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मुद्दा: सुविधाओं का मोल

हमारे देश में भी अब गैरपंरपरागत क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए सौर ऊर्जा यानी सोलर प्लांट लगाकर विद्युत उत्पादन के प्रयास किए जा रहे है।

एनडीए सरकार के पहले कार्यकाल में स्वर्ण चतुर्भुज योजना से सड़कों का जाल बिछाने का जो प्रयास किया गया, उससे कुछ हद यातायात व्यवस्था सुधरी।

महिला दिवस पर हम महिला सुरक्षा, समानता, जागरूकता और सशक्तीकरण की जोर-शोर से चर्चा करते हैं और समारोह का आयोजन कर उन्हें सम्मानित करते हैं। देश और दुनिया को बताते हैं कि विभिन्न क्षेत्रों में हमने महिला प्रगति और विकास का डंका बजाया है। लेकिन समझनेवाली बात यह है कि मुट्ठी भर महिलाओं के आगे बढ़ने से संपूर्ण महिला समाज का उत्थान नहीं होगा। 

किसी भी देश के विकास के मापदंड को आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता से नापा जा सकता है। आम नागरिकों के जीवन स्तर में आमूलचूल बदलाव आता है। सहज यातायात, पानी, बिजली, सड़क, स्कूल और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता से विकास की राह खुलती है। यही कारण है विकसित देशों में आधारभूत सुविधाओं खासतौर से सड़क, जल और वायु परिवहन की उपलब्धता, निर्बाध बिजली की आपूर्ति, पानी की व्यवस्था के साथ सबको स्तरीय शिक्षा और अस्पताल की सुविधाओं पर जोर दिया जाता है। दुनिया के देश भले ही कितनी कल्याणकारी योजनाएं और गरीबी दूर करने के नाम पर कितनी ही सब्सिडी लुटा लें, गरीबी के स्तर में कमी लाने और देश के तेजी से आर्थिक विकास का सपना आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के बिना पूरा नहीं हो सकता। पिछले कुछ वर्षों से कुछ राजनीतिक दलों द्वारा सत्ता प्राप्त करने के लिए रियायतों की घोषणाओं का अंबार लगाकर देश के नागरिकों को पुरुषार्थी बनाने की जगह कम से कम मानसिकरूप से पराश्रित बनाया जा रहा है। इसे देश के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता। भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री ने कई अवसरों पर इस प्रवृत्ति को हतोत्साहित करने की जरूरत जताई है।

विकास के लिए सबसे पहली जरूरत है सहज यातायात की होती है। एनडीए सरकार के पहले कार्यकाल में स्वर्ण चतुर्भुज योजना से सड़कों का जाल बिछाने का जो प्रयास किया गया, उससे कुछ हद यातायात व्यवस्था सुधरी। केंद्र की मौजूदा सरकार ने भी इसे प्राथमिकता में रखा है। परिवहन और रेल मंत्रालय ने इस दिशा में कुछ काम शुरू किए हैं। औद्योगिक विकास के लिए कोरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। इससे एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना आसान होने के साथ ही सामान को शीघ्र पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए सड़कों का अच्छा होना पहली शर्त है। सड़कों की अच्छी स्थिति से हजारों करोड़ रुपए तो पेट्रोल और वाहनों के टायरों और अन्य पर होने वाले अतिरिक्त व्यय से बचाया जा सकता है। सड़कें अच्छी होगी तो वाहनों के रखरखाव पर व्यय कम होगा। इसके साथ ही औद्योगिक विकास के लिए पानी-और बिजली जरूरी है। विकसित देशों में बिजली की स्थिति काफी अच्छी होने से औद्योगिक उत्पादन में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। फ्रांस आदि देशों में बिजली के संकट से निपटने के लिए परमाणु ऊर्जा पर जोर दिया जा रहा है।

इससे कम लागत में विद्युत उपलब्धता संभव हो रही है। हमारे देश में भी अब गैरपंरपरागत क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए सौर ऊर्जा यानी सोलर प्लांट लगाकर विद्युत उत्पादन के प्रयास किए जा रहे है। विंड एनर्जी पर जोर दिया जा रहा है। सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए अब दिल्ली जैसे शहरों में प्रायोगिक तौर पर घरों में सोलर प्लांट लगाकर विद्युत उत्पादन बढ़ाने को प्रेरित किया जाने लगा है। गैरपरंपरागत क्षेत्र खासतौर से सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए लागत को कम करने का उपाय करना होगा। क्योंकि यह स्पष्ट है कि सोलर उत्पादों के उपयोग के लिए सरकार द्वारा लाख अनुदान देने के बावजूद लोगों ने अधिक उत्साह नहीं दिखाया है। इसी तरह से सबको शिक्षा का संकल्प लेकर सरकार लंबे समय से आगे बढ़ रही है, मिड-डे मील और आरटीई प्रावधानों के बावजूद उत्साहजनक परिणाम नहीं मिल रह हैं।

हाल ही में सुब्रहमण्यम कमेटी ने शिक्षा नीति पर दिए अपने सुझावों में मिड डे मिल सुविधा को दसवीं तक के स्कूलों तक विस्तारित करने का सुझाव दिया है। इसी तरह से चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। नदियों को जोड़ने के अभियान को भी प्राथमिकता सूची में लेने की चर्चा है। आधारभूत सुविधाओं को सिर्फ सीमेंट, लोहा और कंक्रीट के रूप में ही नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह विकास का मापदंड होता है। फोर लेन की निर्बाध यातायात वाली सड़कें, रेल और वायुयात्रा की सहज पहुंच और पानी बिजली की उपलब्धता होगी तो शिक्षा, चिकित्सा आदि का भी विस्तार होगा। इसका सीधा लाभ उस क्षेत्र के रहने वाले नागरिकों को स्वत: रोजगार प्राप्त करने में हो सकेगा। खेती का विकास होगा, बाजार में नए उत्पाद आएंगे और रोजगार की उपलब्धता से लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा जिसे सही मायने में विकास कहा जा सकता है।

हमें चुनाव पर ध्यान देना होगा। जरूरत है कि लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ हो। हालांकि, यह ज्यादा व्यावहारिक नहीं है, लेकिन कोशिश करनी चाहिए। सरकारों को कड़े कदम उठाते हुए खैरात बांटने वाली योजनाओं के स्थान पर आधारभूत सुविधाओं के विस्तार जैसी योजनाओं को अमली जामा पहनाने में लगना चाहिए। इससे देश में विकास का ठोस आधार तैयार हो सकेगा।

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