सजने के साजो-सामान: स्कार्फ, जूते-चप्पल और घड़ी से लेकर ज्वेलरी तक

अच्छे कपड़े पहनना, सज-संवर कर निकलना किसे नहीं अच्छा लगता। सलीके से कपड़े पहने और चीजों की साज-संभाल रखने वाले लोग दूसरों को भी भाते हैं। पर बहुत सारे लोगों को यही नहीं पता होता कि क्या चीज कैसे पहनें। महंगे कपड़े तो खरीद लेते हैं, पर उन्हें संभालना, उनके साथ सजावट की दूसरी चीजों को शामिल करना नहीं जानते। जब तक कपड़ों के साथ-साथ सजने के साजो-सामान का ठीक से बर्ताव न हो, व्यक्तित्व में निखार नहीं आता। इसी बारे में बता रही हैं अनीता सहरावत।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

दुल्हन का पूरा शृंगार सिर्फ एक बिंदी के बिना अधूरा है। मामूली-सी बिंदी के इतने मायने हैं कि पूरे मेकअप और पहनावे में इसका खालीपन कोई भी आभूषण नहीं भर सकता। यही भूमिका है हमारे पहनावे में सजने-संवरने के साजो-सामान यानी एक्सेसरीज का। पहनावे की परिभाषा सिर्फ कपड़ों से पूरी नहीं होती। हम आमतौर पर कपड़ों पर सबसे ज्यादा खर्च करते हैं। कई बार अच्छा दिखने के लिए ब्रांडेड और मंहगे कपड़े भी खरीदने से नहीं हिचकते। पर क्या यह स्टाइलिश और आर्कषक लुक देने की गांरटी है? खास मौकों पर ही नहीं, रोजाना के जीवन में काफी लोग आपसे ऐसे टकराते होंगे जो हजारों रुपए के कपड़े पहनने के बावजूद औसत ही नजर आते हैं, वहीं कुछ लोग साधारण पहनावे में भी स्टाइलिश दिखते हैं। यह फर्क उनकी एक्सेसरीज के चुनाव का है।

कपड़ों के साथ सजने-संवरने के साजो-सामान का चलन नया नहीं है। इतिहास गवाह है कि हर संस्कृति में कपड़ों का सजावटी सामान यानी एक्सेसरीज से पुराना रिश्ता है। हार, अंगुठियां, कंगन, पगड़ी, इत्र वगैरह जनाना-मर्दाना दोनों को ही लुभाता रहा है। मूल विचार आज भी आर्कषक दिखना है, हांलाकि ये सब सामग्री समय के साथ अपग्रेड और अपडेट होती रही हैं। आइए जानते हैं कि एक्सेसरीज में कौन से नए ट्रेंड युवाओं में लोकप्रिय हैं।

बैग, हैंडबैगस और पर्स
स्कूल-कॉलेज जाने वाले युवा हों या फिर दफ्तर जाने वाले युवक-युवतियां, आप चाहे काम से बाहर निकलें या फिर सिर्फ घुम्मकड़ी करने, बैग हर किसी का संगी होता है, यह एक ऐसा सामान है, जिसके बिना आप अधूरा और खाली महसूस करते हैं। जरूरी सामान साथ रखने की सहूलियत के लिहाज से ही नहीं, आजकल यह स्टाइल की भी परिभाषा है। लड़के आमतौर पर इसे सिर्फ जरूरत पर ही इस्तेमाल करते हैं, कई जगह उनका काम सिर्फ पॉकेट पर्स से भी चल जाता है, लेकिन लड़कियों के लिए यह एक जरूरी चीज है, जिसके बिना वह बाहर नहीं निकल सकती। बैग, हंैडबैग या पर्स में आप जो भी विकल्प चुनें वह केवल आपकी ड्रेस से ही मैचिंग न हो, बल्कि मौके और जगह को भी ध्यान में रख कर मिलान और चुनाव करें। बैग न केवल आपकी पसंद के बारे मे बोलता है, बल्कि आपके व्यक्तित्व को भी व्यक्त करता है।

चश्मे यानी गॉगल्स
कभी आंखों की कमजोरी और खूबसूरती को खराब करने का सबब माना जाने वाला ऐनक आज फैशन की नई पसंद है। एक से बढ़ कर एक डिजाइन की ढेरों वेरायटी और बजट में सिमटती रेंज की बदौलत ये वार्डरोब में अब एक ऐक्सेसरी है, जिससे बिना स्टाईल अधूरा है। ड्रेसेज के कलर कांबिनेशन से मैच करने के अलावा आप अलग-अलग डिजाइन और पैटर्न से नया लुक आजमा सकते है। धूप और धूल से आंखों को बचाने के अलावा ये सामान्य-सी ऐक्सेसरी आपकी पर्सनेलिटी का कायाकल्प करने के लिए काफी है। हां, चश्मे का चुनाव अपने चेहरे के आकार के अनुसार ही करें। आजकल ज्यादा चमक-दमक वाले चश्मों की बजाय सिंपल ग्लॉसेज चलन में हैं।

