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दिवाली में साफ-सफाई

दिवाली आ रही है। इस त्योहार में घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। माना जाता है कि इस त्योहार में पवित्रता न रखी जाए तो सुख-समृद्धि नहीं आती। इसलिए लोग महीने भर पहले से घर-दुकान आदि की सफाई में लग जाते हैं। कुछ लोग पूरे घर की रंगाई-पुताई कराते हैं, तो कुछ सिर्फ धुलाई-सफाई करते हैं। दिवाली पर घर-दुकान आदि की सफाई क्यों जरूरी है और इसके लिए क्या करें, पेश हैं रवि डे के सुझाव।

Author Published on: October 28, 2018 6:46 AM
प्रतीकात्मक चित्र

रवि डे

दिवाली लक्ष्मी पूजा का त्योहार है। माना जाता है कि अगर इस त्योहार में मकान-दुकान वगैरह की ठीक से सफाई न हो, तो घर में सुख-समृद्धि नहीं आती। यानी लक्ष्मी नहीं आतीं। इसलिए बहुत सारे लोग पूरे घर की लिपाई-पुताई कराते हैं। गांवों में जिन लोगों के कच्चे घर हैं, वे पूरे घर पर मिट्टी-चूने का लेप चढ़ाते हैं। जिनके घर पक्के हैं, वे अपनी सामर्थ्य के मुताबिक चूना या रंग कराते या फिर उसकी धुलाई सफाई करते हैं। घर की रंगाई कराना चूंकि खर्चीला काम है, इसलिए बहुत सारे लोग हर साल इस पर खर्च नहीं करते, खुद ही सफाई कर लेते हैं।

क्यों जरूरी है सफाई

हमारे पूर्वजों ने रोजमर्रा या फिर सामुदायिक कामों को किसी न किसी धारणा से जोड़ दिया था। उसी में दिवाली के समय मकान-दुकान आदि की सफाई भी है। इस सफाई को तर्क के आधार पर कसें, तो जरूरी नहीं जान पड़ती, पर इसके पीछे एक वैज्ञानिक आधार जरूर देखा जा सकता है। दिवाली बरसात के ठीक बाद आने वाला त्योहार है। बरसात के समय पानी बरसते रहने और वातावरण में लगातार नमी बनी रहने के कारण घरों के भीतर गंदगी जमा होती रहती है। दीवारों, छतों पर सीलन हो जाती है। इस सीलन में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं। इसी तरह रसोई, गुसलखाने आदि में बैक्टीरिया पनपते हैं। इन बैक्टीरिया की वजह से कई तरह के रोग पैदा होते हैं, जैसे सीलन में यक्षमा यानी टीबी पैदा करने वाला बैक्टीरिया पलता है। इसी तरह घर के आसपास जमा कचरे और उग आई घासों में तरह-तरह के कीट पलते रहते हैं। दिवाली के बाद सर्दी का मौसम शुरू हो जाता है। बरसाती घास सूखनी शुरू हो जाती है। इसलिए बरसात के बाद घर और आसपास की जगहों की सफाई के लिए यह बहुत अनुकूल वक्त होता है।

कैसे करें सफाई

एक दिन में पूरे घर की सफाई थकाऊ काम होता है, इसलिए थोड़ा-थोड़ा करके रोज सफाई करें, तो यह काम आसान हो जाएगा। इसके लिए सबसे पहले बाहरी हिस्से और ऊपर की तरफ से सफाई करना शुरू करना चाहिए। फिर सजावटी वस्तुओं, आलमारी, किचन, बिस्तर-सोफे और फिर सबसे आखिर में फर्श। अगर आपका घर भूतल पर है, तो सबसे पहले बाहर की घास काटें, कचरा आदि हटाएं।

