kavita aur shabdbhed nanhi duniya - नन्हीं दुनियाः कविता और शब्द भेद - Jansatta
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नन्हीं दुनियाः कविता और शब्द भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

यह देखो कोयल बोली, कानों में चीनी घोली।

कोयल

आवाज कहां से आई
कितनी मिठास ले आई।

यह देखो कोयल बोली
कानों में चीनी घोली।

बोली जो धीरे धीरे
है संग हवा के हो ली।

वह बोली उड़ती आई
कितनी मिठास ले आई।

वह कुहू कुहू की बोली
डालों के भीतर डोली।

वह बाहर देखो आई
कितनी मिठास ले आई।
शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

ओछा / ओझा

अगंभीर बातों, खराब गुणवत्ता वाली चीजों आदि को ओछा कहते हैं। जबकि ओझा एक जाति विशेष को कहते हैं और ऐसे लोगों को भी कहते हैं, जो झाड़-फूंक करके भूत-प्रेत भगाने जैसे अंधविश्वास फैलाते हैं।

ओर / और

किसी नियत स्थान के आसपास या विस्तार जैसे दाएं-बाएं, ऊपर-नीचे आदि शब्दों से सूचित किया जाता है उसे ओर कहते हैं, जैसे दक्षिण की ओर। जबकि दो चीजों को अलग करने के लिए और शब्द का प्रयोग होता है, जैसे राम और श्याम।

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