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नन्ही दुनियाः सबसे बड़ा इनाम

यह चेतन के पिता विशाल का रोज का काम था। घंटों मोबाइल में व्यस्त रहना। कोई उन्हें मोबाइल पर बात करने से रोकता, तो वे उस पर गुस्सा हो जाते। इसलिए अब उन्हें कोई मोबाइल इस्तेमाल करने के लिए नहीं टोकता था।

Author September 16, 2018 7:07 AM
विशाल का व्यवहार बहुत रूखा-सा था। इसलिए चेतन की आज तक अपने पापा से कभी खुल कर बात करने की हिम्मत ही नहीं हुई।

पवन चौहान

यह चेतन के पिता विशाल का रोज का काम था। घंटों मोबाइल में व्यस्त रहना। कोई उन्हें मोबाइल पर बात करने से रोकता, तो वे उस पर गुस्सा हो जाते। इसलिए अब उन्हें कोई मोबाइल इस्तेमाल करने के लिए नहीं टोकता था। दसवीं में पढ़ने वाला चेतन अब बड़ा हो रहा था। वह इसी बात से चिढ़ता कि पापा हमारे साथ कभी बात करने का समय भी नहीं निकालते। अगर पापा को कभी अपने स्कूल की कोई बात, अपने दोस्तों के बारे में, अपनी कोई खुशी-परेशानी या फिर कोई अन्य बात बतानी और उनकी राय लेनी हो तो कैसे लें? उनके पास तो जैसे अपने परिवार से बात करने का समय ही नहीं है। चेतन उदास होते हुए बोला, ‘मम्मी फिस की बातें तो ठीक, लेकिन यह हमेशा जो दोस्तों के साथ हर छोटी-छोटी बात पर लंबी-लंबी बातें, आखिर क्यों? हमारे साथ तो पापा कभी इतनी देर बात नहीं करते। कभी बात शुरू हो भी जाए तो मोबाइल बज उठता है और पापा उसी में मस्त हो जाते हैं। मम्मी, अपनी बात हम पापा के सामने तसल्ली से कब रख पाएंगे?’

‘अभी तुम जाओ बेटा। मैं पापा से इस बारे में फिर बात करती हूं।’ मम्मी चेतन को विश्वास दिलाती हुई बोली। चेतन एक उम्मीद लिए अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। कुछ दिन बीत गए, लेकिन पापा की आदत में जरा भी बदलाव नहीं आया था। आज जब चेतन स्कूल से घर पहुंचा तो उसने देखा, पापा आज जल्दी घर आ गए थे और हमेशा की तरह मोबाइल पर व्यस्त थे। स्कूल बैग रखते ही चेतन मम्मी से बोला, ‘मम्मी क्या आपने मोबाइल वाली बात पापा से उस दिन की थी?’ ‘हां बेटा, की थी।’ ‘लेकिन पापा की आदत में तो जरा भी बदलाव नहीं है!… कभी अपनी कोई खुशी उनसे साझा करनी हो तो कैस करें?’ चेतन निराश होकर बोला।

‘कैसी खुशी बेटा?’ ‘पापा जब फुरसत में होंगे तभी बताऊंगा।’ चेतन ने जिद-सी करते हुए कहा। ‘बेटा, उस दिन तेरे पापा मान गए थे। पर पता नहीं क्यों, ये फिर शुरू हो जाते हैं। मेरी समझ में कुछ नहीं आता। इनकी यह बेकार की आदत हमारे लिए भी परेशानी का कारण बन गई है। मेरे तो कान पक जाते हैं इनके दोस्तों के साथ इनकी बातें सुनते-सुनते।’ मां चेतन को समझाते हुए उदास मन से बोली और चेतन को अपने कमरे में जाकर स्कूल ड्रेस बदलने के लिए बोल कर पापा को चाय और चेतन को खाना परोसने के लिए किचन की तरफ मुड़ गई।

