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जानकारी : जंगल का राजा

एक वयस्क सिंह का वजन 200 से 250 किलोग्राम तक हो सकता है। चीता अपनी चाल और गति के लिए प्रसिद्ध है। शेर को देखने की शक्ति दिन की बजाय रात में अधिक होती है।

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सफेद शेर (फाइल फोटो)

यशवंत कोठारी

शेर का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जंगल का यह राजा और इसके अन्य परिवारीय सदस्य जैसे चीता, तेंदुआ, सिंह, बाघ सभी खूंखार और विशाल जानवर है । जीव वैज्ञानिकों ने इसे क्लास मेमेलिया के बिल्ली परिवार के तहत वर्गीकृत किया है। सिंह को पैंथरो लियो, शेर को पैंथरो टाइगर, बाघ को पैंथरो टाइग्रेस, तेंदुआ को पेंथरा पार्डज्स कहा जाता है। सभी पैंथर वंश के ही वंशज हैं। भारत में शेर आदिकाल से ही पाए जाते हैं। भारतीय संस्कृति और प्राचीन साहित्य में सिंह या शेर का व्यापक चित्रण हुआ है। शेर को बलवान, पराक्रमी, शक्तिशाली, गौरवपूर्ण ओजस्वी जानवर माना गया है । संस्कृत में एक श्लोक के अनुसार शेर जंगल का अघोषित राजा है। हाथी के अलावा किसी ने भी आज तक शेर की बादशाहत को चुनौती नहीं दी है। देवी दुर्गा का वाहन है शेर, भगवान शंकर हमेशा बाघंबर धारण करते हैं।

एक वयस्क सिंह का वजन 200 से 250 किलोग्राम तक हो सकता है। चीता अपनी चाल और गति के लिए प्रसिद्ध है। शेर को देखने की शक्ति दिन की बजाय रात में अधिक होती है। रात होते ही शेर परिवार अपने शिकार को निकल पड़ता है। सभी शेर स्वभाव से हिंसक होते हैं। ये मौका मिलते ही शिकार पर टूट पड़ते हैं। काफी दूर तक शिकार का पीछा कर सकते हैं। थकाकर शिकार को मार डालते हैं। सिंह परिवार के सभी सदस्यों में अदभुत साहस, फुर्ती, शक्ति होती है।

सिंहनी बारह में एक बार बच्चा देती है। सिंह शावक दो या तीन होते हैं। शेर भारत में और अफ्रीका में पाए जाते हैं। भारतीय शेरों के अयाल अफ्रीकी शेरों की तुलना में कम घने और छोटे होते हैं। सिंह की लंबाई तीन से चार और ऊंचाई एक मीटर से डेढ़ मीटर तक होती है। इनके पंजे 25 सेंटीमीटर से 30 सेंटीमीटर तक चौड़े होते हैं। पंजे गद्देदार होते हैं। इनके नख चार सेंटीमीटर से छह सेंटीमीटर तक तक लंबे होते हैं। सामान्य स्थिति में शेर एक बार में बीस किलो मांस खा सकता है। शाम को शिकार करके शेर रात को आराम करता है, पेट भरा होने पर वे आराम से पड़े रहना पसंद करते हैं। पूरे दिन शेर अपनी शेरनी या बच्चों के साथ आराम करते हैं।

चलते समय शेर के पंजों के निशान जंगल में उनकी उपस्थिति को जांचने में काम में लिए जाते हैं। पंजों के निशानों से सिंहों की संख्या को भी गिनने में मदद मिलती है । शिकारी लोग सिंह के पंजे को देखकर शेर के बारे में अनुमान लगाते हैं। शेरों की तरह ही बाघ भी पैंथर जाति का सदस्य है। ये ज्यादा तेज तर्रार और चालाक होते हैं। इनका शरीर गठा मगर नीचे की और सरकता हुआ होता है। हाथियों से बाघोें की मुठभेड़ अक्सर होती रहती है ।

शेर जाति के प्राणी पानी में तैर सकते हैं। ये बाढ़ से बच सकते हैं। बंदर, चीतल, हिरण, भेड़, बकरियां आदि शेरों के प्रिय भोजन हैं। अगर कभी यह जानवर मनुष्य का मांस खा लेता हो तो वह आदमखोर हो जाता है। फिर आदमखोर शेरों को मारने के अलावा अन्य कोई रास्ता नहीं बचता है। प्राचीन काल में हमारे यहां पर शेरों की संख्या बहुत ज्यादा थी। मुगल काल और ब्रिटिश शासन काल में निरंतर शिकार के कारण शेरों की संख्या बहुत कम हो गई। सफेद शेर तो बहुत दुर्लभ हैं ।

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