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दांत

प्रकृति ने विभिन्न जीव-जंतुओं को दांत प्रदान किए हैं, जो न केवल उनके शिकार करने और अपना बचाव करने के काम आते हैं बल्कि भोजन चबाने के काम भी आते हैं।

प्रतीकात्मक चित्र

प्रकृति ने विभिन्न जीव-जंतुओं को दांत प्रदान किए हैं, जो न केवल उनके शिकार करने और अपना बचाव करने के काम आते हैं बल्कि भोजन चबाने के काम भी आते हैं। कुछ जीवों के दांतों की बनावट अजब अनोखी होती है। ‘हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और’ कहावत तो आपने सुनी होगी। सच भी है कुछ नर हाथियों के एक या दो दांत बाहर दिखाई देते हैं जो आकार में काफी बड़े होते हैं।

लेकिन यह केवल दिखावटी होते हैं। भोजन चबाने के दांत उसके मुंह में होते हैं जो दिखाई नहीं देते । घोड़ों की उम्र उनके दांतों की स्थिति को देख कर तय की जाती है। उम्र के साथ उनके दांत घिसते जाते हैं। बंदरों के मुंह में इंसानों की भांति दंतपक्ति होती हैं। हालांकि आकार में वे इंसानों से बड़े होते हैं। अपने इन दांतों से वे इंसान को मुंह चिढ़ाते हैं। दांत काफी मजबूत होते हैं।

गाय-बैल के दांत दो बार खाने के काम आते हैं। पहली बार वह भोजन को फटाफट अपने पेट में डाल लेती है और फिर फुर्सत में बैठकर जुगाली करती है यानी धीरे-धीरे चबाती है। शेर, चीता, तेंदुआ आदि हिंसक जीव अपने दांतों से ही शिकार की गर्दन को दबोचते हैं और पल भर में ही उसका शरीर चीरफाड़ देते हैं। इनके दांत दिखने में काफी डरावने भी होते हैं। हालांकि, गैंडे के दांत होते हैं लेकिन घास चरने के लिए ये अपने होंठों का इस्तेमाल करते हैं। होंठ काफी नुकीला होता है जो घास चरने के लिए बहुत ही उपयुक्त है। समुद्री गाय चरने वाली प्राणी है, इसलिए इनके दांत गिरते रहते हैं । इनके आगे के पुराने दांत गिरते जाते हैं और पीछे से नए दांत आते रहते हैं। समुद्री गाय धीमी गति से चलने वाली स्तनापायी जीव है जो समुद्र में रहती है।

मगरमच्छ के दांत अधखुले और तीखे होते हैं और जबड़ा शक्तिशाली। शिकार को पकड़ कर उसे उलट-पुलट कर यह अपने तेज दांतों से उसके छोटे-छोट टुकड़े कर खा जाता है। स्लोथ नामक स्तनपायी जीव दक्षिण अमेरिका में पाया जाता है। उसके दांत खूंटी जैसे और पूर्ण विकसित होते हैं। यह पेड़ों की पत्तियां व टहनियां खाता है।
कुत्तों के दांत भी बड़े नुकीले होते हैं। वे अपने दांतों से ही काटते हैं। अगर कुत्ता पागल हो जाए तो उसके काटने पर इंसान को रेबीज नामक जानलेवा रोग हो सकता है।
इंसान के दांत न केवल काटने-चबाने के काम आते हैं बल्कि बोलने में भी सहायता करते हैं। सुंदर दंतपक्ति हंसी को और खूबसूरत बना देती है। संख्या में ये बत्तीस होते हैं। सांप के मुंह में दांत उनके जन्म से पहले ही आ जाते हैं। अंडे को तोड़कर बाहर आने के लिए संपोले के मुंह पर ऊपर की ओर एक दांत होता है। विषैले सर्पों में पाए जाने वाले विषदंतों की, मुंह के ऊपरी जबड़े में स्थित विभिन्न जातियों में अलग-अलग होती है।

किसी में पीछे की ओर तथा किसी में आगे की ओर मौजूद ये दांत आकार में एक समान नहीं होते। चूहे और छछूंदर के दांत नुकीले और तीखे होते हैं जो कड़ी से कड़ी चीजों को कुतरने और बिल बनाने में समर्थ होते हैं। इन्हीं दांतों से ये इंसान को काटते भी हैं। चमगादडों के दांत सुई की तरह तेज होते हैं। इनसे ये किसी भी जानवर की खाल में छेद कर सकते हैं और उसका खून पी जाते हैं।
यहां तक कि अपने दांतों से सोते हुए आदमी पर भी हमला कर खून पी जाते हैं। कीड़ों के दांत नहीं होते बल्कि मुंह में काटने या चबाने के लिए जबड़ा होता है जो पिन की तरह का चुभा कर अपना भोजन चूसने का यंत्र होता है। चिड़ियों के दांत नहीं होते। उनके स्थान पर चोंच होती है और इसी से वे अपना भोजन करती हैं। स्तनधारी प्राणियों में पेंगोलियन नाम के जानवर के दांत नहीं होते। यह चीटियां खाकर जिंदा रहता है।

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