विशाल का व्यवहार बहुत रूखा-सा था। इसलिए चेतन की आज तक अपने पापा से कभी खुल कर बात करने की हिम्मत ही नहीं हुई। चेतन को अपने कमरे में पहुंचे कुछ ही समय बीता था कि उसे किचन से मां के चीखने की आवाज सुनाई दी। चेतन भागता हुआ किचन में पहुंचा तो उसने देखा कि बर्तन की सारी उबलती चाय मां के ऊपर गिर चुकी थी। मां किचन के फर्श पर ही फिसली पड़ी थी। वह दर्द से चीख रही थी। चेतन ने फटाफट ठंडे पानी का बर्तन भर कर मां के पास रख दिया और फटाफट पापा को बुलाने दूसरे कमरे की ओर भागा। वह कमरे में पहुंचा तो देखा कि पापा अब भी मोबाइल पर व्यस्त थे। वे किसी दोस्त से पिछले सप्ताह की पिकनिक की बातों में मस्त थे। उन्हें अपनी पत्नी की इतने जोर से चीखने की आवाज भी सुनाई नहीं दी थी।

चेतन ने पापा का हाथ पकड़ कर उन्हें किचन में ले जाने की कोशिश की। पर विशाल अपने मित्र के साथ बातों में इस कदर व्यस्त थे कि उसे चेतन की कोई बात जैसे सुनाई ही नहीं दे रही थी। विशाल मोबाइल पर बातें करता हुए चेतन को हाथ के इशारे से कमरे से बाहर निकलने का इशारा करता रहे। चेतन को पापा पर बहुत गुस्सा आया। वह जोर से चिल्लाया, ‘पापा! कभी इस मोबाइल को बंद भी कर दिया करो!’ चेतन के चिल्लाने की देरी थी कि विशाल ने दो तमाचे चेतन के गाल पर जड़ दिए। मित्र से बाद में बात करने को कह कर मोबाइल काट दिया और खूब गुस्से में चेतन पर चिल्लाए, ‘बदतमीज, तुझे पता नहीं, जब कोई बात कर रहा हो तो बीच में नहीं बोलते। क्यों चिल्ला रहे थे?’

चेतन रोते हुए बोला, ‘पापा, मम्मी के ऊपर गरम-गरम चाय गिर गई है। मम्मी तकलीफ में है। मैं बस यही आपको बार-बार बताने की कोशिश कर रहा था।’ यह बात सुनते ही विशाल का सारा गुस्सा एकदम से गायब हो गया। वे किचन की ओर दौड़े। मां ने अभी तक अपने आप को थोड़ा संभाल लिया था। मां विशाल से बोली, ‘तुम बस मोबाइल पर ही व्यस्त रहा करो। अगर आज चेतन यहां न होता, तो मेरी परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती। बेचारा कबसे कह रहा था- मम्मी, पापा मोबाइल से कब फ्री होंगे, उन्हें एक खुशखबरी सुनानी है।’ ‘कैसी खुशखबरी?’ उत्सुकतावश विशाल ने पूछा।

‘यह तो इसने मुझे भी नहीं बताया है। कह रहा था पापा जब साथ होंगे तब बताऊंगा।’ ‘बताओ बेटा चेतन! कौन-सी खुशखबरी है? मुझे भी तो पता चले बेटा।’ विशाल ने प्यार से कहा। पापा के इतने प्यार से बात करने पर चेतन के चेहरे पर खुशी की फुहार लौट आई थी। वह बोला, ‘आज स्कूल में सरप्राइज पेंटिंग कंपटिशन हुआ, जिसमें मेरी बनाई पेंटिंग को पूरे स्कूल में पहला स्थान मिला है और एक ट्रॉफी भी।’ ‘अरे वाह, यह तो बहुत खुशी की बात है। खूब-खूब बधाई बेटा।’ ‘थैंक यू पापा।’ चेतन के चेहरे की रौनक देखने लायक थी।

कुछ क्षण की चुप्पी के बाद पापा बोले, ‘बेटा, आज एक खुशखबरी मैं भी तुम्हें देना चाहता हूं।’ ‘कौन-सी खुशखबरी पापा!’ ‘मैं आज से मोबाइल पर फिजूल की बातें बंद करने की पूरी कोशिश करूंगा और अपने परिवार के संग ज्यादा से ज्यादा समय बिताऊंगा। आज की घटना ने मुझे मेरी गलती का अहसास करा दिया है। और चेतन बेटा, तुम पापा को माफ कर देना। तुम्हें मैंने बिना बात के ही मारा।’ पापा की बात सुनकर चेतन और मां की खुशी का ठिकाना न था। वह खुशी से चिल्लाया, ‘थैंक यू पापा। आपने यह हमें सबसे बड़ा इनाम दे दिया है।’

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