ताज़ा खबर
 

नन्ही दुनियाः शरारती मेमना

भोली बकरी का एक छोटा मेमना था। उसका नाम था मोनू। भोली और मोनू राजगढ़ जंगल में नदी किनारे रहते थे।

Author April 15, 2018 01:48 am

राजेश मेहरा

भोली बकरी का एक छोटा मेमना था। उसका नाम था मोनू। भोली और मोनू राजगढ़ जंगल में नदी किनारे रहते थे। बचपन में मोनू बहुत प्यारा और आज्ञाकारी था, लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया, उसकी शरारतें बढ़ती गर्इं। अब तो वह अपनी मां का भी कहना नहींं मानता था। मोनू की शरारतों से उसके पड़ोसी परेशान रहने लगे। वह कभी किसी का सामान तोड़ देता, कभी किसी का खाना चुरा कर खा जाता। कई बार तो उसकी शरारत से जंगल के जानवरों के छोटे बच्चों की जान मुसीबत में फंस चुकी थी। पानी सिर से ऊपर होता देख जंगल के प्रधान बसंत भेड़िये ने भोलू बकरी से कहा कि अगर उसने मोनू मेमने को नहीं समझाया तो वह उसकी शिकायत भीमा भालू कोतवाल से करेगा और हो सकता है उसे सजा हो जाए, इसलिए सावधान हो जाओ और आज के बाद मोनू मेमने की कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए। इतना कह कर वह चला गया। भोली बकरी काफी घबरा गई, वह नहीं चाहती थी कि मोनू जेल जाए, लेकिन मोनू भी शरारत करने से बाज नहीं आ रहा था।

अब भोली बकरी चिंतित रहने लगी। एक दिन भोली के पड़ोसी मिट्ठू तोते ने जब भोली को उदास देखा तो उसका कारण पूछा। भोली ने दुखी होकर सब बातें मिट्ठू को बता दी। मिट्ठू ने भोली को कहा कि तुमने प्यार और डांट दोनों से समझा लिया, लेकिन वह नहीं समझ रहा है, तो हमें उसे डर से समझाना पड़ेगा ताकि वह शरारत करना छोड़ दे। भोली ने प्रश्नवाचक निगाहों से मिट्ठू की तरफ देखा तो मिट्ठू ने उसके कान में कुछ कहा, जिसे सुन कर भोली थोड़ी आश्वस्त हुई कि शायद अब मोनू सुधर जाए।
मिट्ठू और उसके दोस्त अब मोनू पर निगाह रखने लगे। एक दिन मोनू लकी खरगोश को परेशान कर रहा था। लकी इधर-उधर छिपने की कोशिश कर रहा था। मिट्ठू और उसके दोस्त यह सब देख रहे थे। उन्होंने परेशान लकी को संकेत दिया तो लकी घने जंगल की तरफ चल दिया और मोनू भी उसको और परेशान करने के लिए उसके पीछे चल पड़ा। मोनू सोच रहा था कि शायद लकी उससे बचने के लिए जंगल की तरफ जा रहा है। शाम होने वाली थी, दूर सूरज ढलने वाला था। मिट्ठू और उसके दोस्त मोनू, जुगनू, सोनू हिरन, भानू भेड़िया भी छिपते हुए मोनू का पीछा कर रहे थे।

घने जंगल में पहुंचते ही अंधेरा हो गया। लकी को जब मिट्ठू ने संकेत दिया तो वह छिप गया और मोनू को दिखाई देना बंद हो गया। तब तक अंधेरा भी गहरा गया था। मोनू अंधेरा देख कर घबरा गया। उसे आसपास कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
अब मिट्ठू और उसके दोस्तों ने अपनी योजना पर काम शुरू किया।
मिट्ठू ने आवाज बदल कर चीते की आवाज निकाली और भानू भेड़िया अंधेरे का फायदा उठा कर तुरंत मोनू के पास से गुजरा। मोनू ने समझा कि उसके बगल से चीता गुजरा है। वह बुरी तरह घबरा गया। डर से उसकी हालत खराब थी। तभी मानू जुगनू और उसके दूसरे जुगनू साथियों ने तुरंत तेज रोशनी की और बंद कर दी, उसी समय सोनू हिरन ने अपनी आंखें फैलाई, जो कि जुगनुओं के उजाले में और भी भयानक लगी।
अब तो घबरा कर मोनू रोने और चिल्लाने लगा- कोई बचाओ। अंधेरे में उसे कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था।
मिट्ठू तोते ने आवाज बदल कर कहा- ‘मोनू, तुम जानवरों को बहुत परेशान करते हो, आज मैं तुम्हे खा जाऊंगी।’
मोनू ने रोते हुए पूछा- ‘तुम कौन हो?’
‘मैं इस जंगल की चुड़ैल हूं।’ मिट्ठू ने कर्कश आवाज में जवाब दिया।
मोनू अब तो जोर से रोने लगा। वह थर-थर कांप रहा था।
मोनू रोते हुए बोला- ‘मुझे माफ कर दो चुड़ैल बहन, मैं आज के बाद कभी किसी को परेशान नहीं करूंगा।’
मिट्ठू कर्कश आवाज में फिर बोला- ‘नहीं, तुम तंग करोगे, मैं तुम्हें नहीं छोडूंगी।’
मोनू बोला- ‘मैं सच बोल रहा हूं, अब किसी को तंग नहीं करूंगा। बस, मुझे छोड़ दो और जाने दो। चाहे आप मुझसे कुछ भी करवा लो, मैं आज के बाद किसी को तंग नहीं करूंगा।’
तभी मिट्ठू बोला- ‘ठीक है, तो ठीक तुम्हारे पीछे एक हरा पेड़ है। उसके तने पर जाकर लिखो कि अगर मैं आगे से किसी को तंग करूंगा तो मेरी शिकायत राजा शेर सिंह से कर दी जाए, ताकि मुझे सजा मिल जाए।’
मोनू रोते हुए बोला- ‘ठीक है, मैं लिखता हूं, लेकिन अंधेरे में कैसे लिखूं?’
तभी इशारा पाकर मानू जुगनू और उसके दोस्तों ने इक्कठा होकर रोशनी कर दी।
मोनू ने मिट्ठू के कहे अनुसार पेड़ के तने पर कांटे से लिख दिया। जुगनुओं ने रोशनी बंद कर दी।
अब मिट्ठू फिर कर्कश आवाज में बोला- ‘अगर शरारत की, तो यह लिखाई राजा को दिखा दी जाएगी और तुम्हें कड़ा दंड मिलेगा। अब तुम जल्दी से जुगनुओं की रोशनी में रास्ता देखते हुए अपने घर भाग जाओ। फिर इधर मत आना और किसी को भी इस बारे में मत बताना, वरना और भी बुरा हो सकता है।’
मोनू ने गर्दन हिलाई और जुगनुओं की दिखाई रोशनी में रास्ता तलाशते हुए अपने घर की तरफ भागा।
मिट्ठू और उसके दोस्त यह देख कर जोर से हंसे।
अगले दिन से मोनू ने शरारत बिल्कुल छोड़ दी और किसी को उस घटना के बारे में नहीं बताया।
सब जानवर मोनू के इस बदलाव से अचरज में तो थे ही, खुश भी थे कि मोनू अब सुधर गया है। ०

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App