प्याज, ककड़ी और पकौड़ी

पारंपरिक रूप से पकौड़ियां प्याज की ही बनती हैं। हरा प्याज हर मौसम में मिल जाता है।

मानस मनोहर

सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। गरमागरम और मसालेदार व्यंजन इस मौसम में बहुत भाते हैं। हमारे देश के हर हिस्से में पकौड़े-पकौड़ियां बनाने और खाने की अपनी परंपरा है। यानी हजारों तरह के पकौड़े और पकौड़ियां बनती हैं। ज्यादातर पकौड़ियां बेसन के साथ बनती हैं, तो कई बिना बेसन के भी बनती हैं। कुछ ऐसी ही पकौड़ियों की बात इस बार।

हरे प्याज की पकौड़ियां
पारंपरिक रूप से पकौड़ियां प्याज की ही बनती हैं। हरा प्याज हर मौसम में मिल जाता है। पकौड़ियां बनाने के लिए प्याज बहुत मोटे न लें। जहां तक हो सके पतले लें। अगर पतले प्याज नहीं हैं, तो भी कोई बात नहीं। प्याज को अच्छी तरह धो और साफ कर बारीक-बारीक काट लें। हरे वाले भाग को अलग करके काटें और सफेद वाले हिस्से को बीच से चीरा लगा कर बारीक-बारीक काट लें। एक आदमी के खाने भर के लिए एक कटोरी कटा हरा प्याज पर्याप्त होता है। इसी अनुपात में लोगों के अनुसार प्याज ले लें। प्रति व्यक्ति दो हरी मिर्च या अगर अधिक तीखा खाते हैं, तो इससे अधिक मिर्चें काट कर डाल सकते हैं। इसके अलावा एक छोटा चम्मच अजवाइन रगड़ कर डालें। चौथाई चम्मच हींग पाउडर, आधा छोटा चम्मच कुटी लाल मिर्च, चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच चाट मसाला और स्वाद के अनुसार नमक डालें। अब प्रति कटोरी के हिसाब से खाने के चम्मच से दो चम्मच और अधिकतम ढाई चम्मच बेसन डालें।

अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए हाथ से मसल कर सारी सामग्री का मिश्रण तैयार करें। ध्यान रखें कि मिश्रण बहुत पतला न होने पाए और न बहुत कड़ा हो। कड़ा रहेगा, तो पकौड़ियां सख्त बनेंगी। अगर मिश्रण ज्यादा पतला होगा, तो पकौड़ियां फैल कर फट सकती हैं और ऊपर की परत तो पक कर लाल हो जाएगी, मगर भीतर का हिस्सा कच्चा रहने की आशंका रहती है। इसलिए मिश्रण को मध्यम लचीला तैयार करें, ताकि उन्हें हाथों में लेकर गोल आकार दिया जा सके। मिश्रण को ढंक कर थोड़ी देर को रख दें।

तब तक कड़ाही में सरसों का तेल गरम करें। पकौड़ियां सरसों के तेल में ही स्वादिष्ट बनती हैं। यों रिफाइंड या मूंगफली आदि के तेल में भी बना सकते हैं, पर प्याज की पकौड़ियों का मेल सरसों के तेल के साथ ही अच्छा बनता है। जब तेल से धुआं उठने लगे, तो आंच मध्यम कर दें। अब हरे प्याज के मिश्रण में से छोटे-छोटे हिस्से लेकर गोलाकार बनाते हुए डालते जाएं। उलट-पलट कर मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक पकाएं।

