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नन्ही दुनियाः शब्द-भेद और कविता

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

सूरज को संदेशा दो मां

कविता

सूरज को संदेशा दो मां

सूरज को संदेशा दो मां,
ठीक नहीं है गाल फुलाना।
बिना बात के लाल टमाटर,
बन कर लाल-लाल हो जाना।

खुद तपते हो हमें तपाते।
बेमतलब ही हमें सताते।
गाल फुला कर रखे आपने,
ना हंसते ना मुस्का पाते।
ऐसे में उम्मीद कहां है,
तुमसे कुछ भी राहत पाना।

आंखें लाल रिस रहा गुस्सा।
बोलो अंकल यह क्या किस्सा?
गठरी में बांधो अंगारे,
बंद करो गर्मी का बस्ता।
ठीक नहीं नभ की भट्ठी में,
लू की खिचड़ी अलग पकाना।

सुबह-सुबह जब तुम आते हो,
मौसम मधुर गीत गाता है।
जब गज भर चढ़ जाते नभ में,
धरती, अंबर डर जाता है।
ऊपर चढ़ने का मतलब क्या,
होता है अभिमान दिखाना?

शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

मोर / मौर

चमकीले आकर्षक पंखों वाले एक प्रकार के पक्षी को मोर कहते हैं। आपने मोर तो देखा ही होगा। मगर शादी के समय सिर पर पहने जाने वाले मुकुट को मौर कहते हैं। आम के फूल यानी बौर को भी मौर कहते हैं।

प्रणव / प्रणय

ओंकार मंत्र, परमेश्वर को प्रणव कहते हैं। ऊं का उच्चारण करते समय उससे निकलने वाली ध्वनि प्रणव है। जबकि पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका के बीच होने वाले प्रेम को प्रणय कहते हैं। प्रणय का एक अर्थ प्रेम पूर्वक की जाने वाली प्रार्थना भी होता है।

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