ताज़ा खबर
 

रविवारी

विवाद बनाम पदक की आस

टेनिस जगत में आज भारत की पहचान भी अपने डबल्स खिलाड़ियों से ही है। ऐसा नहीं है कि भारत ने सिंगल्स के अच्छे खिलाड़ी...

‘भाषा’ कॉलम में सुरेंद्र प्रभात खुर्दिया का लेख : हिंदी के लिए

एक अनुमान के मुताबिक भारत के सत्तर प्रतिशत से भी अधिक लोग हिंदी भाषा को आसानी से बोल समझ सकते हैं। फिर भी इस...

‘कुप्रथा’ कॉलम में शंकुतला देवी का लेख : तंत्र-मंत्र का जाल

देश में तांत्रिकों, फलित ज्योतिषियों और ओझाओं का एक बड़ा जाल फैला हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक दस लाख से ज्यादा लोग इसमें...

‘चलन’ कॉलम में वीणा भाटिया का लेख : किशोरों को बचाइए गैजेट से

गैजेट के असर से बच्चों में कई तरह की गलत आदतें भी विकसित होने लगती हैं। कई बच्चे आॅनलाइन अश्लील सामग्री के संपर्क में...

‘आधी आबादी’ कॉलम में कुलीना कुमारी का लेख : लेखन में महिलाएं

ये सब बातें अपनी जगह हैं, मगर बदलते समय के साथ न केवल महिलाओं के कार्यक्षेत्र बढ़ रहे हैं बल्कि पुरुष भी बदल रहे...

ज्ञानप्रकाश विवेक की गजलें

बोगी में रह गया हूं अकेला मैं दोस्तो! एक एक करके सारे मुसाफिर उतर गए

मीरा सीकरी की लिखी कहानी : पैकेज

डिस्टर्ब तो वह मुझे कर गई थी। मैं भी तो मां को पुरानी दिल्ली वाले घर में अकेला छोड़ कर, यहां दक्षिण दिल्ली में...

दिनेश कुमार का लेख : गोदान की भूल-गलती

‘गो-दान’ के मूल पाठ के सामने आ जाने से पाठकों और अध्येताओं के लिए भिन्न-भिन्न संस्करणों में हो रहे परिवर्तनों को चिह्नित करना आसान...

इच्छामृत्यु कानून : जनता के पाले में गेंद

हाल में सरकार ने इच्छामृत्यु कानून का एक मसविदा तैयार कर उसे स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर डाला है और इस बारे में आम...

अभिषेक कुमार का लेख : कानून की राह

2011 में यह मामला तब ज्यादा चर्चा में आया जब कोमा में बिस्तर पर पड़ी नर्स अरुणा शानबाग के मामले की सुनवाई करते हुए...

मुरलीधर वैष्णव की कविता : चींटी का उपकार

चींटी बिल पानी में डूबे, लगीं मचाने वे भी शोर, पत्तों की नावें तब आर्इं, ले चलीं उन्हें पेड़ों की ओर

उपासना बेहार की लिखी कहानी : दाखिला

मां ने कहा-डॉक्टर साहब हम दोनों को ही पढ़ना नहीं आता है, आप ही पढ़ कर बता दें कि इसमें क्या लिखा है और...

जानकारी कॉलम में प्रकीर्तिमा का लेख : काजग की कला

कलाकार को पेपर फोल्डर कहते हैं। पेपरफोल्ड करके विभिन्न प्रकार की डिजाइनें बनाने की कला को जापानी भाषा में ओरिगेमी कहा जाता है।

जनसत्ता रविवारी में फिरोज बख़्त अहमद का लेख : निरे मुक्केबाज नहीं थे अली

जिस अमेरिकी सरकार ने आगे चलकर अली को आंखों का तारा बनाया, उसी ने सत्तर के दशक में अली को ‘वियतनाम की लड़ाई...

‘चिंता’ कॉलम में प्रमोद भार्गव का लेख : पानी की लूट की छूट

आर्थिक उदारवाद के तहत वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के मकसद से भारत की नीतियां लचीली और भ्रामक बनाई गई हैं।

आधी आबादी कॉलम में गायत्री आर्य का लेख : वैवाहिक बलात्कार कानून के अगर-मगर

निसंदेह भविष्य में ऐसा कानून जरूरी है, लेकिन सबसे पहले बहुत लंबी तैयारी के साथ ठोस जमीन तैयार किए जाने की सख्त जरूरत है।...

माध्यम कॉलम में विनय जायसवाल का लेख : सोशल मीडिया पर बेलगाम होती भाषा

लेखकों, पत्रकारों और ब्लॉगरों पर इस तरह के शाब्दिक हमलों की लंबी शृंखला है। रोज कोई न कोई इस हादसे का शिकार हो रहा...

रमेश प्रजापति की कविताएं : उठना, यात्रा व सरसों का फूलना

चिरमिराने लगती हैं कोल्हुओं में पिरती सरसों से, वह सिर्फ संजय की आंखों से देखता है