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नन्ही दुनियाः कहानी – दस में दस

लू लू ने थोड़ा सोचा और कहा- ‘हमारे पेट में।’ और फिर थोड़ा और सोच कर कहा- ‘अब मैं हमेशा ठीक समय पर नाखून काटूंगा।’ सुन कर मां बहुत खुश हो गई।

Author May 20, 2018 6:43 AM
लूलू बहुत खुश था। आज उसकी कक्षा में सफाई की परीक्षा थी।

दिविक रमेश
लूलू बहुत खुश था। आज उसकी कक्षा में सफाई की परीक्षा थी। उसे दस में दस अंक मिले थे। वह प्रथम आया था। अध्यापक ने तीन महीने पहले ही तो बच्चों को इस परीक्षा के बारे में कहा था। तब लू लू को कुछ खास समझ में नहीं आया था। उसने अपनी मां को बताया था। लू लू को मालूम है कि मां के पास हर समस्या का हल होता है। मगर जब उसने सफाई की परीक्षा के बारे में बताया तो मां थोड़ा निराश हो गई थी।

उसने कहा था कि लू लू तेरी जैसी आदतें हैं न, उनसे तो तू फेल हो जाएगा। सुन कर लू लू को बहुत बुरा लगा था। उसने मां से जानना चाहा। तब मां ने बताया- ‘देख लू लू, अपने दांत देख। तुझसे रोज कहती हूं कि हर खाने की बाद साफ किया कर। सोने से पहले तो जरूर। पर तू है कि टाल देता है। कभी साफ कर लिए कभी नहीं।’

मां ने प्यार से समझाया तो लू लू मना नहीं कर पाया। उसने कुछ दिनों बाद पाया कि उसके दांतों से पीलापन हटने लगा था। कुछ और दिन बाद तो वे एकदम सफेद दिखने लगे थे। लू लू को बड़ा मजा आया। उसने कहा- मैं अपने सफेद दातों को अब कभी पीला नहीं होने देना चाहता। मां बोली- ‘लू लू, जब तक हम गंदगी में पड़े रहते हैं तब तक हमें पता ही नहीं होता कि सफाई का कितना मजा होता है। लेकिन जब मजा मिल जाता है तो हम उसे नहीं छोड़ना चाहते।’ ‘हां मां, आपने बिलकुल ठीक कहा। मेरे गंदे दांत देख कर सब मुझसे ठीक से बात भी नहीं करते थे। अब तो तारीफ भी करते हैं।’ ‘यही तो लू लू। अब देख जरा, अपने नाखून देख। कितने-कितने दिनों बाद काटता है तू। इनमें गंदगी फंस जाती है और वह गंदगी कुछ भी खाते समय बता तो कहां जाती है?’

लू लू ने थोड़ा सोचा और कहा- ‘हमारे पेट में।’ और फिर थोड़ा और सोच कर कहा- ‘अब मैं हमेशा ठीक समय पर नाखून काटूंगा।’ सुन कर मां बहुत खुश हो गई।

फिर तो लू लू ने मां के बताने पर अपने जूते-मोजों को भी साफ रखना सीख लिया था। कपड़े भी ठीक ढंग से पहनना और साफ रखना सीख लिया था। स्कूल से आते ही अब वह अपनी हर चीज को ठीक जगह पर ठीक से रखता। अब वह पहले की तरह बिना नहाए, बस मुंह-हाथ धोकर स्कूल नहीं जाता। रोज अच्छे से नहाता। बाथरूम को भी साफ कर देता। कचरा कूड़ेदान में ही डालता।

