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रविवारीः प्रयोगों का क्रिकेट

टी -20 क्रिकेट का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। 2003 में शुरू हुए क्रिकेट के इस प्रारूप ने टैस्ट क्रिकेट और एक दिवसीय क्रिकेट की लोकप्रियता को भी पीछे छोड़ दिया है।
Author April 16, 2017 03:52 am

मनीष कुमार जोशी

टी -20 क्रिकेट का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। 2003 में शुरू हुए क्रिकेट के इस प्रारूप ने टैस्ट क्रिकेट और एक दिवसीय क्रिकेट की लोकप्रियता को भी पीछे छोड़ दिया है। इस समय लगभग सभी टैस्ट क्रिकेट खेलने वाले देशों में टी-20 लीग खेली जा रही है। आईपीएल शुरू होने के बाद क्रिकेट के इस फार्मेट ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। क्रिकेट के यों तो कई फार्मेट बन गए हैं, लेकिन मान्यता और लोकप्रियता एक दिवसीय क्रिकेट और टी-20 को ही मिली है। इसके बावजूद दुनिया में अभी भी क्रिकेट को और भी छोटा करने की कोशिश की जा रही है। इन कोशिशों को तब विराम लगा जब टी-20 अपनी लोकप्रियता के चरम पर पहुंच गया। लेकिन अभी तक क्रिकेट के ये प्रारूप किसी न किसी रूप में प्रचलित है।

सिक्स ए साइड क्रिकेट
क्रिकेट को फुटबाल की तरह कम समय में खत्म करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को पहुंचाने के मकसद से सिक्स ए साइड क्रिकेट की शुरुआत 18 वीं शताब्दी में हो चुकी थी, लेकिन इसके लोकप्रिय फॉर्मेट की शुरुआत हांगकांग में 1992 में हुई। दुनिया के नामी खिलाड़ियो ने इसमें हिस्सा लिया और 1992 से यह प्रतियोगिता लगातार खेली जा रही थी। ये टैस्ट क्रिकेट और वन डे क्रिकेट के बाद सबसे लोकप्रिय फॉर्मेट था। इसमें एक टीम में छह खिलाड़ी होते थे। लीग मैच 5 से 6 ओवर का होता था और फाइनल 8 ओवर का होता था। एक मैच दो घंटे से भी कम समय में निपट जाता था। स्टेफिंग फ्लेमिंग, शेन वार्ने, उमर अकमल, वसीम अकरम और रोबिनसिंह इस लीग के सफलतम खिलाड़ी रहे है। क्रिकेट हांगकांग द्वारा इसका आयोजन किया जाता था। टी-20 की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही इसके लिए राशि जुटाना मुश्किल हो गया और 2012 के बाद इसका आयोजन नहीं किया गया। सिक्स ए साइड क्रिकेट का आयोजन आईसीसी की अनुमति से होता था लेकिन यह प्रारू क्रिकेट का अधिकारिक प्रारूप नहीं बन सका । क्रिकेट की टीम को आधा करने के कारण यह फॉर्मेट लोगों में ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो सका। पांच और छह ओवर का मैच क्रिकेट के लिहाज से बहुत कम होता है। इसलिए दर्शको ने इसे अस्वीकार कर दिया।

डबल विकेट क्रिकेट
सिक्स ए साइड क्रिकेट की तरह डबल विकेट क्रिकेट भी कम समय में सीमित करने के उद्देश्य से शुरू हुआ था और शुरुआती दौर में लोकप्रिय भी हुआ। नब्बे के दशक की शुरुआत में डबल विकेट क्रिकेट खेला जाना शुरू हुआ। इसे आधिकारिक मान्यता नहीं मिली लेकिन यह किसी न किसी रूप में कहीं न कहीं आयोजित होता रहा । इसे लोकप्रियता 2003 में मिली जब इसकी विश्व चैंपियनशिप खेली गई। पहली विश्व चैंपियनशिप न्यूजीलैंड ने जीती थी। इसमें एक मैच दस से बारह ओवर का होता है। एक टीम में दो आलराउंडर होते है। बल्लेबाज इसमें आउट होने के बाद भी खेलते रहते है, आउट होने पर उनके खाते से पैनाल्टी के तौर पर कुछ रन कम कर दिए जाते है। क्षेत्ररक्षण के लिए खिलाड़ी आयोजकों द्वारा उपलब्ध करवाए जाते हंै। क्रिकेट का यह फार्मेट भी टी-20 की बढ़ती लोकप्रियता से कुचला गया। इसके अलावा आउट होने में क्रिकेट के नियम बदलना भी लोगो को पसंद नहीं आया।

