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नन्ही दुनियाः कहानी – रंगपुर की पाठशाला

रंगपुर नामक एक गांव पहाड़ियों के बीच स्थित था। उस गांव में प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद सहजता से लिया जा सकता था।

Author October 7, 2018 6:57 AM
चित्र का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है

रंगपुर नामक एक गांव पहाड़ियों के बीच स्थित था। उस गांव में प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद सहजता से लिया जा सकता था। वसंत ऋतु में तो वह गांव ऐसा लगता था जैसे पीले रंग की चादर ने सबको ढक लिया हो। पेड़ों की कतारें हर राही को अपनी छांव और शीतलता देने के लिए हर क्षण तैयार रहती थीं। विभिन्न तरह के फल-फूल अपनी सुगंध से सबको मोहित कर देते थे। वहां सभी लोग प्रेम से और मिल-जुल कर रहते थे। यहां की खूबसूरत वादियों का समय-समय पर फिल्मांकन भी किया जाता था। इसी गांव में रामबल का परिवार रहता था। उसका छोटा-सा और सुखी परिवार था। परिवार में उसकी पत्नी रामवती और सात वर्षीय पुत्र गोपाल था। रामबल खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का गुजारा करता था। उसका पुत्र अत्यंत तीव्र बुद्धि का था। वह किसी भी बात या पाठ को एक बार देखने या पढ़ने पर ही याद कर लेता था।

इस समय वह गांव की पाठशाला में तीसरी कक्षा में पढ़ता था। मुश्किल यह थी कि वह स्कूल सिर्फ पांचवीं कक्षा तक था। पांचवीं के बाद अधिकतर बच्चे अपने पिता के साथ खेती-बाड़ी में लग जाते या फिर अन्य किसी काम में। जो बच्चे पढ़ने के इच्छुक थे वे चाह कर भी आगे नहीं पढ़ पाते थे, क्योंकि गांव के नजदीक कोई स्कूल नहीं था। गोपाल को पढ़ाई से बहुत लगाव था। वह पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बन कर अपने गांव का नाम रोशन करना चाहता था। पर यही सोच-सोच कर वह परेशान रहता था कि पांचवीं के बाद आगे की पढ़ाई कैसे करेगा? वह योजनाएं बनाता रहता था कि कैसे गांव में ही बड़ा स्कूल बन जाए, ताकि अनेक बच्चे आगे की पढ़ाई करें और शिक्षित बनें ।

एक दिन बैठा-बैठा वह यह सोच रहा था कि तभी उसके दिमाग में एक योजना आई और वह खुशी से झूम उठा। उसने सोचा कि मंत्री हर समस्या को सुलझाते हैं तो क्यों न गांव में पाठशाला खुलवाने के लिए मैं भी शिक्षामंत्री से निवेदन करूं और उन्हें इससे संबंधित एक पत्र लिखूं। गांव में पाठशाला खुलवाने के विचार पर शिक्षामंत्री अवश्य सहमत होंगे और इस पर शीघ्र कदम उठाएंगे। अगले दिन उसने अपने स्कूल शिक्षक से इस विषय में बात की। शिक्षक नन्हे से गोपाल की इतनी अच्छी योजना सुन कर बहुत प्रभावित हुए। साथ ही उन्हें यह जान कर अच्छा लगा कि रंगपुर का एक नन्हा-सा बच्चा इतनी गहरी समझ रखता और परिस्थितियों से मुकाबला करने का साहस रखता है। शिक्षक पूरी तरह गोपाल के साथ थे।

जब गांव में बड़ी पाठशाला खुलवाने की बात धीरे-धीरे सभी गांववालों को पता चली, तो वे भी इस बात पर सहर्ष सहमत हो गए कि शिक्षामंत्री को पत्र लिख कर रंगपुर में बड़ी पाठशाला खुलवाने का निवेदन किया जाए। इस प्रकार गोपाल ने शिक्षक की सहायता से शिक्षामंत्री को पत्र लिखा। उस पत्र पर गांव के सभी पढ़ने वाले बच्चों के हस्ताक्षर करवाए गए। इसके साथ ही प्रधान शिक्षक ने एक पत्र अलग से शिक्षामंत्री के नाम लिखा, जिसमें उन्होंने उन्हें वार्षिक समारोह में सादर आने का निमंत्रण दिया था। सारी कार्रवाई पूरी कर वह पत्र शिक्षामंत्री तक भिजवा दिया गया। आखिर एक दिन गोपाल को प्रधान शिक्षक ने अपने कार्यालय में बुलाया और कहा कि शिक्षामंत्री ने वार्षिक समारोह का मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा है कि बड़ी पाठशाला खुलवाने के लिए वे पहले यहां का दौरा करेंगे और फिर अपनी सहमति देंगे।

पूरा गांव, पूरी पाठशाला और गोपाल इस खबर को पाकर अत्यंत उत्साहित हो गए। अब स्कूल के सभी बच्चे वार्षिक समारोह में प्रस्तुत किए जाने वाले कार्यक्रमों की तैयारी करने लगे। वे दिन-रात कठोर परिश्रम कर कार्यक्रमों की तैयारी करते, आखिर शिक्षामंत्री को प्रभावित जो करना था। गोपाल सभी बच्चों का नेतृत्व कर रहा था। आखिर वह दिन भी आ गया। नियत समय पर शिक्षामंत्री अपने कुछ सहायकों के साथ रंगपुर पधारे। वे प्रधान शिक्षक के साथ कार्यक्रम में आकर मुख्य अतिथि के स्थान पर बैठ गए। बच्चों ने अपने सारे कार्यक्रमों में जान डाल दी और शिक्षामंत्री के साथ-साथ सहायकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया। नन्हे-से गोपाल और अन्य बच्चों को देख कर शिक्षामंत्री बहुत प्रभावित हुए।

वार्षिक समारोह के अंत में शिक्षामंत्री ने अपने हाथों से प्रतिभाशाली बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए। सबसे ज्यादा पुरस्कार गोपाल की झोली में गए। शिक्षामंत्री को यह भी पता चल गया कि उन्हें पत्र लिखने की योजना गोपाल की थी। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद शिक्षा मंत्री बोले, ‘मैं रंगपुर आकर स्वयं को बहुत खुशनसीब समझ रहा हूं। इस गांव की न सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता देखने लायक है, बल्कि यहां के प्रतिभाशाली बच्चों को देख कर उन्हें सलाम करने को जी चाहता है। मैंने रंगपुर के बच्चों के निवेदन को स्वीकार कर लिया है और कल मेरे सहायक बड़ी पाठशाला के लिए रंगपुर में योग्य स्थान देख कर आएंगे, जिस पर शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा। इतना ही नहीं, बेहद प्रतिभाशाली बच्चों को सरकार की तरफ से छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाएगी और बड़े शहरों में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों की हर संभव मदद की जाएगी।’ शिक्षामंत्री के भाषण की समाप्ति पर पूरी पाठशाला देर तक तालियों की गूंज से गड़गड़ाती रही। नन्हे बच्चों की हंसी और मस्ती से पूरा रंगपुर एक बार फिर चहक उठा।

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