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रविवारी सेहत: कोविड-19 से जुड़े मिथ और सच

देश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच इस महामारी को लेकर कई तरह के मिथ प्रचारित हो रहे हैं। कोई कहता है कि लहसुन खाने से कोरोना नहीं होता तो किसी का दावा है कि चाय व गर्म पानी पीने से आप इस रोग से अपना बचाव कर सकते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

आज पूरी दुनिया कोरोना विषाणु की गिरफ्त में है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। देश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच इस महामारी को लेकर कई तरह के मिथ प्रचारित हो रहे हैं। कोई कहता है कि लहसुन खाने से कोरोना नहीं होता तो किसी का दावा है कि चाय व गर्म पानी पीने से आप इस रोग से अपना बचाव कर सकते हैं। ऐसे दावों से काफी भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। क्या है इन मिथों की सच्चाई, आइए जानते हैं-

मिथ : लहसुन खाने से कोरोना विषाणु के असर को खत्म किया जा सकता है।
सच : ऐसा दावे के साथ नहीं कहा सकता। वैसे लहसुन शरीर का प्रतिरोधात्मक क्षमता सुधारने में सहायक जरूर है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने भी लहसुन को एक अच्छा और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ माना है, जिसमें कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता है। लेकिन कोई वैज्ञानिक शोध इस बात को प्रमाणित नहीं करता है कि लहसुन खाने से कोरोना विषाणु का असर खत्म किया जा सकता है।
अलबत्ता लहसुन से खाने का स्वाद जरूर बढ़ाया जा सकता है। वैसे गर्मियों में इसका सेवन कम करना चाहिए, अन्यथा पसीने से बदबू आने लगती है।

मिथ : हर 15 मिनट में पानी पीने से मुंह में जाने वाले किसी भी विषाणु को खत्म (फ्लश) किया जा सकता है।
सच : हवा से फैलने वाले विषाणु हमारी सांसों और मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं। पर लगातार पानी पीने से इन विषाणुओं को शरीर में घुसने से नहीं रोका जा सकता है। साथ ही अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिसके आधार पर यह कहा जाए कि पानी पीने से विषाणु को शरीर से निकाला जा सकता है या रोका जा सकता है। वैसे पर्याप्त मात्रा में पानी पीना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।

मिथ :: चाय पीने से कोरोना से बचा जा सकता है।
सच : सोशल मीडिया पर इस तरह के दावे किए जा रहे हैं कि चाय कोरोना विषाणु से लड़ सकता है। इन दावों में चीन के डॉक्टर ली वेन्लियांग का हवाला दिया गया है। इस दावे में यह कहा गया है कि डॉ वेन्लियांग ने अपनी केस फाइल में लिखा है कि चाय में पाया जाने वाला तत्व मिथाइलजेंथाइन कोरोना विषाणु के असर को कम करता है। इस कारण चीन के अस्पतालों में कोविड-19 से जूझ रहे मरीजों को दिन में तीन बार चाय दिया गया। यह सही है कि चाय में मिथाइलजेंथाइंस नामक तत्व होता लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं है कि यह तत्व कोरोना विषाणु से लड़ने में प्रभावशाली है। साथ ही ये बातें भी निराधार हैं कि चीन के अस्पताल में कोविड-19 के मरीजों को इलाज के लिए चाय पिलाया गया।

मिथ : गोमूत्र और गोबर से नहीं होगा कोरोना।
सच : इंडियन वायरोलॉजिकल सोसाइटी के डॉ शैलेंद्र सक्सेना का कहना है कि ऐेसा कोई सबूत नहीं है, जिससे पता चलता हो कि गोमूत्र में एंटी-वायरल गुण होते हैं। हालांकि गाय के गोबर का प्रभाव विपरीत पड़ने की संभावना ज्यादा है, क्योंकि हो सकता है कि इसमें कोरोना विषाणु हो, जो इंसानों में भी आ सकता है।

मिथ : मांस और पॉल्ट्री उत्पाद सुरक्षित नहीं हैं।
सच : कोविड-19 मनुष्य द्वारा संक्रमित विषाणु है, जो खांसी और नजदीकी संपर्क के जरिए एक मनुष्य से दूसरे में फैलता है। इसलिए मांस या अंडा खाना छोड़ना आपको इस विषाणु से नहीं बचा सकता है। हाल ही में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक बाघ कोरोना विषाणु से संक्रिमत पाया गया है।

मिथ : तापमान बढ़ने से कोरोना संकट खत्म हो जाएगा।
सच : कोरोना संक्रमण के कई मामले ार्म जलवायु वाले देशों में भी पाए गए हैं। ऐसे में यह कहना ठीक नहीं होगा कि तापमान बढ़ने के साथ ही कोरोना विषाणु लुप्त हो जाएंगे।

मिथ : अदरक, शहद, नींबू और लौंग के सेवन से कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है?
सच : यह सही नहीं है। कई लोग ऐसे नुस्खे बता रहे हैं लेकिन अब तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

मिथ : कोविड-19 हवा से फैलने वाला संक्रमण है
सच : यह हवा से फैलने वाला संक्रमण नहीं है। यह छींक या खांसी के दौरान फैलने वाली महीन बूंदों से फैलता है। कोरोना विषाणु हवा में एक मीटर तक जा सकता है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में होने पर ही इस महामारी के होने की संभावना है। इसके विषाणु सतह पर कुछ घंटे तक जीवित रह सकते हैं। ल्ल

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