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परिसर मुक्त पढ़ाई

आज सभी बच्चों तक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाएं उपलब्ध कराना दुनिया भर में बड़ी चुनौती है। खासकर भारत जैसे विशाल जनसंख्या और बीच में पढ़ाई छोड़ देने वाले बच्चों की ऊंची दर वाले देशों में सभी तक शिक्षा की पहुंच बनाना कठिन हुआ है। मुक्त विद्यालयी और विश्वविद्यालयी संस्थानों और पत्राचार पाठ्यक्रमों के जरिए भी इस समस्या पर काबू पाना आसान नहीं लगता। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए पढ़ाई-लिखाई यानी ई-लर्निंग की व्यवस्था को वरदान की तरह देखा जा रहा है। इस नई व्यवस्था के बारे में बता रही हैं नाज़ ख़ान।

Author February 18, 2018 03:26 am
प्रतीकात्मक तस्वीर।

डिजिटल युग में तकनीक ने जीवन की बहुत सारी कठिनाइयों को आसान बना दिया है। इन्हीं में से एक है ई-एजुकेशन। इसकी वजह से आज शिक्षा का भी स्वरूप बदलने लगा है। अब जरूरी नहीं कि शिक्षा के लिए कहीं जाकर और अध्यापक के सामने बैठ कर ही पढ़ाई की जाए, बल्कि तकनीक के सहारे एक क्लिक पर अब यह सुविधा घर बैठे उपलब्ध है। वहीं भारत में लगातार बढ़ती जनसंख्या, विश्वविद्यालयों पर बढ़ते छात्रों के बोझ और इससे प्रभावित होती शिक्षा को देखते हुए ऑनलाइन लर्निंग कहीं अधिक सहूलियत भरी लगती है। आज ऑनलाइन लर्निंग एक नई क्रांति है। भारत में ऑनलाइन एजुकेशन के क्षेत्र में जिस तरह प्रगति हो रही है, उससे उम्मीद है कि आने वाले समय में यह और बड़े स्तर पर लोगों की पहुंच तक आसानी से उपलब्ध होगी। आज तमाम विश्वविद्यालय परिसर मुक्त शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय भी इसके लिए परियोजनाओं को प्रश्रय दे रहा है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान और इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय तो बरसों से परिसर मुक्त शिक्षा की दिशा में अग्रसर हैं। तमाम विश्वविद्यालयों में पत्राचार पाठ्यक्रम भी चलाए जाते हैं, पर जबसे डिजिटल और आनलाइन माध्यमों से शिक्षा के प्रसार का द्वार खुला है, ई-लर्निंग की अपार संभावनाएं विकसित हुई हैं। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले और बच्चों के बीच में स्कूल छोड़ने की ऊंची दर वाले देश में इसके जरिए न सिर्फ साक्षरता बढ़ाने, बल्कि परंपरागत रोजगारों से जुड़े रह कर भी उच्च शिक्षा तक पहुंचने का रास्ता खोलना आसान हो गया है। इसलिए प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा की तमाम शाखाओं में ई-लर्निंग के पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। यहां तक कि अभी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान जैसे संस्थान ने भी आनलाइन चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई की परियोजना विकसित की है।

