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योग दर्शनः योग से मधुमेह का उपचार

मेशा शरीर थका-सा रहना, काम करने का मन न होना, अधिक भूख और प्यास लगना, खून और मूत्र में शर्करा की अधिक मात्रा, त्वचा का रूखा-सूखा होना, सिर दर्द, घबराहट, उत्तेजना की कमी तथा नपुंसकता आदि है मधुमेह के लक्षण, जानिए उपाय।

Author July 14, 2019 1:44 AM
योग से पाएं मधमेह से निजात

डॉ. वरुण वीर

भारत में मधुमेह का रोग सामान्य है। पैंतीस से लेकर सत्तर वर्ष की आयु के व्यक्ति में यह रोग अधिक पाया जाता है। शरीर के अंदर अंत:स्रावी ग्रंथि पैन्क्रियास में इंसुलिन नामक हार्मोन नहीं बनना इस रोग का मुख्य कारण है। मगर अधिक मात्रा में चीनी का प्रयोग, मोटापा, असंतुलित जीवन, अनियमित भोजन, तनाव, अधिक मानसिक काम करना तथा वंशानुगत भी इस रोग के कारण हो सकते हैं।

रोग के लक्षण : हमेशा शरीर थका-सा रहना, काम करने का मन न होना, अधिक भूख और प्यास लगना, खून और मूत्र में शर्करा की अधिक मात्रा, त्वचा का रूखा-सूखा होना, सिर दर्द, घबराहट, उत्तेजना की कमी तथा नपुंसकता आदि देखने को मिलते हैं। सामान्य रूप से रक्त की शर्करा का स्तर 80 से 120 मिलीग्राम के बीच होता है और भोजन करने के बाद यह 120 से 140 मिलीग्राम हो जाता है। यह रोग गरीब मेहनतकश लोगों में कम तथा अमीरों में अधिक पाया जाता है।

उपचार : योग से शत प्रतिशत मधुमेह का उपचार संभव है। योगासन, योगिक आहार-विहार इस रोग से मुक्ति दिलाने में सहायक है। आज मधुमेह की बीमारी सामान्य हो चुकी है और यह विदेशों में कम, भारत में अधिक संख्या में पाई जाती है। विदेशों में प्रवास के दौरान मैंने बहुत कम लोगों को इस बीमारी से बचने का मार्ग बताया है, क्योंकि यह रोग वहां न के बराबर ही दिखाई देता है, जिसके कई कारण हैं। जैसे मीठे का सेवन वहां पर कम तथा आलस्य पूर्ण जीवन भी नहींं है। मेरे चाचा जी शुद्ध रूप से किसान थे और शारीरिक रूप से अत्यधिक मेहनत भी करते थे और शरीर पर चर्बी न के बराबर थी, लेकिन फिर भी वे चालीस वर्ष की आयु में आते-आते मधुमेह के रोगी हो गए थे। मेरे गहन अध्ययन करने से पता चला है कि मेरे दादाजी यानी चाचाजी के पिताजी को भी मधुमेह की शिकायत थी और वे दोनों ही मीठे का सेवन कुछ अधिक करते थे। यही रोग मेरे पिताजी को भी हो गया था, लेकिन नियमित योगासन तथा यौगिक आहार-विहार के कारण उन्होंने सौ फीसद मधुमेह से छुटकारा पा लिया था। आज मैं दावे के साथ वंशानुगत मधुमेह के रोगी को भी ठीक करने में सक्षम हूं। जो व्यक्ति इस रोग के कारण प्रतिदिन इंसुलिन लेता हो, तो कुछ ही महीनों में वह इंसुलिन के इंजेक्शन लेना छोड़ देगा और इस रोग से मुक्त हो जाएगा।

भोजन द्वारा उपचार : इंसुलिन बनने में क्रोमियम पीकॉलिनाते की कमी से रुकावट आती है। इसको लेने के लिए चोकर सहित खड़े अनाज, सूखे मेवे, मशरूम, खमीर तथा फूलगोभी का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। सब्जियों में मेथी, सहजन, पालक, टमाटर, शलगम, परवल, तोरई, लौकी, मूली का साग, करेले का सेवन तथा फलों में जामुन, आंवला, मौसमी तथा संतरे का सेवन करें। मधुमेह में आई शरीर की कमजोरी को दूर करने के लिए हरा कच्चा नारियल, अखरोट, सोयाबीन, काजू, मूंगफली, दही, छाछ तथा गेहूं और जौ के आटे को बराबर मात्रा में मिलाकर उसकी रोटी का सेवन करें।
जड़ी बूटियों में नीम निंबोली, हल्दी, सोंठ, अदरक, लहसुन, धनिया, दालचीनी का सेवन लाभकारी है।
क्या न खाएं- भोजन जल्दी पचने वाला हो, कब्ज कारक न हो, मांस, मछली, चावल, मैदा से बनी चीजें, आलू, उड़द की दाल, पूरी, पराठे, चीनी, मिठाइयां, जैम, जैली, चॉकलेट, शकरकंद, आम, केला, चीकू, पपीता, शरबत, अंगूर, कोल्ड ड्रिंक, अधिक ठंडा पानी तथा आवश्यकता से अधिक भोजन न करें।