सिंगल विकेट क्रिकेट
क्रिकेट को एथलेटिक्स स्पर्धाओं की तरह व्यक्तिगत खेल बनाने के प्रयासों का परिणाम सिंगल विकेट क्रिकेट है। यह कोई नया फॉर्मेट नहीं है बल्कि 18 वी शताब्दी में इंग्लैंड में काफी लोकप्रिय था। ये दो खिलाड़ियो के बीच खेला जाता है। फील्डर दोनों खिलाड़ियों को आयोजक उपलब्ध कराते हैं। सिंगल विकेट में बदलते समय के साथ नियम भी बदलते गए। पहले इसमें खिलाड़ी तब तक खेलता था जब तक वह आउट नहीं हो जाता। बाद में इसे चार से छ ओवर तक सीमित कर दिया गया। इसमें खिलाड़ी आउट होने पर आउट माना जाता है और उसे लौटना पड़ता है। 18 वी शताब्दी से शुरू हुआ सिंगल विकेट क्रिकेट किसी न किसी रूप में आज भी प्रचलन में है। व्यक्तिगत स्पर्धा जैसा होने के कारण इसे आधिकारिक मान्यता नहीं मिल पाई। दो ही खिलाड़ियों के बीच खेला जाने के कारण लोगों के बीच ही लोकप्रिय नहीं हो सका। एक दिवसीय क्रिकेट के बाद तो इसकी आवश्यकता बिलकुल भी नहीं रही। इसके बावजूद किसी न किसी रूप में यह खेला जाता रहा है। वर्तमान में भी इंग्लैंड में कई क्लब इसका आयोजन कराते हैं। इसमें खिलाड़ी की व्यक्तिगत क्षमताओं का आकलन होता है।

टेबल क्रिकेट
बैडमिंटन और टेबल टेनिस की तरह क्रिकेट को इंडोर खेल बनाने का प्रयास है टेबिल क्रिकेट। इस फॉर्मेट का प्रचलन भी इंग्लैंड में ही हुआ। नॉटिंघम ट्रेंट विश्वविद्यालय के डॉग विलियम्सन ने इस खेल को 1960 में तैयार किया। यह खेल टेबल टेनिस की टेबिल बोर्ड पर खेला जाता है। बॉलिंग के लिए बॉलिंग मशीन लगी होती है जबकि बल्लेबाज के लिए एक छोटा बैट होता है। बॉलर बॉलिंग मशीन से बॉल फेंकता और बल्लेबाज टेबल पर उसे खेलता है। यह प्रारूप सीमित लोकप्रियता पाता गया। इंग्लैंड के अलावा आस्ट्रेलिया में भी यह खेला जाता रहा है। इंग्लैंड ऐंड वैल्स क्रिकेट बोर्ड इसका नेशनल टूर्नामेंट आयोजित कराता है। 2006 में इसके फाइनल में सचिन तेंदुलकर भी उपस्थित थे। टेबल क्रिकेट के कई फार्मेट अपनी सुविधा के अनुसार विकसित होते गए। लेकिन क्रिकेट के इस फॉर्मेट को भी लोकप्रियता नहीं मिली। हालांकि आज भी इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया में खेला जाता है। दूसरे देशो में यह लोकप्रिय नहीं है।

इंडोर क्रिकेट
क्रिकेट को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने के लिए इंडोर क्रिकेट शुरू हुआ आस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न के डॉकलैंड स्टेडियम में इंडोर एकदिवसीय क्रिकेट खेला गया। 16 अगस्त 2000 को डॉकलैंड इंडोर स्टेडियम में आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच एकदिवसीय मैच खेला गया जिसमें माइकल बेवन और मार्क वॉ ने शतक बनाए। इस स्टेडियम में अंतिम मैच 3 फरवरी 2006 को आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच में ही खेला गया। उसके बाद अभी तक इस स्टेडियम में कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच आयोजित नहीं हुआ है। इसके अलावा इंडोर क्रिकेट अलग से भी खेल जाता है, जिसके लिए वर्ल्ड इंडोर क्रिकेट फेडरेशन बना हुआ है। इस प्रकार के क्रिकेट में एक साइड में आठ खिलाड़ी होते है। मैच दस से बारह ओवर का होता है। इसमें बल्लेबाज द्वारा तो रन बनाए ही जाते हैं। साथ में कई बोनस रनों का भी प्रावधान होता है। इंडोर क्रिकेट में टैस्ट मैच और वर्ल्ड कप जैसे मैच भी आयोजित हो चुके हैं। 1995 में इंग्लैंड में इंडोर क्रिकेट का वर्ल्डकप शुरू हुआ, तब से प्रत्येक दो साल बाद यह आयोजित होता है। पिछला वर्ल्ड कप न्यूजीलैंड में हुआ जिसने आस्ट्रेलिया ने सभी वर्गो में जीता । इंडोर क्रिकेट लगातार आयोजित हो रहा है। लेकिन क्रिकेट नियमों को तोड़ने-मोड़ने के कारण यह ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुआ है। फिर भी इंग्लैंड और आॅस्ट्रेलिया जैसे देशो में यह ख्ोला जाता है। क्रिकेट में अब भी प्रयोगों का दौर जारी है। क्रिकेट के प्रयोगो में पहली सफलता तब मिली जब एकदिवसीय क्रिकेट को कामयाबी मिली। एकदिवसीय क्रिकेट की कामयाबी इतनी जबदरस्त थी कि लोग टैस्ट क्रिकेट को भूलने लगे थे। ऐसी ही कामयाबी टी-20 को मिली है कि इसने बाकी सभी प्रारूपों को पीछे छोड़ दिया है। लेकिन यह कामयाबी सीधे तौर पर नहीं मिली है। इसके पहले क्रिकेट में अनेक प्रयोग हुए, क्रिकेट को कम समय में सीमित करने के लिए। टी-20 के विकास की कड़ी माना जा सकता है। १

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