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रविवारी

एक समन्वयवादी आचार्य

भारतीय ज्ञानगंगा में कश्मीर का स्थान काशी जैसा है, लेकिन मध्यकालीन विकृति ने कश्मीरियत की पहचान को संकीर्ण कर दिया। कश्मीरियत की स्थापना में...

हंसी रुकी नहीं

पीपल चैंरी पर सघन हरी पत्तियों की छाया में उसके पांवो के निशान थे, मोटा पौड़ी से आनन फानन में जीप लाया, इतनी सुबह...

किंतु, परंतु लेकिन…

एक गजलकार ने पूरी मशक्कत के बाद खतरा उठा कर परिणाम घोषित कर ही दिया। उसके अनुसार कल चौदहवीं की पूरी रात व्योम विमर्श...

मुद्दा : अपराध का समाजशास्त्र

आंकड़ों के मुताबिक देश में हर पंद्रह सेकेंड में कोई न कोई अपराध जरूर घटित होता है। इसमें बलात्कार, दहेज-हत्या और पारिवारिक जुल्म आदि...

चिंता : परेशानी में किसान

आजादी के कितने ही साल बीत गए। जाने कितनी सरकारे आर्इं और गर्इं, पर कोई भी किसानों की हालत में सुधार नहीं कर पाया।...

आधी आबादी : उद्यमिता की जटिल राह

देश में कारोबार और राजनीति जैसे पेशों में महिलाओं की उपस्थिति से जुड़ा यह एक बड़ा सच है कि उनका असल में इनमें कोई...

कूड़े का कलंक

साल 2013 में शुरू हुआ ‘कसा मुक्था बंगलुरु’ यानी कचरा मुक्त बंगलुरु का अभियान असफल साबित हुआ।

भारंगम: छवियों के बीच

स्पेनिश नाटक ‘समव्येहर इन किखोते’ विशेष रूप से अपनी प्रकाश परिकल्पना के लिए याद रखा जाएगा। प्रकाश परिकल्पना के लिए टॉर्च की रोशनी का...

कहानी : खेल खत्म

समझ में आया...बेड की बैकरेस्ट से उसका सिर टकराया था। तो वह ऊंघते-ऊंघते नींद में पहुंच गई थी।

व्यंग्य : विचार गोष्ठी

विचारक कहलवाने के लिए विचार गोष्ठी में जाना अनिवार्य होता है, इसलिए गया था मैं। सोचा था हाल खचाखच भर गया होगा-बैठने की तो...

कविताएं : पगडंडियां

पगडंडियां कवित पंक्ति में एक के पीछे एक चलते, बनती है पगडंडी. साथ-साथ, समांतर चलने के लिए. बनानी पड़ती है सड़क

जानकारीः खनिज तेल

औद्योगिक कारखाने हों या यातायात के साधन। सभी को ऊर्जा के लिए के लिए र्इंधन की जरूरत होती है। यह र्इंधन निकाला जाता है...

कहानीः मोहन की मेधा

मोहन कक्षा में नया विद्यार्थी आया था। एकदम सीधा-सादा बच्चा था। उसके सीधे पन की कुछ बच्चे मजाक बनाया करते थे। मोहन ने कभी...

लोकजीवन के चटक रंग

भोपाल में पिछले दिनों लोकरंग महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें कई तरह के रंगारंग कार्यक्रम संपन्न हुए। इसकी एक झलक प्रस्तुत कर रही...

आधी आबादीः भक्ति और मुक्ति

भारत की लोकतांत्रिक और कल्याणकारी शासन व्यवस्था में संवैधानिक मूल्यों को लागू करना राज्य की जिम्मेदारी मानी गई है। यानी राज्य और संविधान के...

मुद्दाः कानून के उलट

अगर महिला की प्रगति चाहिए तो संस्कार के नाम पर, जो सदियों से लड़कियों को कमजोर बनाए रहने का ढोंग चल रहा है, उसे...

स्मरणः मसिजीवी

अमरकांत का लेखन प्रेमचंद के यथार्थवादी लेखन की अगली कड़ी है, जो आजादी के बाद देश के विकास के ढांचे के खोखलेपन को साफ-साफ...

कविताएंः शाहदत की सांसें

शाहदत की सांसें बिकती हुई सांसें लगने लगती हैं बोझ शहादत की सांसें चीर देती हैं दुश्मन का सीना