आज स्मार्ट फोन और ऐप सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रहे, बल्कि इनके जरिए शिक्षा पाना आसान और रोचक भी हुआ है। अब घर ही आभासी कक्षा में तब्दील हो गया है, जहां बैठे-बैठे ही आला दर्जे के शिक्षक आपकी तमाम जिज्ञासाओं का समाधान करते स्क्रीन पर नजर आते हैं। वर्चुअल क्लासरूम ने पढ़ाई को आसान बनाया है और साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता में भी इजाफा किया है। इससे शिक्षा का प्रसार हुआ है और रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं। ऑनलाइन एजुकेशन के जरिए अब घर बैठे ऑक्सफर्ड, हार्वर्ड, एमआइटी, आइआइटी सहित दुनिया के कई बड़े विश्वविद्यालयों से पढ़ाई की जा सकती है। भारत में रहते हुए विदेशी विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल कर सकते हैं। इसके लिए अब न तो अधिक रुपए खर्च करने की जरूरत है और न ही दूर जाने की। ऐसे में ई-लर्निंग के अब कई तरीके भी विकसित हो रहे हैं। ओपन कंटेट यानी इंटरनेट पर मौजूद ऐसी जानकारी या पाठ्य सामग्री, जो कहीं भी किसी भी उपभोक्ता के लिए मुफ्त या बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हो। इनमें सेल्फ लर्निंग के अलावा ऑनलाइन डिस्कशन ग्रुप्स और विकीपीडिया आधारित कोलैबोरेटिव लर्निंग यानी दुनिया के अन्य लोगों के साथ मिलजुल कर की जाने वाली पढ़ाई शामिल है। अब लगभग हर तरह के पाठ्यक्रम ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इनमें कंप्यूटर एनेलेटिक्स, डाटा-साइंस, मौसम विज्ञान, ऐतिहासिक घटनाओं का लेखा-जोखा, समाज विज्ञान आदि शामिल हैं। भारत में इंटरनेट और स्मार्टफोन के साथ ही ऑनलाइन लर्निंग का भी दायरा बढ़ रहा है। ऐसे में ऑनलाइन कोर्स कराने वाली कुछ संस्थाओं की तरफ से ऑनलाइन शिक्षा मोबाइल के जरिए कराए जाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है और इस तरह के कई ऐप भी आज मौजूद हैं। युवाओं को आज जिस गुणवत्तापूर्ण सामग्री की जरूरत है, वह उन्हें ऑनलाइन एजुकेशन के जरिए मिल रहा है। आज ई-लर्निंग की लोकप्रियता का आलम यह है कि अमेरिका के बाद अब सबसे ज्यादा ऑनलाइन कोर्स करने वाले रजिस्टर्ड उपभोक्ता भारत के हैं। ई-लर्निंग का कारोबार बढ़ने से ऑनलाइन ट्यूटर्स की भी एक नई जमात तैयार हो रही है। उन्हें घर बैठे रोजगार मिल गया है। 2017 में ऑनलाइन एजुकेशन मार्केट के करीब चालीस अरब डॉलर के आसपास पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। ई-लर्निंग और वर्चुअल क्लासेज के अलावा अब ई-लाइब्रेरी और ई-स्टडी का चलन अब छोटे शहरों में भी बढ़ने लगा है। छात्र अब कम समय में उपयोगी सामग्री चुन कर स्टडी करना ज्यादा पसंद करते हैं और इसके लिए वे ई-लर्निंग चुन रहे हैं, ताकि उनकी पढ़ाई आसान और कम समय में बेहतर तरीके से हो।

चर्चित शिक्षाविद सलमान खान की कैलिफोर्निया स्थित ‘खान एकेडमी’ मुफ्त ऑनलाइन लर्निंग प्रोग्राम शुरू करने के मामले में सबसे प्रभावशाली साबित हो रही है। बताया गया है कि दुनिया के करीब एक सौ नब्बे देश और लगभग तीन करोड़ बच्चे इसके द्वारा संचालित ऑनलाइन लर्निंग का लाभ उठा रहे हैं। अब तक गणित, विज्ञान, अंगे्रजी जैसे विषयों को ऑनलाइन पढ़ाती आ रही इस एकेडमी ने कुछ समय पूर्व हिंदी भाषा में भी ऑनलाइन प्रोग्राम शुरू किया है। इसके ऑनलाइन लर्निंग प्रोग्राम के लिए किसी भी तरह की सदस्यता लेने की जरूरत नहीं पड़ती। कोई भी इंटरनेट उपभोक्ता इस वेबसाइट से विश्वस्तरीय शिक्षा हासिल कर सकता है। अब छात्रों को ट्यूटर के पास जाने की जरूरत नहीं है। गणित, चिकित्सा विज्ञान या प्रबंधन हर विषय की पूर्ण जानकारी देते विडियो इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। इसमें खान एकेडमी अपने ट्यूटोरियल विडियो के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस एकेडमी की शुरुआत 2006 में हुई थी। तबसे अब तक लाखों लोग इसका फायदा उठा चुके हैं। इसके अलावा ‘लर्न 360’ वेबसाइट भी ऑनलाइन एजुकेशन के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है। यहां पहली से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए काफी विडियो और सामग्री उपलब्ध है। वहीं ‘एनपीटीइएल’ वेबसाइट इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए इसलिए खास है, क्योंकि यह घर बैठे लेक्चर क्लास में शामिल होने का अवसर मुहैया कराती है। साथ ही कुछ गणित को आसान बनाती साइटें भी मौजूद हैं। इनमें ‘मैथ्य प्ले ग्राउंड डॉट कॉम’ वेबसाइट के विडियो गणित को खेल-खेल में सिखाते है। इसके अलावा एडेक्स के मोबाइल ऐप की मदद से छात्र कोई भी कोर्स डाउनलोड करके इंटरनेट के बिना भी जब चाहें और जहां चाहें उन्हें पढ़ सकते हैं। निजीकरण के युग ने शिक्षा प्रणाली को भी प्रभावित किया है। शिक्षा के क्षेत्र में जो क्रांति आइ है उसका श्रेय इंटरनेट को दिया जाना चाहिए। यह इंटरनेट का ही कमाल है कि आज पूरी दुनिया एक क्लिक के साथ हमारे सामने होती है और यह संभव हो पाया है ई-लर्निंग के कारण। आने वाले समय में भी एजुकेशन सिस्टम में तेजी से बदलाव होगा। इसकी वजह है शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटलीकरण का बढ़ता दखल। इससे नौकरियों में टेक्नो फे्रंडली लोगों को महत्त्व मिलेगा और जो लोग स्कूल-कॉलेज जाने में असमर्थ हैं, उन्हें घर बैठे ऑनलाइन डिग्री और सर्टिफिकेट मुहैया होंगे। इसकी शुरुआत हो चुकी है और इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ ही अन्य शिक्षण संस्थानों में भी प्रैक्टिकल आधारित शिक्षण पर ध्यान दिया जाने लगा है। वहीं कुछ मेडिकल कॉलेजों में भी ई-शिक्षा और ई-मेडिकल के तहत बच्चों को पढ़ाने और मरीजों को ऑनलाइन इलाज देने की शुरुआत की गई है।

