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नन्ही कविताः कविता और शब्द-भेद

रावेंद्र कुमार रवि की कविता

Author October 14, 2018 7:36 AM
प्रतीकात्मक चित्र

रावेंद्र कुमार रवि

उड़नतश्तरी में बैठाएं

दरवाजे पर दस्तक देकर,
मस्त हवाएं मुझे बुलाएं!

ज्यों ही मैं दरवाजा खोलूं,
हाथ मिला कर गले लगाएं!
फिर मुझको ले जाकर ऊपर,
मुझको मेरा गांव दिखाएं!
गांव देख नाचे मेरा मन,
जब वे मुझको गीत सुनाएं!
मेरे मन के साथ नाचने,
गोरे बादल घिर-घिर आएं!
नाच देख कर खुश हो-होकर,
कई ‘सलोने’ हाथ हिलाएं!
हाथ पकड़ कर ‘वे’ सब मेरा,
उड़नतश्तरी में बैठाएं!

किसी दूर ग्रह के ये वासी,
मुझको अपने घर ले जाएं!
उनका ग्रह कितना बढ़िया है,
बात-बात में मुझे बताएं!
उनके साथ उड़ी मैं ज्यों ही,
‘जल्दी आना’- कहें हवाएं! ०

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

बुरा / बूरा

अच्छा का विलोम शब्द है बुरा। यानी जो काम या वस्तु अच्छी न हो उसे बुरा या बुरी कहते हैं। जबकि बूरा एक प्रकार का खाने का पदार्थ है, जिसे चीनी को पीस कर तैयार किया जाता है। यह बूरा मिठाई बनाने या फिर वैसे भी चावल में डाल कर या रोटी वगैरह के साथ खाने में इस्तेमाल होता है।

सदेह / संदेह

देह यानी शरीर। उसमें स उपसर्ग लगने से सदेह बना है। सदेह यानी शरीर सहित। सशरीर। जबकि संदेह का अर्थ होता है शक, शुबह।

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