छत, पंखे, एसी, कूलर

फर्श की सफाई तो रोज होती है, पर छत की कभी नहीं होती, जिसकी वजह से उस पर गर्द जमती जाती है। खासकर बरसात की नमी में गर्द कुछ ज्यादा जमती है। छत के कोनों में मकड़ियां आदि जाले बना लेती हैं। इसलिए छत की सफाई पहले करें। इसके लिए लंबे डंडे के वाइपर में कपड़ा लपेट कर सफाई करें। फिर पंखों की पत्तियों को साफ करें। सबसे अधिक धूल-मिट्टी-कालिख उन्हीं पर जमा होती है। इसलिए बेहतर हो कि पंखों की पत्तियों को खोल कर गुनगुने पानी में सर्फ डाल कर इनकी सफाई करें। कई लोग टंगे हुए पंखे पर ही पत्तियों को साफ करते हैं। इससे पत्तियों के टेढ़ा होने का खतरा रहता है, सफाई भी ठीक से नहीं हो पाती। इसी तरह एसी के फिल्टर को निकाल कर धोएं और सर्फ वाले पानी भीगे गीले कपड़े से पूरे एसी को साफ करें। इस मौसम में कूलर का पानी सुखा कर उसकी जालियों की घास फेंक दें और उसे पूरी तरह सुखा कर ढक दें।

दीवारें, खिड़कियां और बत्तियां

घर की दीवारों की भी सफाई प्राय: नहीं हो पाती। इसके लिए वाइपर में कपड़ा लपेट कर दीवारों की धूल हटाएं। अगर दीवारों पर प्लास्टिक पेंट कर रखा है, तो उन्हें गीले कपड़े से भी पोंछ सकते हैं। इसी तरह खिड़कियों के कांच, उनके फ्रेम को भी सावधानी से रगड़ कर साफ करें। बत्तियों के कवर को सावधानी से उतारें और सर्फ मिले गरम पानी से धोकर उन्हें सुखा लें। उनकी फिटिंग्स को भी सूखे और गीले कपड़े से पोंछ कर साफ करें।

बिस्तर और आलमारियां

जब बिस्तर और आलमारियों की सफाई की बारी आए, तो गद्दों को धूप में डाल दें। फिर गीले कपड़े से रगड़ कर सफाई करें। आलमारियों की सफाई में भी यही क्रम अपनाएं। सफाई के बाद अगर बिस्तर बक्से वाला है तो उसमें और आलमारियों में नेफ्थलीन बॉल यानी फिनायल की गोलियां रखें। इससे कीड़े नहीं रहेंगे और अच्छी खुशबू मिलेगी।

रसोई

रसोई की सफाई सबसे अधिक श्रम और सावधानी मांगती है। इसमें बरसात की नमी और तेल-घी की चिकनाई की वजह से गंदगी अधिक जमती है। इसलिए चिमनी की जालियों, उसके बाहरी हिस्सों और चूल्हे, कुकिंग रेंज की सफाई के लिए कोलीन जैसे पदार्थों का उपयोग करें। हर बटन की सफाई ठीक से होनी चाहिए। इसी तरह बर्तन रखने की जगह, अवन, अनाज के बर्तनों आदि को गरम पानी में डिटर्जेंट डाल कर मुलायम कपड़े से सफाई करें।

नीबू की शक्ति

सफाई में नीबू का रस बहुत कारगर साबित होता है। दो-तीन नीबू का रस निकाल लें। उसे पानी में डालें, थोड़ा-सा डिटर्जेंट भी मिला लें और इससे रसोई के उपकरणों, बाथरूम की फिटिंग्स की सफाई करें, गंदगी आसानी से उतर जाएगी। फ्रिज और अवन के भीतरी हिस्से की सफाई में नीबू के रस का इस्तेमाल करें, तो सफाई के साथ-साथ इसमें अच्छी खुशबू भी आ जाएगी।

फर्श और गुसलखाना

घर के फर्श और गुसलखाने की सफाई यों तो रोज होती है, पर देखा जाता है कि कोनों में और बाथरूम की दीवारों, कांच वगैरह पर साबुन की चिकनाई वाली परत चढ़ जाती है। इसे साफ करने के लिए थोड़ी मेहनत की जरूरत होती है। बाल्टी भर गरम पानी में डिटर्जेंट डालें, कुछ नीबू का रस भी मिला लें। फिर बर्तन धोने वाले स्क्रबर की मदद से फर्श के कोनों और बाथरूम की दीवारों, टाइलों पर मलते हुए जमी हुई मैल को छुड़ाएं। फिर पानी डाल कर वाइपर की मदद से पानी हटाएं और पोंछा लगा कर सुखा लें। फशई की सफाई करते समय बिस्तर, सोफे, डाइनिंग टेबल और खिसकाई जा सकने वाली आलमारियों, कुर्सी-मेज आदि को हटा कर ही सफाई करें, क्योंकि इनके नीचे रोज ठीक से सफाई नहीं हो पाती, जिससे गंदगी जमती रहती है।

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