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नन्ही दुनिया: कविता और शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

Author January 13, 2019 2:25 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

कुमार गौरव अजीतेंदु

कविता: समझदार गिलहरी

लकी गिलहरी लेकर आई, बोरी भर अखरोट
देख चतुर खरहे के मन में, आया थोड़ा खोट।

अखरोटों को पाने खातिर, सोचा एक उपाय
दौड़ लकी के पास गया और बोला- सिस्टर हाय!

बोरी मुझको दे दे, तेरा घर है काफी दूर
छोटी सी तू, हो जाएगी थक कर बिल्कुल चूर।

चतुर सोचता था कि बोरी आते अपने हाथ
भाग चलूंगा सरपट मैं तो छोड़ लकी का साथ।

मगर लकी भी होशियार थी, समझ गई सब खेल
कर डाली उसने खरहे की तुरंत योजना फेल।

बोली, चतुर निकल जा जल्दी, मचा न दूँ मैं शोर
मुझे पता है एक नंबर का तू है शातिर चोर।

शब्द-भेद: कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

आसन / आसान: योग विज्ञान के अनुसार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जो व्यायाम किए जाते हैं, उन्हें आसन कहते हैं। जबकि किसी काम को करने में बहुत कठिनाई नहीं होती, ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ती, तो उसे आसान कहते हैं।

असमान / आसमान: जब दो या दो से अधिक वस्तुएं अपने आकार-प्रकार में एक जैसी नहीं होतीं, तो उन्हें असमान कहते हैं। जबकि आसमान से आप सभी परिचित हैं। पृथ्वी के ऊपर के खुले वातावरण को आसमान कहते हैं।

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