महंगी शिक्षा के दौर में

आज जहां शिक्षा का बाजारीकरण हो चुका है। शिक्षा महंगी हो चुकी है। गरीबों के पास उचित शिक्षा प्राप्त करने के लिए धन उपलब्ध नहीं है, तो वहीं जो संपन्न हैं उनके पास समय का अभाव है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था एक बेहतर विकल्प के तौर पर उभरी है। पिछले वर्ष देश के गरीब और स्कूल न जा सकने वाले बच्चों के लिए सरकार की ओर से प्रभावी कदम उठाते हुए ई-शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत करते हुए ‘स्वयं डॉट जीओवी डॉट इन’ वेब पोर्टल की शुरुआत की गई है। इससे बच्चे ऑनलाइन शिक्षा पा सकेंगे और उन्हें किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना होगा। इस पोर्टल की खासियत यह है कि इससे छात्र मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग सहित तमाम पाठ्यक्रमों की पढ़ाई घर बैठे कर सकेंगे। वहीं इससे छात्रों को घर बैठे ही सर्टिफिकेट और डिग्री भी हासिल होंगे, जो किसी भी विश्वविद्यालय में मान्य होंगे। ऑनलाइन एजुकेशन के प्रति लोगों का बढ़ता उत्साह देख कर कहा जा सकता है कि भारत में इसका भविष्य उज्जवल है। यही वजह है कि अब अधिकतर शिक्षण संस्थान इस व्यवस्था को अपना रहे हैं। पढ़ाई का बढ़ता खर्च और किसी भी प्रोफेशनल कोर्स की डिग्री हासिल करने के लिए कॉलेजों का चुनाव, प्रवेश परीक्षा और फिर एक मुश्त मोटी फीस चुकाना युवाओं की बढ़ती संख्या के लिए काफी मुश्किल साबित हो रहा है। भारत में महज बारह फीसद छात्रों को विश्वविद्यालय में दाखिला मिलता है। ऐसे में ऑनलाइन लर्निंग कराने वाली कंपनियों के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार है। इनमें अमेरिका की कोर्सेरा कंपनी इस क्षेत्र की सबसे अग्रणी कंपनी है। यह करीब एक सौ चालीस विश्वविद्यालयों से मुफ्त पढ़ाई करवाती है और करीब 1.70 करोड़ लोग इससे जुड़े हुए हैं। वहीं भारत में करीब तेरह लाख छात्र कोर्सेरा से पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन लर्निंग को उच्च शिक्षा के सुलभ पटल के तौर पर देखा जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक पिछले वर्ष ई-लर्निंग का बाजार दो सौ पचपन अरब डॉलर होने का अनुमान लगाया गया था। वहीं एक सर्वे के मुताबिक दुनिया के करीब 77.8 फीसद लोगों ने ऑनलाइन कोर्स करने पर हामी भरी है।मौजूदा समय में ऑनलाइन शिक्षा दो प्रकार से दी जाती है। इसमें से एक है के्रडिट कोर्स और दूसरा प्रोफेशनल ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन की तैयारी से संबंधित। इन पाठ्यक्रमों में छात्रों का पंजीकरण कर ऑनलाइन माध्यम से उनकी क्लास ली जाती है। दुनिया के कई प्रसिद्ध विश्वविद्यालय इस तरह के कोर्स संचालित कर रहे हैं। इनमें एमआइटी का ओपन कोर्स वेयर और हार्वर्ड ऑनलाइन लर्निंग शामिल हैं। विदेशाी भाषाओं, अकाउंटिंग और नर्सिंग की पढ़ाई के लिए ऑनलाइन लर्निंग प्रोग्राम अधिक विख्यात हैं।

