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नन्ही दुनियाः कविता और शब्द भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

Author Published on: July 29, 2018 7:17 AM
कविताः खेले खेल निराला

शादाब आलम

खेले खेल निराला

चलते-फिरते, सोते-जगते
रहती अपने पास?
इसके बिन ना उड़ पाएंगे
तितली, मक्खी, मच्छर
दौड़ नहीं पाएंगे, चीता
भालू, हाथी, खच्चर।
पेड़ सूख जाएंगे सारे
मुरझाएगी घास।

पल में अंदर, पल में बाहर
खेले खेल निराला
लगे फूलने तो बुन देती
बेचैनी का जाला।
रहे जगाती पल-पल हममें
यह जीने की आस।

तुम्हे बता दूं, चलना-रुकना
ही है इसका पेशा
अपनी है बस यही दुआ, यह
चलती रहे हमेशा।
रुक जाए तो बचे बदन में
केवल हड्डी-मांस।

शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

कुल / कूल

पूरा, समस्त, संपूर्ण, सब, सारा आदि का पर्याय है कुल। इसके अलावा कुल का दूसरा अर्थ खानदान, वंश, घराना, जाति या एक ही पूर्वपुरुष से उत्पन्न व्यक्तियों का समूह भी होता है। जबकि कूल का अर्थ होता है किनारा। नदी या तालाब का किनारा।

पुरा / पूरा

प्राचीन यानी पुराने को भी पुरा कहते हैं, जैसे पुराकालीन। इसके अलावा छोटे गांव को भी पुरा कहते हैं। जबकि पूरा का अर्थ होता है संपूर्ण। जो खाली न हो, भरा हुआ हो, परिपूर्ण हो उसे भी पूरा कहते हैं।

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