जूते-चप्पल
सुंदरता की जब हम बात करते हैं तो उसमें नख-शिख का जिक्र जरूर आता है, यानी किसी के भी व्यक्त्वि को आंकने से पहले हम उसे सिर से पांव तक आंकते हैं। इसलिए कपड़े चुनते समय हम फुटवियर की मैचिंग सबस पहले बनाते हैं। यह एक ऐसा सामान है, जिसके बिना आप घर से बाहर पैर निकाल ही नहीं सकते। कपड़ों के स्टाईल और डिजाइन से फुटवियर की मैचिंग जितनी जरूरी है, उतना ही अहम है उसका आरामदायक होना, जिसे कई बार हम दरकिनार कर देते हैं। इस ऐक्सेसरी को चुनते समय आराम को सबसे पहले तवज्जो दें, क्योंकि आपकी चाल ही आपके व्यक्तित्व को बनाती और बिगाड़ती है।

स्कार्फ, मफलर, टोपी और टाई
ठंड की दस्तक हो गई है, तो इसमें गरमाहट देने के अलावा स्कार्फ, गरम टोपियां और हैट आपके व्यक्तित्व में भी कुछ नया जोड़ेंगे। ये सामान लड़के-लड़कियां दोनों ही अपने हिसाब से इस्तेमाल करते हैं। खास बात यह है कि रंगों की वेरायटी के अलावा इनके अलग-अलग डिजाइन और पैटर्न को कई तरह से पहना भी जा सकता है। लड़कियां, महिलाएं स्कार्फ को गले में लपेटने के अलावा सिर पर ड्रेप कर सकती हैं, वहीं लड़के स्कार्फ और मफलर को गले में ढीली गांठ लगा कर या सिर्फ लपेट कर भी अपने स्टाईल में इजाफा कर सकते हैं।
इनके अलावा टाई देखने में भले मामूली और आकार में छोटी हो, पर व्यक्तित्व को बयां करने में इसके अपने मायने हैं। आमतौर पर यह आॅफिशियल पहनावा है, लेकिन आजकल बो स्टाईल शर्टस, टी-शर्टस के अलावा लांग और शॉर्ट टाई कैजुअल वियर मे भी धाक जमा रही है।

कमरबंद यानी बेल्ट
एक्सेसरीज की गुल्लक अलग-थलग पड़े छिटके सामान से भरती है, जिसमें से अकेली किसी भी चीज का अपना कोई वजूद नहीं, लेकिन उसका दूसरी चीजों से सही मिलान और मिलाप होने से उसकी न केवल उपयोगिता बढ़ जाती है, बल्कि उसका पूरा रूप भी निखर कर आता है। बेल्ट भी एक ऐसी ही चीज है, जिसके बिना आपका पूरा ड्रेस-अप अधूरा है। इसकी मैचिंग और सही बेल्ट चुनने पर आमतौर पर हम कम ही ध्यान देते है। कपड़ों के कलर कांबिनेशन और आउटफिट से मैचिंग के अलावा अपने शरीर और लंबाई के हिसाब से ही बेल्ट का चुनाव करें। लंबे लोगों को पतली और मीडियम बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए, वहीं अगर आपकी कमर चैड़ी है तो कपड़ों के रंग से मेल खाती बेल्ट आप पर जंचेगी।

घड़ी और बे्रसलेट
घड़ी कभी आउटडेटेड नहीं होती, इसे पहनने के लिए आपको जगह और मौके का ध्यान रखने की जरूरत नहीं। यह एक सदाबहार फैशन है। थोड़ा-सा ध्यान यह रखें कि वह आपके कपड़ों के साथ जंच रही हो और आपके व्यक्तित्व को संपूर्ण निखार दे रही हो। साथ ही कलाई से ज्यादा चौड़ी और बड़ी घड़ी न पहनें। कैजुअल लुक के लिए ब्रेसलेट भी एक अच्छा विकल्प है। इन्हें आप अपनी पसंद के हिसाब से पहन सकते हैं।

आभूषण
आभूषण के मामले में लड़कियों और महिलाओं का पलड़ा पुरुषों के मुकाबले भारी है। महिलाएं किसी भी आउटफिट के साथ पांरपरिक या मॉडर्न, हल्की या भारी ज्वैलरी पहन सकती हैं। जबकि पुरुषों के पास अंगूठी, ब्रेसलेट या चेन के अलावा कोई ज्यादा विकल्प नहीं हैं, और इनका भी इस्तेमाल वे हर जगह नहीं कर सकते। लेकिन महिलाओं की मुश्किलें भी कम न आंके। मौके, ड्रेस और मेकअप के साथ सही ज्वैलरी चुनना और उसका कांबिनेशन बनाना भी काफी मशक्कत का काम है।
पर्सनेलिटी को बनाने और बिगाड़ देने का पूरा दारोमदार सही ज्वैलरी के चुनाव पर टिका है।
कुल मिलाकर आपके वार्डरोब के कोने में पड़े बेल्ट, चश्मा, स्कार्फ, घड़ी टोपी, अकेले बेकार हैं, पर आपकी आउटफिट के साथ मिल कर यह उसे नया लुक दे सकते हैं। तो दराज खोलिए और इन्हें काम पर लगाइए।

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