ऐसे ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफार्मों की कोशिश है कि युवाओं की रोजगार की जरूरत पूरी हो। इसलिए इसी हिसाब से पाठ्यक्रम भी तैयार किए जा रहे हैं। वहीं जी20 देशों ने 2030 तक जो लक्ष्य निर्धारित किए हैं उनमें भारत का मकसद है कि देश की शिक्षा व्यवस्था को इस तरह तैयार किया जाए जहां डिजिटल साक्षरता पर ध्यान देते हुए स्कूली शिक्षा के दौरान ही कंप्यूटर, स्मार्टफोन,स्मार्टबोर्ड और विडियो कांफ्रेंसिंग की जानकारी से अवगत करा दिया जाए। आज तकनीक ने जहां दुनिया हमारे सामने लाकर रख दिया है, तो वहीं एक-दूसरे को समझने की जिज्ञासा भी लोगों में बढ़ी है। वे एक-दूसरे को समझना चाहते हैं। ऐसे में उस देश की भाषा सीखना सबसे जरूरी है। भारत भी तेजी से विकसित होता देश है। इसके प्रति भी लोगों की जिज्ञासा तेजी से बढ़ी है। ऐसे में अब विदेशी भी अब हिंदी भाषा सीखना चाहते हैं। चीन, अमेरिका सहित कई अन्य देशों के लोगों की हिंदी सीखने में रुचि बढ़ रही है। ऐसे में दुनिया भर में हिंदी पढ़ाने वालों की मांग लगातार बढ़ रही है।

पढ़ाई को बनाया आसान

इंटरनेट क्रांति ने ऑनलाइन एजुकेशन को घर-घर तक पहुंचा कर पढ़ना आसान बना दिया है। फिर चाहे स्कूल के आधारभूत पाठ्यक्रम हों या सीए, एमबीए, आइटी जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज। वहीं इसके अलावा भी अब गरमी की छुट्टियों में सीखे जाने वाले डांस, म्यूजिक जैसे पाठ्यक्रम भी ई-लर्निंग के जरिए घर बैठे सीखना आसान हो रहे हैं, तो अब एक क्लिक करते ही खाना बनाना सीखना हो, गीत-संगीत का आनंद लेना हो या इसको समझना हो यहां तक कि सिलाई, कढ़ाई जैसे काम सीखने के अवसर भी अब ऑनलाइन मुहैया हैं। मार्केट में ऐसे पोर्टलों की तादाद बढ़ती जा रही है जो जेईई, एआइपीएमटी, बैंकिंग जैसे इंट्रेंस एग्जाम की तैयारी घर बैठे कराते हैं। वहीं छात्रों की सहूलियत और इस ओर उनके झुकाव को देखते हुए अब यूनिवर्सिटीज भी अब मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स का चलन बढ़ रहा है। इन कोर्सेज की मदद से दूर बैठे लोग भी अब सीखने-पढ़ने लगे हैं। इससे जहां छात्रों को नए अवसर मिल रहे हैं, वहीं पेशेवरों को भी अध्ययन का मौका मिल रहा है। ऑनलाइन सीखे जाने वाले इन कोर्सेज को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है- एक बड़े ओपन ऑनलाइन कोर्स और छोटे प्राइवेट ऑनलाइन कोर्स। मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स विश्वविद्यालय स्तर के ऑनलाइन कोर्स हैं। इनके जरिए आम लोग पढ़ाई कर सकते हैं। वेब के जरिए चलाए जाने वाले इन पाठ्यक्रमों में वेब लेक्चर, ऑनलाइन मैटीरियल की सुविधा मिलती है। हालांकि इसमें भागीदारों की संख्या अधिक होने के कारण पढ़ने वाला जिस व्यक्तिगत ध्यान दिए जाने की अपेक्षा करता है वह इसमें नहीं मिल पाता। इसके अलावा स्मॉल ऑनलाइन प्राइवेट कोर्स भी चलाए जा रहे हैं। विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण पाने का यह एक व्यापक जरिया कहा जा सकता है, क्योंकि इसमें पेशेवरों को प्रशिक्षण के दौरान जिस विशेष ध्यान की जरूरत होती है वह उन्हें मिलता है। वहीं इससे पारंपरिक लर्निंग तरीकों से होने वाले खर्च की तुलना में कहीं कम व्यय होता है और समय की भी बचत होती है। हालांकि इस ऑनलाइन क्लासेज के लिए एक खास जगह की जरूरत होती है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए प्रतिभागियों के पास मीटिंग के लिए एक बड़ा कमरा, शैक्षणिक संसाधन और दूसरे डिजिटल टूल्स का होना जरूरी है।

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