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नन्ही दुनियाः कविता और शब्द भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं

चित्र का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है

नन्ही नन्ही बूंदें

बादल से आने वाली हैं,
नन्ही नन्ही बूंदें।
इंतजार कर लो आंगन में,
पता नहीं कब चू दें।

नभ के स्टेशन से डिब्बों,
में हो चुकीं रवाना।
भू के स्टेशन पर लगभग,
तय है इनका आना।
बस थोड़ा तो खड़े रहो,
ये अब कूदें तब कूदें।

अभी मजा है इन बूंदों का,
चल कर लुत्फ उठा लें।
नन्ही नन्ही गिरें बदन पर,
नाचें मस्त मजा लें।
फिर तो इनका तड़-तड़ गिरना,
अपनी आंखें मूंदें।

सावन भादों की बूंदें तो,
बन जातीं सैलाब।
नदिया बन जाती बूंदों से,
भर जाते तालाब।
भड़-भड़ गिरतीं बनी बेशरम,
छप्पर छानी खूंदें।

शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

प्रवर्तन / परिवर्तन

किसी कार्य को आरंभ करना, उसे चलाना, शुरू करना प्रवर्तन कहलाता है, जैसे विषय प्रवर्तन। जबकि परिवर्तन का अर्थ होता है बदलाव। जैसे उसके जीवन में परिवर्तन आ गया।

शात / शांत / सात

जिस पर शान चढ़ी हो, तेज धार वाली, चमकीली चीज को शात कहते हैं, जबकि शांत का अर्थ होता है स्थिर। जिसमें कोई गति न हो, चुप, शोर-शराबे से दूर; दुख, पीड़ा आदि से रहित को शांत कहते हैं। सात एक संख्या है- छह, सात…।

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