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नन्ही दुनिया- अगर मुझे गुस्सा मिल जाता

शादाब आलम की कविता
Author October 8, 2017 06:05 am
प्रतीकात्मक तस्वीर।

अगर मुझे गुस्सा मिल जाता

अगर मुझे गुस्सा मिल जाता

तो मैं लड््डू उसे खिलाता।
और ढेर-सी बरफ डाल कर
दो जग पानी उसे पिलाता।

फिर इक बढ़िया गीत सुनाता
हंस-हंस कर उससे बतियाता।
सच मानो तब वह भी मेरे-
साथ ठहाके खूब लगाता।
आ जा रे!

खुली हुई है खिड़की मेरी
तितली! जल्दी से आ जा रे!
देखो मेरे गुलदस्ते में
फूल खिले हैं प्यारे-प्यारे।

तितली बोली, फूल हमेशा
फुलवारी में ही खिलते हैं
ऐसे नकली फूल सुनो जी
बस गुलदस्ते में मिलते हैं।

कुछ शब्द बोलने में एक जैसे जान पड़ते हैं, इसलिए उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ समझते हुए उनका अंतर समझते हैं।
किसी से प्रेम निवेदन करने को प्रणय कहते हैं जबकि
प्रणव ओंकार मंत्र को कहते हैं।
समय को नापने की इकाई को प्रहर कहते हैं। इसी को पहर भी कहा जाता है। इसी से दोपहर शब्द बना है।
जबकि
प्रहार का अर्थ है किसी पर हमला करना।

 

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