यह सब सोच ही रहा था कि उसके दोस्त टी लू ने आकर उसे बधाई दी। लू लू अपनी यादों से बाहर आया। लू लू ने कहा- ‘टी लू तुझे भी बधाई। एक ही अंक तो कम है तुम्हारा। अगली बार देखना तुझे भी पूरे अंक मिलेंगे।’ ‘हां लू लू! मैं और अधिक साफ-स्वच्छ रहने की कोशिश करूंगा। तभी लू लू को मास्टर जी की एक और बात याद आई। उसने कहा- ‘टी लू, मास्टर जी ने एक और बात कहीं थी न, सुनी क्या?’ ‘कौन-सी बात? टी लू ने पूछा, तो लू लू ने बताया- ‘वही मन के स्वच्छ होने की बात। कहा था न कि तन की स्वच्छता पर तो तुमने काफी ध्यान देना सीख लिया है। अब मन की स्वच्छता पर भी ध्यान देना शुरू करो। अगली परीक्षा उसकी होगी।’ ‘अरे हां, पर वह कैसे करेंगे लू लू?’ टी लू ने कहा। ‘यह तो मुझे भी नहीं पता टी लू।’

घर पहुंचते ही लू लू ने मां को दौड़ कर पकड़ा- ‘मां! मुझे सफाई में दस में दस अंक मिले हैं।’ फिर लू लू को मास्टर जी की मन की स्वच्छता वाली बात याद आई। ‘मां! यह मन की स्वच्छता क्या होती है? अगली बार मास्टर जी इसकी परीक्षा लेंगे। उसमें भी फर्स्ट आना है। बताओ मां!’ ‘बाताऊंगी। पहले घर के कपड़े पहन, कुछ खा-पी ले।’ मां ने कहा तो लू लू चहक कर बोला- ‘और खाने के बाद अच्छे से कुल्ली कर लूं।’ मां को तो हंसी आ गई।

लू लू अपना होमवर्क पूरा कर मां के पास बैठ गया।

मां ने समझाया- ‘देख लू लू, कभी ऐसा हुआ है कि तुमने झूठ बोला हो!’ ‘नहीं, मां।’ लू लू ने कहा। ‘चलो अच्छी बात है। तुम्हारे किसी दोस्त ने झूठ बोला हो?’ मां ने पूछा। लू लू ने बताया- ‘हां मां, मेरी क्लास में एक बच्चा है, जिसने झूठ बोला था। पकड़े जाने पर उसे मास्टर जी ने गुस्सा भी किया था। एक दूसरे बच्चे ने तो चोरी भी की और झूठ भी बोल दिया। उसको भी मास्टर जी ने गुस्सा किया।’

‘बस लू लू, यह झूठ बोलना, चोरी करना, किसी का बुरा करना, जरूरत होने पर किसी की मदद न करना, बात-बात पर अपने से कमजोर को तंग करना, ऊंच-नीच के भाव रखना, धोखा देना, अपने को लड़का समझ कर लड़कियों से बदतमीजी करना आदि ये सब मन की गंदगी होती है। इन्हें साफ नहीं करेंगे तो गंदे हो जाएंगे, खराब और बुरे आदमी हो जाएंगे।’ मां ने समझाया तो लू लू को समझ आ गया। फिर पूछा- ‘पर मां, ऐसी गंदगी को साफ कैसे करेंगे?’

‘देखो लू लू, झूठ, चोरी, धोखा देने आदि का साबुन है सच बोलना, उसे स्वीकार कर लेना और आगे से वैसा न करने का प्रण लेना। कमजोर को तंग करने का साबुन होता है- उसे तंग न करना, बल्कि उसकी मदद करना। गलती हो जाने का साबुन होता है-माफी मांगना और गलती को न दोहराना।’
लू लू को बात समझ आ गई थी। बोला- ‘मां, सॉरी। मैंने भी एक बार अपने एक दोस्त से झूठ बोला था। उसने मुझसे रबड़ मांगी थी, तो मैंने कहा था कि मेरे पास नहीं है। उसने पेंसिल से कुछ गलत लिख दिया था न। उसे मिटा कर ठीक करना चाहता था। मुझे उसे तंग करने में मजा आया था। मैं कल ही उससे माफी मांगूगा, कभी ऐसा न करने की कसम खाऊंगा और अपने मन को स्वच्छ कर लूंगा।’

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