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नन्ही दुनियाः कविता और शब्द भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

Author Published on: September 2, 2018 7:17 AM
प्रतीकात्मक चित्र

फहीम अहमद

बोल रेडियो

बोल रेडियो सच कितने हैं
तेरे इस घर में मेहमान।

डिब्बे जैसे छोटे घर में
इतने लोग घुसे कैसे।
कितने छोटे छोटे हैं सब
क्या बिल्कुल चींटी जैसे?
दरवाजा ही नहीं अभी मैं
खोल जिसे सब लेता जान।

समाचार पढ़ भागा कोई
ढोल बजा फिर ढम ढम।
खेल रहे नौटंकी सब मिल
छिड़ी गीत की सरगम।
लगा मचाने हल्ला कोई
और किसी ने छेड़ी तान।

कितना बड़ा अजूबा है तू
लगता है जैसे सपना।
तेरे घर में देश देश के
लोग बनाए घर अपना।
जोड़ समूची दुनिया तूने
अलग बनाई है पहचान।

शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

ज्वर / ज्वार

जब शरीर का तापमान बढ़ जाता है, बुखार हो जाता है, तो उसे ज्वर कहते हैं। जबकि ज्वार का एक अर्थ समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों को कहते हैं। इसके अलावा ज्वार एक प्रकार का अनाज भी होता है, जिसके आटे की रोटियां बनती हैं।

टीपन / टिफन

बच्चों के जन्म के बाद उसके समय, नक्षत्रों आदि की गणना करते हुए जो पत्री बनाई जाती है, उसे टीपन या टीप्पन कहते हैं। जबकि टिफन यानी वह डिब्बा जिसमें बच्चे और बड़े दोपहर का भोजन लेकर स्कूल या दफ्तर जाते हैं।

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