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नन्ही दुनियाः कविता और शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

प्रतीकात्मक चित्र

फहीम अहमद

नहीं बताना

बात किसी से नहीं बताना
तुमको मेरी कसम रही।

चुपके-चुपके गया घूमने
मैं माली काका के बाग
ज्यों ही लीची तोड़ी काका
गए नींद से फौरन जाग।

हुआ वहां से नौ दो ग्यारह
चप्पल छूटी आज वहीं।

रस्ते में फिर मैंने की थी
हरकत काफी ऊटपटांग।
सोती बकरी के ऊपर से
भागा था मैं मार छलांग।

ना बोलूंगा अगर किसी से
जो तुमने यह बात कही।

ढूंढ रहा है अपना डंडा
देखो, लड्डन चौकीदार।
छिपा दिया है डंडा उसका
मुझे नहीं पाएगा मार।

हमे न देता खुद ही पीता
लोटा भर-भर रोज दही।

शब्द भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

सुर / सूर

संगीत के स्वरों को सुर कहते हैं। इसके अलावा सुर का अर्थ देवता, सूर्य और ऋषि-मुनि भी होता है। जबकि सूर उस व्यक्ति को कहते हैं, जो दृष्टिहीन हो। इसके अलावा सूर को शूर यानी वीर, योद्धा के अर्थ में भी प्रयोग किया जाता है।

सरकारी / सहकारी

सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं, उसकी देखरेख में आने वाली संपत्ति आदि को सरकारी कहते हैं। जबकि जब कुछ लोग आपसी सहयोग से कोई काम करते हैं तो उसे सहकारी कहते हैं।

नटखट

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