ताज़ा खबर
 

नन्ही दुनिया: कविता और शब्द-भेद

राम करन की कविता

Author November 4, 2018 10:12 PM
प्रतीकात्मक फोटो।

राम करन

मेले में

चलो चलें कल मेले में
क्यों बैठेंगे अकेले में?
बहुत मजा आएगा, सोचो
जब हम होंगे खेले में।

सेब शरीफा और अनार
उससे बढ़ कर केले में
पेठा और जलेबी होंगी
मन लग जाए ठेले में।

गुब्बारे असमानी होंगे
तले समोसे तेले में
रंग-बिरंगे बहुत खिलौने
पड़ना नहीं झमेले।

अंगुली बस पकड़े रखना
बह न जाना रेले में
जो भी लेना सोच-समझ कर
भर-भर लेना थैले में।

लट्ठबाजी-मलखंभ देख कर
खुश हो लेना गोले में
थक जाना, घर आकर सोना
पूरी रात खटोले में।

शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

पाशा / पासा
तुर्की सरदारों की एक उपाधि होती है पाशा। पाशा यानी बादशाह। जबकि पासा लकड़ी का बना छह पटल वाला एक लंबा टुकड़ा होता है, जिसके हर पटल पर बिंदु बने होते हैं। इसे चौसर खेलनें में उपयोग किया जाता था। आज भी लूडो और सांप-सीढ़ी जैसे खेलों में इसका उपयोग होता है। पासा यानी डाइस।

मेदा / मैदा / मेधा
पेट के उस हिस्से को मेदा कहते हैं, जिसमें भोजन पचता है। मेदा एक प्रकार की सुगंधित औषधि भी होती है। जबकि मैदा बहुत महीन आटे को कहते हैं। मेधा का अर्थ अद्भुत स्मरणशक्ति को कहते हैं। मेधा यानी प्रज्ञा, मनीषा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X