर तड़का तैयार करें। फिर कटे हुए प्याज को छौंक दें। थोड़ा-सा नमक डालें और आंच मद्धिम करके चलाते हुए पारदर्शी होने तक पकाएं। फिर उसमें लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और जरूरत भर का नमक डाल कर अच्छी तरह मिला लें। इसी समय आधा चम्मच चीनी डालें, जिससे भरावन में मिठास आ जाए। फिर कुटी सौंफ और धनिया डाल कर मिला लें। अब तले हुए मेथी के पत्ते और भुना हुआ बेसन डाल कर अच्छी तरह मिलाएं। बेसन मिलाने से प्याज और मेथी के पत्तों में बचा हुआ पानी सूख जाएगा और कचौड़ी के फटने और पिलपिली होने का भय नहीं रहेगा।

अब इसके लिए आटा तैयार करें। दो कप मैदा लें। उसमें दो चम्मच देसी घी, एक छोटा चम्मच नमक और चुटकी भर बेकिंग पाउडर डालें और दोनों हाथें से रगड़ते हुए अच्छी तरह मिला लें। अब गुनगुने पानी से आटे को नरम गूंथें। गूंथने में ज्यादा जोर न लगाएं। बस इस तरह गूंथें कि पूरा मैदा अच्छी तरह मिल जाए। फिर इसे करीब आधे घंटे के लिए ढंक कर रख दें। फिर आटे को निकाल कर पटकते हुए मिलाएं, रोटी के आटे की तरह गूंथें नहीं। कम से कम बीस-पच्चीस दफा पटक कर आटे को लोच दें।

इस आटे से लोइयां तोड़ें और उसमें भरावन डाल कर अच्छी तरह बंद करें और भरपूर तेल में मद्धिम आंच पर सुनहरा होने तक तलें। नए स्वाद की कचौड़ी तैयार है। रसेदार आलू और मीठी चटनी के साथ खाएं।

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