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नन्ही दुनियाः कविता और शब्द भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

जाओ दादी! तुमसे ऐसे चोटी को गुंथवाए कौन?

नागेश पांडेय ‘संजय’

जाओ दादी!

जाओ दादी! तुमसे ऐसे
चोटी को गुंथवाए कौन?

बिन चश्मे के बाल खींचती,
लगता जैसे खाल खींचती।
बाल उलझते, मैं चिल्लाती;
टूटा देख उन्हें झल्लाती।

अच्छे खासे बालों का यों,
कचरा कहो कराए कौन?

साथ घूमने जब जाती हूं।
दादी, मैं तो पछताती हूं।
चलती तो चलती जाती हो,
कहां बैठ कर सुस्ताती हो।

अरे! तुम्हारे साथ घूम कर,
अपने पैर थकाए कौन?

सुबह तुम्हारी जल्दी होती,
पास तुम्हारे तभी न सोती।
भले बहुत अच्छा गाती हो,
मगर नींद तो ले जाती हो।

सपनों वाली मीठी-मीठी,
अपनी नींद भगाए कौन?

शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

आंधी / आधी

जब सामान्य से अधिक रफ्तार में हवा चलती है, जिसमें पेड़-पौधे उखड़ने लगें, चीजों को नुकसान पहुंचने लगे, तो उसे आंधी कहते हैं, जबकि आधा का स्त्रीलिंग में प्रयोग करते हैं तो आधी लिखते हैं। जैसे आधी रोटी।

वमन / वामन

जब खाने के बाद कोई चीज न पचे और फिर मुंह के रास्ते पेट से बाहर निकल आए यानी उल्टी हो जाए, तो उसे वमन कहते हैं। जबकि वामन का अर्थ बौना होता है। छोटे कद का व्यक्ति।

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