ताज़ा खबर
 

शख्सियतः सरदार वल्लभ भाई पटेल

देश को आजादी दिलाने में सरदार वल्लभ भाई पटेल की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी।

Author Published on: October 28, 2018 6:11 AM
सरदार वल्लभ भाई पटेल

देश को आजादी दिलाने में सरदार वल्लभ भाई पटेल की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। देश के लिए पूरी निष्ठा से समर्पित पटेल को देश का पहला गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री बनाया गया था। गुजरात में जन्मे पटेल ने बाईस साल की उम्र में दसवीं की परीक्षा दी। उसके बाद लंदन से वकालत पूरी की। लंदन से वापस आकर अमदाबाद में वकालत करने लगे। उन्होंने झावेर बा से विवाह किया।

कमाई का जरिया वकालत

सरदार वल्लभ भाई पटेल अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और अच्छा जीवन देना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। उन्होंने अपनी पत्नी को अपने माता-पिता के घर छोड़ दिया था। फिर जब उनकी तबियत खराब हुई, तो उन्होंने पत्नी को अपने पास बुला लिया था। पटेल ने गोधरा, बोरसाद और आणंद की अदालतों में वकालत की। पटेल एडवर्ड मेमोरियल हाई स्कूल के संस्थापक थे। इसे आज झावेर भाई दाजीभाई पटेल हाई स्कूल के नाम से जाना जाता है।

स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका

पटेल ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने स्थानीय स्तर पर सामाजिक सेवा और स्त्री सशक्तीकरण का काम किया। बाद में वे गांधी के साथ जुड़ गए। 1917 में गांधी ने खेड़ा में आंदोलन चलाया, जिसमें पटेल ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। खेड़ा में उन दिनों सूखा पड़ने से किसानों को परेशानी हो रही थी, जिस पर किसानों ने अंग्रेज सरकार से कर में कमी करने की मांग की, लेकिन उन्होंने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। किसानों की इस समस्या पर पटेल और गांधी ने आवाज उठाई।

सरदार की उपाधि

1928 में गुजरात में एक किसान आंदोलन हुआ। इस आंदोलन का नेतृत्व पटेल ने किया। गुजरात में प्रांतीय सरकार ने किसानों के लगान में तीस फीसद की वृद्धि कर दी थी। सरदार पटेल ने इस वृद्धि का विरोध किया। विरोध के बाद सरकार ने लगान 6.03 फीसद कर दिया। इस सत्याग्रह में मिली सफलता के कारण वहां की महिलाओं ने वल्लभ भाई पटेल को सरदार की उपाधि दी।

देसी रियासतों का विलय

आजादी से पहले देश में पांच सौ पैंसठ रियासतें थीं, जिन्हें भारत में मिलाने का काम पटेल ने किया। रियासतों के विलय के दौरान जूनागढ़, जम्मू एवं कश्मीर और हैदराबाद के राजा शामिल नहीं होना चाहते थे। तब इन रजवाड़ों के राजाओं को मनाने का काम सरदार पटेल ने किया। जूनागढ़ के नवाब का विरोध होने पर वह पाकिस्तान भाग गया था और जूनागढ़ को भारत में विलय कर लिया गया। इसी तरह जब हैदराबाद के निजाम ने विरोध किया, तो उसे सेना के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा। कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय समस्या मान कर भारत के पास रखा गया। उनके इस प्रयास के चलते उन्हें लौह पुरुष की उपाधि दी गई।

लेखन कार्य

किसान परिवार में जन्मे पटेल को बचपन से ही पढ़ने-लिखने का शौक था। उन्होंने अपने जीवन में बहुत से लेख, टिप्पणियां और भाषण दिए। उस पूरे साहित्य को कई लोगों ने संकलित किया है। 1945 से 1950 के बीच पटेल के पत्रों का संपादन दुर्गा दास ने किया। इनका प्रकाशन नवजीवन प्रकाशन मंदिर से दस खंडों में हुआ। इन संकलनों में पटेल के अलावा कई महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों के पत्रों को भी शामिल किया गया है। उन्हें मरणोपरांत 1991 में भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।

निधन

हृदय गति रुक जाने के कारण 15 दिसंबर, 1950 को सरदार पटेल का निधन हो गया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 शख्सियतः मंटो ने जब बीस रुपए में बेची कहानी
2 प्रसंगवशः हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता
3 कहानीः अंतिम झूठ
जस्‍ट नाउ
X