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दुर्घटनाओं की वजह

वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना या गाने सुनना या वीडियो देखना या वाट्सएप संदेश को देखना फैशन बनने के साथ ही जानलेवा होता जा रहा है। सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण अब मोबाइल बनता जा रहा है।
यातायात नियमों के अनुसार वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना कानून की अवहेलना की श्रेणी में आता है। पर नियमों का पालन करने में बहुत सारे लोग अपनी तौहीन समझते हैं।

कभी-कभी कुछ सुविधाएं किस तरह से जानलेवा बन जाती हैं, इसका जीता जागता उदाहरण मोबाइल है। केवल बात करने या वीडियोे गेम खेलकर समय काटने वाले मोबाइल में जब से नए-नए एप्स आए हैं, खासतौर से एंड्रायड फोन की बहुउद्देश्यीय गतिविधियां सुविधा के साथ दुर्घटना का कारण बनती जा रही है। वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना या गाने सुनना या वीडियो देखना या वाट्सएप संदेश को देखना फैशन बनने के साथ ही जानलेवा होता जा रहा है। सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण अब मोबाइल बनता जा रहा है।

वाहन चलाते समय मोबाइल के उपयोग नहीं करने के लिए यातायात पुलिस द्वारा सलाह दी जाती है, पर नतीजे नकारात्मक ही देखने को मिलते हैं। मजे की बात है कि पैदल चलते युवाओं द्वारा ईअरफोन लगाकार मस्ती में चलने से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। वाहन चलाते समय मोबाइल उपयोग के कारण बढ़ती दुर्घटनाओं से चिंतित राजस्थान की सरकार ने तो अब मोबाइल जब्त करने जैसा कड़ा कदम उठाने का निर्णय किया है। हालांकि, कदम ज्यादा सख्त नहीं है, पर इससे समझ और सजगता तो आएगी ही। ऐसा माना जा सकता है।

मोबाइल हमारी सुविधा का साधन होने के साथ ही अब मौत का कारण भी बनता जा रहा है। मोबाइल में एप्स के माध्यम से अनेक सुविधाओं का विस्तार हुआ है। गाने, वीडियो और एमएमएस देखना आम होता जा रहा है। ईअर फोन कान में लगाकर गानों की मस्ती या बातों में इस कदर मशगूल हो जाना कि राह में कोई वाहन भी चल रहा है क्या? इसका भी पता नहीं रहता है।

मोबाइल हमारी सुविधा का बड़ा साधन है। आज हम मोबाइल से कहीं भी कभी भी किसी से भी बात कर सकते हैं। दूसरे की बात सुन सकते हैं। मोबाइल आज केवल बात करने का माध्यम भी नहीं रहा बल्कि यह कहा जाए तो अधिक ठीक होगा कि यह आज चलता फिरता ज्ञान और मनोरंजन का साधन बनता जा रहा है। एंड्रायड और स्मार्टफोन आज आम आदमी की जद में आ गए हैं। तीन-चार हजार रुपए में स्मार्टफोन मिलने लगे हैं। वाट्सअप आदि एप्स के माध्यम से इनमें सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। गाने, पिक्चर, वीडियो, एफएम आदि इनमें आसानी से देखे जा सकते हंै।

दरअसल, लोग यातायात के सामान्य नियमों का पालन भी नहीं करते हैं। यही कारण है कि लाख प्रयासों के बावजूद यातायात पुलिस इन पर अंकुश नहीं लगा पाती है। यातायात नियमों के अनुसार वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना कानून की अवहेलना की श्रेणी में आता है। पर नियमों का पालन करने में बहुत सारे लोग अपनी तौहीन समझते हैं। एक हाथ से कार चलाते हुए दूसरे हाथ से कान पर मोबाइल लगाए हुए बातों में मशगूल होते हुए देश में किसी भी स्थान पर किसी भी चैराहे चालकों को आसानी से देखा जा सकता है। लोग बातों में इस कदर मशगूल हो जाते हैं कि आगे पीछे कौन आ रहा है, यातायात सिग्नल क्या आ रहा है, इसका भी ध्यान नहीं रहता और दुर्घटना का एक बड़ा कारण यह भी बनता जा रहा है। इस तरह से हम अपनी जान ही जोखिम में नहीं डाल रहे हैं, बल्कि दूसरे निर्दोष व्यक्ति की जान का खतरा भी बनते जा रहे हैं। डर नहीं होने के कारण यह सब हो रहा है।

ईअरफोन में मशगूल लोगों को ट्रैक पार करते समय यह भी ध्यान में नहीं रहता कि आगे-पीछे कोई वाहन आ-जा रहा है या नहीं। अगर बात करना जरूरी ही हो तो साइड में वाहन खड़ा करके बात की जा सकती है। यह समझने की जरूरत है। आए दिन ईअरफोन के कारण दुर्घटनाओं के समाचार पढ़ने के बाद भी सबक नहीं लेना ठीक नहीं।

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