बरसात में बगीचे की देखभाल

बरसात का मौसम अपने साथ हरियाली लेकर आता है। इस मौसम में नमी और उमस लगातार बनी रहती है, जो पेड़-पौधों की बढ़वार और बीजों के उगने में बहुत मदद करती है। इसलिए यह मौसम पेड़-पौधों की देखभाल करने का उपयुक्त समय होता है। जो लोग सब्जियां उगाने के शौकीन हैं, वे इस मौसम में उनके बीज बो सकते हैं। सर्दी में तैयार होने वाले फूलों की पौध के लिए भी इसी मौसम में तैयारी की जाती है। बरसात में बगीचे की देखभाल कैसे करें, बता रही हैं अनीता सहरावत।

सबसे पहले बगीचे का रख-रखाव बहुत जरूरी है। छोटे पौधों से शुरुआत करें। फूल जैसे ही मुरझाने लगें उन्हें तने से कतर दें, इससे नए फूलों की कलियां जल्दी निकलेंगी, साथ ही इससे पौधे की उम्र भी बढ़ती है।

सावन की हरियाली किसे नहीं सुहाती! बारिश की बूंदों से नहाए पेड़-पौधे की खूबसूरती को आंखें जकड़ लेना चाहती हैं। अगर आपको बागवानी का शौक है और घर के बाहर खुली जगह है, तो पुराने पौधों की निराई-गुड़ाई और नए पौधों के रोपण का मानसून एकदम सही समय है। सावन भादो की इस गर्मी में फूलों की खिलावट भले ही कम खिले, पर बागवनी के लिहाज से आपके पास बहुत सारे विकल्प खुले हैं। सजावटी और छायादार पेड़-पौधों के अलावा फल और सब्जियों की कई किस्में इस मानसून में आप उगा सकते हैं। मगर बारिश के मौसम की अपनी परेशानियां भी हैं, यह अपने साथ खर-पतवार और कीटनाशकों की आफत लेकर आता है। आइए जानते हैं कि इस मानसून अपने बगीचे का खयाल कैसे रखें और उसे खूबसूरत ही नहीं उपयोगी भी बनाएं।

बगीचे की देखरेख से करें शुरुआत

सबसे पहले बगीचे का रख-रखाव बहुत जरूरी है। छोटे पौधों से शुरुआत करें। फूल जैसे ही मुरझाने लगें उन्हें तने से कतर दें, इससे नए फूलों की कलियां जल्दी निकलेंगी, साथ ही इससे पौधे की उम्र भी बढ़ती है। लेकिन अगर फूल बीज देने वाले हों, तो यह तरीका न अपनाएं। झाड़ियां और पत्तेदार पौधे बारिश में बड़ी तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए इनकी कांट-छांट जल्दी होनी जरूरी है। अपने बगीचे और पसंद के हिसाब से इन्हें अलग-अलग आकार और डिजाइन देने का यह बिल्कुल सही समय है। घास की चादर को भी नियमित तौर पर कतरना चाहिए। पीली घास बारिश से जल्दी गल जाती है, इसे जल्दी हटाना बेहद जरूरी होता है, इससे नई घास को उगने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा बारिश में अपने आप उग आने वाले खर-पतवार को भी नियमित तौर पर हटाते रहें। ये पेड़-पौधों को विकसित होने से तो रोकते ही हैं, बगीचे की सुंदरता भी खराब होती है। बड़े पेड़ों की छंटाई के लिए उनकी डालों को काटने के अलावा विकल्प नहीं, क्योंकि ये लटक कर नीचे तक आ जाती हैं। वैसे तो पेड़ साल भर बढ़ते हैं और इन पर मौसम का कोई खास असर नहीं पड़ता, इसलिए जब भी आपको लगे कि पेड़ की कोई डाल कमजोर हो रही है और गिर सकती है, तो पहले ही एहतियात के तौर पर इनकी कटाई करते रहें।

पानी का बंदोबस्त

अब बारी आती है पानी की। बारिश का पानी बगीचे के लिए संजीवनी का काम करता है। इसमें मौजूद खनिज तत्त्व पेड़-पौधों को तरोताजा रखने के अलावा उन्हें विकसित होने में भी मदद करते हंै। पर मिट्टी में नई जान फंूकने वाला यह पानी अगर कई दिनों तक लगातार बरसता रहे या बगीचे में भर जाए तो मिट्टी में मौजूद प्राकृतिक तत्त्वों को बहा भी सकता है। इसलिए इसकी निकासी या संग्रह का बंदोबस्त पहले ही कर लें।

