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दाना-पानी: कुछ खास कुछ अलग, राजस्थानी गट्टे और केले के दही भल्ले

हर मौसम में कुछ सीमित सब्जियां ही उपलब्ध होती हैं, जिन्हें लगातार खाने से अरुचि पैदा हो जाती है। ऐसे में राजस्थानी गट्टे अच्छा विकल्प हो सकते हैं।

Author Published on: March 31, 2019 4:23 AM
राजस्थान में बेसन से अनेक प्रकार के व्यंजन बनते हैं।

मानस मनोहर

राजस्थानी गट्टे: राजस्थान में बेसन से अनेक प्रकार के व्यंजन बनते हैं। उनमें गट्टे की सब्जी काफी लोकप्रिय है। जब घर में कोई सब्जी न हो या एक ही तरह की सब्जियां खाते-खाते ऊब जाएं, तो गट्टे की सब्जी बना कर खा सकते हैं। हर मौसम में कुछ सीमित सब्जियां ही उपलब्ध होती हैं, जिन्हें लगातार खाने से अरुचि पैदा हो जाती है। ऐसे में राजस्थानी गट्टे अच्छा विकल्प हो सकते हैं। यों तैयार राजस्थानी गट्टे बाजार में पैकेट में मिल जाते हैं, बस तरी बना कर उन्हें उसमें डालना और खाना होता है। पर घर में ताजा गट्टे बनाएं, तो उनका स्वाद ही निराला होता है। गट्टे की सब्जी की खासियत यह है कि इसे रोटी, परांठे, पूड़ी, बाटी, चावल आदि के साथ बड़े चाव से खाया जा सकता है। चार-पांच लोगों के लिए गट्टे बनाने के लिए एक कप बेसन पर्याप्त होता है। इसमें जरूरत भर का नमक, एक चम्मच अजवाइन, चुटकी भर हींग, चौथाई चम्मच कुटी लाल मिर्च और चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर डाल कर मिलाएं। अब इसमें तीन से चार चम्मच तेल डालें और दोनों हथेलियों से रगड़ते हुए ठीक से मिला लें। फिर थोड़ी-थोड़ी दही डालते हुए बेसन को गूंथें। रोटी के लिए जैसा आटा गूंथते हैं, वैसा ही गूंथें। अब बेसन को ढंक कर बीस मिनट से आधे घंटे के लिए रख दें।

गट्टे को थोड़ा अलग स्वाद देने और आकर्षक बनाने के लिए इसमें प्रयोग कर सकते हैं। यों गट्टे अलग-अलग तरीके से बनाए जाते हैं, पर आप यह प्रयोग करें। तवे पर दो चम्मच बिना छिलके वाली मूंग दाल को सुनहरा होने तक सेंक लें। फिर उसे खरल या मिक्सर में मोटा, दरदरा पीस लें। इसमें कुटी लाल मिर्च, धनिया पाउडर, थोड़ा गरम मसाला डालें और तीन-चार बूंद तेल डाल कर पेस्ट बना लें। एक भगोने में पानी उबलने रख दें। फिर हथेलियों पर तेल लगा कर गुंथे हुए बेसन को एक बार फिर से नरम करते हुए गूंथ लें। चार लोइयां बनाएं और उन्हें बीच से दबा कर उनमें मूंगदाल के पेस्ट को बराबर-बराबर हिस्सों में बांट कर भर दें। लोइयों को ठीक से बंद करें। फिर सावधानी पूर्वक इन लोइयों को लंबाई में गोलाकार फैला लें। पानी उबलने लगे, तो इन गोलाकार लोइयों को उसमें डाल दें और पंद्रह से बीस मिनट तक पकने दें। इसके पक कर तैयार होने की पहचान यह है कि गट्टे पानी पर तैरने लगते हैं और उनकी सतह पर सफेद दानादार चित्तियां उभर आती हैं। आंच बंद कर दें। गट्टों को बाहर निकाल कर मनचाहे आकार में काट लें। अब इसकी ग्रेवी बनाने के लिए दो टमाटर पीस लें। कड़ाही में एक चम्मच तेल गरम करें और उसमें जीरा, अजवाइन, हींग का तड़का दें। पिसा हुआ टमाटर डालें और मद्धिम आंच पर चलाते हुए पकाएं, जब तक कि वह तेल न छोड़ने लगे। अब उसमें थोड़ा-सा गरम मसाला, आधा चम्मच कुटी लाल मिर्च, हल्दी पाउडर और नमक मिला कर ठीक से मिलाएं। अब उसमें एक कटोरी फेंटा हुआ दही डालें और चलाते हुए पकाएं। जब तरी गाढ़ी होने लगे तो उसमें गट्टे डाल कर थोड़ी देर चलाते हुए पकाएं। फिर थोड़ा-सा पानी डाल कर उबाल आने तक पकाएं और फिर हरा धनिया, हरी मिर्च और अदरक के लच्छे के साथ सजा कर परोसें।

केले के दही भल्ले: दही भल्ले आमतौर पर उड़द की दाल से बनते हैं। पर यह कम लोगों को पता है कि दही और उड़द विषम भोज्य हैं। यानी इन्हें एक साथ खाना सेहत के लिए ठीक नहीं है। ऐसे में कच्चे केले के भल्ले अच्छा विकल्प हैं। इन्हें बनाना भी बहुत आसान है। खाने में इनका स्वाद लाजवाब होता है। केले के भल्ले बनाने के लिए पांच-छह कच्चे केले लें। उन्हें कुकर में उबाल कर छिलका उतार लें। फिर इसके गूदे में कटी हुई हरी मिर्च, हरा धनिया, अदरक और जीरा पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, नमक डाल कर ठीक से फेंट लें। जैसे अलालू की पिट्ठी तैयार करते हैं, उसी तरह पिट्ठी तैयार करें। यों इसे तलते समय फटने की संभावना नहीं होती, पर आप चाहें, तो ऊपर से लपेटने के लिए ब्रेड क्रम्स या सूखे मैदे का उपयोग कर सकते हैं।

पिट्ठी से मनचाहे आकार में भल्ले बना लें। उन्हें क्रम्स या सूखे मैदे में लपेटें और कुछ देर के लिए रख दें। फिर कड़ाही में तेल गरम करें और मद्धिम आंच पर इन भल्लों को सुनहरा होने तक तल लें। अब इसमें डालने के लिए एक कटोरी दही फेंट लें। भल्लों को प्लेट में डालें और उनके ऊपर फेंटा हुआ दही, भूना हुआ जीरा पाउडर, चाट मसाला, सोंठ वाली चटनी, कटा हुअ हरा धनिया और अदरक डालें और खाने के लिए परोसें। खुद भी खाएं और मेहमानों को भी खिलाएं। ऐसे भल्ले पहले आपने शायद नहीं खाए होंगे। इसकी एक खासियत यह भी है कि जिन लोगों को लहसुन-प्याज से परहेज है, उन्हें भी परोसा जा सकता है। आम दही भल्लों से होने वाले नुकसान से तो बचेंगे ही।

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