योगासन द्वारा उपचार
अर्धमत्स्येंद्रासन : सुबह खाली पेट स्वच्छ शांत वातावरण में दोनों पैर सीधा रखते हुए बाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए बार्इं एड़ी को दाएं नितंब से सटा कर रखें तथा दाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए बाएं घुटने और जंघा के निकट रख के दाएं पैर के तलवे एड़ी को जमीन पर रख दें तथा यहां से बाएं हाथ को दाएं पैर के घुटने क्रॉस करते हुए दाएं पैर के पंजे को पकड़ लें तथा दायां हाथ कमर पर पीछे की ओर लपेटे हुए सिर को पीछे की दिशा में ले जाएं। जिस प्रकार से कपड़े धोने के बाद निचोड़े जाते हैं उसी प्रकार से इस आसन में पेट की स्थिति हो जाती है। इसका सीधा असर पैन्क्रियास पर पड़ता है। इस आसन को विपरीत दिशा में करते हुए दोहराएं। आरंभ में दोनों स्थितियों में दो-दो मिनट रुकने का प्रयास करें तथा अभ्यास करते हुए पांच मिनट तक ले जाएं।

मंडूकासन : दोनों पिंडलियों के ऊपर बैठते हुए बाएं पैर के अंगूठे पर दाएं पैर का अंगूठा रखें। इसे वज्रासन कहते हैं। यहां से दोनों हाथ के अंगूठे अंदर की ओर रखते हुए मुठ्ठियां बंद कर लें तथा नाभि के दाएं बाएं रख दें। यहां से गहरी लंबी सांस भरें और धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए आगे झुकते जाएं। दोनों मुठ्ठियां पेट और जांघों के बीच आ जाएंगी और सिर उठा कर आगे की दिशा में देखें तथा श्वास सामान्य कर लें। ध्यान को नाभि पर केंद्रित करें और अनुभव करें, जिस प्रकार हमारा हृदय धड़कता है उसी प्रकार नाभि भी धड़कती है। दो से तीन मिनट इस आसन को करें।

अर्ध बद्धपद्मासन : दोनों पैरों को सीधा एक साथ मिला कर रखें, बाएं पैर को घुटने से मोड़ कर दाएं पैर की जांघ पर रखें तथा दाएं पैर को घुटने से मोड़ कर बाएं पैर की जांघ पर रखें। यहां से बाएं हाथ को कमर के पीछे से ले जाते हुए बाएं पैर के अंगूठे को पकड़ें तथा दाएं हाथ को बाएं घुटने पर रख कर शरीर के ऊपरी भाग कमर, कंधे, गर्दन तथा सिर को बाएं और पीछे की तरफ यथाशक्ति मोड़ें। यही स्थिति दूसरी दिशा में दोहराएं। पद्मासन बना रहे, दाएं हाथ को कमर के पीछे से लपेटते हुए दाएं अंगूठे को पकड़ें तथा शरीर के ऊपरी भाग को इस बार दाएं दिशा में यथाशक्ति मोड़ते हुए पीछे की ओर देखें। दोनों स्थितियों में दो से तीन मिनट तक रुकें।

सेतुबंध आसन : जमीन पर सीधा कमर के बल लेट कर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ लें तथा एड़ी और पंजे जमीन पर नितंब से सटे रहें। श्वांस भरते हुए कमर, पेट और छाती को यथाशक्ति ऊपर उठाएं। इस स्थिति में अधिक देर तक रोकने के लिए दोनों हाथों का सहारा भी लिया जा सकता है। अन्यथा हाथ पीछे जमीन पर ही रहें। दो से तीन मिनट रुकने के बाद धीरे से सामान्य स्थिति में आ जाएं।

सर्वांगासन : जमीन पर सीधे कमर के बल लेट जाएं। दोनों हाथों को जांघों के साथ रखें तथा श्वास लेते हुए दोनों पैर, नितंब, कमर, छाती को हाथों का सहारा देते हुए ऊपर उठा दें, जिससे कि थोढ़ी गर्दन से छू जाए। इस स्थिति में शरीर का सारा भार कंधों और गर्दन पर आ जाएगा और हाथों को कोहनियों का सहारा मिलता रहे। शक्ति का संचार मस्तिष्क की ओर महसूस करें ।

हलासन : सर्वांगासन की स्थिति में आकर धीरे-धीरे दोनों पैरों को सिर के पीछे लाने का प्रयास करें और दोनों पैरों के पंजों को जमीन पर रखें। इस स्थिति में सबसे अधिक खिंचाव गर्दन तथा रीढ़ की हड्डी पर आएगा।

प्राणायाम कपालभाति : श्वास को झटके के साथ तीव्र गति से बार-बार बाहर निकालना। श्वास लेते समय आवाज न आए और श्वास छोड़ते समय छींकने जैसी आवाज आए। दो से तीन मिनट तक करने से मधुमेह के रोग को दूर करने में लाभकारी है।
भस्त्रिका : श्वास बहुत छोटी रखते हुए तीव्र गति से लेना और छोड़ना करें। लगभग दो-तीन मिनट तक इस प्राणायाम को करें।
ये सभी आसन, प्राणायाम तथा भोजन में परिवर्तन अपनाकर मधुमेह के रोग को शत-प्रतिशत दूर किया जा सकता है। इंसुलिन के इंजेक्शन तथा दवाई पर जीवन अधिक समय तक सुख नहींं दे सकता है। प्राकृतिक भोजन, सादा जीवन, शांत मन, परोपकार की भावना, और प्रतिदिन नियमित रूप से योगासनों का अभ्यास करना इस रोग से छुटकारा पाने का सरल और उत्तम उपाय है। ल्ल

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