एक पकौड़ी को तोड़ कर देखें, अगर बीच के हिस्से में कच्चापन है, तो पकौड़ियों को बाहर निकाल लें और थोड़ी देर बाद हल्का ठंडा हो जाने के बाद दोनों हथेलियों के बीच रख कर दबाएं और एक बार फिर से गरम तेल में तल लें। हरे प्याज की पकौड़ियों को इस मौसम में सोए की चटनी के साथ खाएं, बहुत स्वादिष्ट लगेंगी। सोए की चटनी बनाने के लिए आधी मात्रा हरा धनिया, आधी मात्रा सोए की पत्तियां, हरी मिर्च और एक टमाटर लें। उसमें नमक, चुटकी भर जीरा और चुटकी भर सौंफ मिलाएं और चटनी पीस लें। इसके साथ हरे प्याज की पकौड़ियों का आनंद बढ़ जाता है। चाय के साथ गरमागरम पकौड़ियों का आनंद लें।
कमल ककड़ी की पकौड़ियां

कमल ककड़ी सेहत की दृष्टि से बहुत फायदेमंद कंद है। यह रेशेदार तो होती ही है, इसमें लौहतत्त्व और अयोडीन भरपूर होता है। इस तरह यह पेट संबंधी विकारों को भी दूर करता है। कमल ककड़ी के कोफ्ते, रसेदार सब्जी आदि बना कर तो आपने खूब खाया होगा, मगर इसकी पकौड़ियां कम ही लोगों ने खाई होंगी। कमल ककड़ी की पकौड़ियां कश्मीर में खूब खाई जाती हैं। यों कमल ककड़ी पूरे भारत में सब्जी की दुकानों पर मिल जाती है। इसकी पकौड़ियां बहुत स्वादिष्ट बनती हैं। इन्हें बनाने के लिए बहुत मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती।

पकौड़ियां बनाने के लिए सबसे पहले कमल ककड़ी की ऊपरी परत को हल्के हाथों से पीलर से छील कर उतार लें। फिर तीन-चार टुकड़ों में काट कर उबले हुए पानी में नमक मिला कर कमल ककड़ी के टुकड़ों को डाल कर दस मिनट के लिए रख दें। फिर रगड़ कर धो लें। एक बार फिर ठंडे पानी से अच्छी तरह धो लें। फिर दो-तीन इंच की लंबाई में इन टुकड़ों को काट कर दो-तीन इंच की मोटाई में लंबा-लंबा लच्छा काट लें। अगर तीखापन चाहते हैं, तो इसमें कुछ हरी मिर्च भी बीच से लंबा चीरा लगा कर डाल दें।

कमल ककड़ी के पकौड़े बनाने के लिए बेसन की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें आधा मैदा और आधा चावल का आटा डालना अच्छा रहता है। इससे पकौड़ियां कुरकुरी बनती हैं। कटी हुई कमल ककड़ी में इतनी ही मात्रा में मैदा और चावल का आटा डालें, ताकि वह टुकड़ों पर अच्छी तरह चिपक जाए।

फिर इसमें एक छोटा चम्मच कुटी लाल मिर्च, जरूरत भर का नमक, आधा छोटा चम्मच गरम मसाला डालें। एक चम्मच अदरक और लहसुन का पेस्ट भी डालें। सारी चीजों को हाथ से मिलाएं। अगर मैदा और चावल का आटा सूखा बचा रहता है, तो ऊपर से पानी के छींटे मारते हुए उन्हें चिपकने तक मिलाएं। ध्यान रखें कि पानी अधिक नहीं डालना है, नहीं तो मैदा कमल ककड़ी को छोड़ कर अलग हो जाएगा।

अब कड़ाही में तेल गरम करें। आंच को मध्यम कर दें और कमल ककड़ी के मिश्रण में से छोटे-छोटे हिस्से लेकर पकौड़ियों का आकार देते हुए तेल में डालें। सुनहरा रंग आने तक उलट-पलट कर पकाएं। यों कश्मीर में कमल ककड़ी की पकौड़ियों के साथ मूली और दही की चटनी परोसी जाती है, मगर मैदानी इलकों में रहने वाले लोगों के लिए मूली और दही का मेल अच्छा नहीं रहता। विषम आहार बनाता है। इसलिए इन्हें सोए की चटनी, सास या फिर लहसुन हरी मिर्च की चटनी के साथ गरमा-गरम परोसें और चाय के साथ लुत्फ उठाएं।

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