मिट्टी तैयार करें

जगह की किल्लत के चलते आजकल किचन गार्डन और छत पर बागवानी का चलन जोर पकड़ रहा है। खैर, बगीचा आपका चाहे कोई भी हो, बड़े बगीचों से लेकर गमलों में बागवानी के लिए मिट्टी तैयार करने के लिए मानसून सबसे सही समय है। बारिश का पानी मिट्टी की तह तक जाकर इसे नरम कर देता है, जिससे मिट्टी की निराई-गुड़ाई में आसानी रहती है।

आजकल लोग जैविक उपज को लेकर गंभीर है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अलावा केचुए और दूसरी प्राकृतिक खाद भी आपको आसानी से बाजार में मिल जाएगी। इन्हें आप ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। जमीन तैयार करते समय इस बात का भी ध्यान रखें कि खुदाई के बाद मिट्टी को ढीला रहने दें। इस तरह हवा के आवागमन की वजह से खाद और दूसरे तत्त्व मिट्टी में अच्छे से मिल सकेंगे।

क्या उगाएं

बगीचा तैयार हो गया, तो बारी आती है कि क्या उगाएं? बारिश का मौसम कई तरह की फल-सब्जियां उगाने के लिए एकदम अनुकूल होता है। खीरा, टमाटर, गोभी, चकुंदर, मूली, पालक, गाजर, सेमफलियां, भिंडी समेत अनेक सब्जियां आप बगीचे में उगा सकते हैं। आजकल सब्जियां उगाने के लिए बाजार में गमले उपलब्ध हैं, उन्हें खरीदें और उनमें सब्जियां बोएं।

बहुतेरी सब्जियां बीजों से उगती हैं, तो कइयों की पौध तैयार करनी पड़ती है। सीधे बाजार से बीज और पौधे खरीदने के बजाय सरकारी और निजी नर्सरी को तवज्जो दें। गुणवत्ता और सहूलियत के लिहाज से यहां आपको ज्यादा विकल्प मिलेगें। फलों के लिए कटहल, नींबू, चीकू, अमरूद, केला, पपीता, आम, जामुन, शहतूत, वगैरह के बड़े पेड़ों का रोपण कर सकते हैं। बारिश में ये अच्छे से जड़ पकड़ लेते हैं। हांलाकि इनके फल खाने के लिए आपको इंतजार करना पड़ेगा। अगर आपका बगीचा बड़ा है और जगह की कोई समस्या नहीं है, तो नीम और अन्य छायादार पेड़ भी उगा सकते हैं।

खैर, यह तो हुई आपके बगीचे को उम्दा और उपयोगी बनाने की बात। बेशक यह समय फूलों का नहीं है, लेकिन बगीचे की सुंदरता इनके बिना है भी अधूरी। इस समय बहुत कम पेड़-पौधे फूलों से सजते हैं। गुलमोहर, दालचीनी, गुड़हर या जवाकुसुम, चमेली, नील के पौधे लगा सकते हैं। ये खासतौर पर बारिश में ही खिलते हैं। बारिश से धुली हरियाली में गुलमोहर के पीले और लाल फूलों से लदे पेड़ और दालचीनी के पीले फूलों के गुच्छों की खूबसूरती बेजोड़ है।

गुड़हल के पौधे उगाना काफी आसान है, आप इसे गमले में भी उगा सकते हैं। इसके फूल लाल, पीले, आड़ू रंग के होते हैं। नील का पौधा, जैसा इसका नाम है, वैसा ही यह फूल देता है, लंबी डंडियों पर सितारों जैसी पखुड़ियां इनकी पहचान है। नीले रंग के अलावा ये सफेद और दूधिया रंगों में भी खिलते हैं। अपनी मादक खुशबू के लिए जाना जाने वाला गंधराज यानी चमेली का पौधा आपके बगीचे को सुंदरता से ही नहीं, महक से भी भर देगा। इसे जमीन के अलावा गमले में भी आसानी से उगाया जा सकता है। इनके अलावा फूलों की और भी कई किस्में आपको इस मानसून में मिल जाएंगी।

अगर आपके पास बड़ा बाग नहीं है, तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है। आजकल रसोई और छत बागवानी के ताजा चलन को अपनाएं। बड़े पेड़-पौधों के अलावा दूसरे पौधे और फल-सब्जियां उगा कर आप भी अपना बगीचा तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा बहुत सारी उन्नत और विकसित किस्में बाजार में उपल्बध हैं, जो आकार में छोटी होने की वजह से कहीं भी उगाई जा सकती हैं और ये बड़े पौधों के जैसे ही फल-फूल देती हैं। तो, स्वागत कीजिए इस मानसून का अपनी उगाई तरोताजा फल-सब्जियों और बगीचे की हरियाली के साथ।

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