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नन्ही दुनिया: कहानी – दोस्ती

वे दोनों के पास आए और बोले- ‘तुम दोनों हैरान हो न कि डब्बू और बब्बू से कभी मिले नहीं, फिर वे तुम्हारे दोस्त कैसे बन गए?

Author June 10, 2018 7:05 AM
कस्बे की उस गली में रहने वाले लोग दिन में काम करने बाहर जाते थे। विपिन और नीतिन भी सुबह घर से निकलते और शाम को ही घर आते।

गोविंद शर्मा

कस्बे की उस गली में रहने वाले लोग दिन में काम करने बाहर जाते थे। विपिन और नीतिन भी सुबह घर से निकलते और शाम को ही घर आते। विपिन के पास डब्बू और नीतिन के बब्बू नामक कुत्ते थे। उनके पाले हुए कुत्ते दिन भर घर में अकेले रहते। एक दिन विपिन का कुत्ता अकेलेपन से ऊब कर चिल्लाने लगा। कुछ दूसरे घरों के कुत्ते भी चिल्लाए। एकाध घर में कुछ वृद्ध भी थे। वे भी बाहर निकल आए, यह देखने के लिए कि क्या हुआ है? कुत्ते क्यों चिल्लाए हैं? पर किसी के कुछ समझ में नहीं आया। एक दिन फिर विपिन का कुत्ता उसी तरह चिल्लाया, जैसे उसे कुछ दर्द हो रहा हो। उस दिन नीतिन के कुत्ते से नहीं रहा गया। वह किसी तरह घर से बाहर आकर विपिन के घर पहुंच गया। लेकिन वह विपिन के घर के भीतर नहीं जा सका। बाहर के गेट के पास, भीतर डब्बू और बाहर बब्बू। दोनों ने एक-दूसरे को देखा और अपनी पूंछें हिलार्इं। दोनों दोस्त बन गए। अब तो मौका मिलते ही बब्बू डब्बू के पास पहुंच जाता। दोनों को घर के बाहर आकर गली में पहुंचने का रास्ता मिल गया था। दोनों दिन में आपस में मिलते, खेलते और अपने-अपने घरों की रखवाली भी करते।

दोनों में दोस्ती गहरी होती गई। विपिन और नीतिन को उनकी दोस्ती का कुछ पता नहीं चला। एक दिन बाजार में नीतिन ने विपिन के बारे में कुछ लोगों को भड़का दिया। हालांकि विपिन ने कुछ नहीं किया था। विपिन को गुस्सा आया, पर उसने बाजार में झगड़ा नहीं किया। शाम को नीतिन के घर उलाहना देने गया। उसे आता देख नीतिन एक तरफ छिप गया और बब्बू को विपिन की तरफ जाने का इशारा कर दिया। बब्बू तेजी से विपिन की तरफ गया। ऐसा लगा जैसे वह विपिन पर हमला करेगा। पर यह क्या, बब्बू तो उसके पास जाते ही रुक गया। उसे संूघा और अपनी पूंछ हिलाने लगा। अचानक विपिन से लिपट भी गया। यह देख कर विपिन और घर के भीतर से देख रहा नीतिन, दोनों हैरान रह गए। बब्बू के इस व्यवहार से हैरान विपिन, नीतिन से कुछ कहे बिना ही वापस आ गया।

उधर नीतिन यह सोचने लगा कि यह कैसे हुआ। बब्बू ने उस विपिन को अपना दोस्त कैसे मान लिया? हो सकता है जब बाहर होता हूं तब विपिन यहां आकर बब्बू को कुछ खाने के लिए देता हो और इस तरह दोस्ती कर ली होगी। यह तो गलत है। ऐसा क्यों करते हो? यह शिकायत करने के लिए वह विपिन के घर की ओर चल पड़़ा। विपिन उस समय किसी काम मे व्यस्त था। वह जल्दी घर से बाहर नहीं आ सका। पर विपिन का डब्बू बाहर आ गया। वह नीतिन को देख कर भौंकने ही वाला था कि एकाएक चुप हो गया और अपनी पूंछ हिलाने लगा। नीतिन हैरान रह गया। विपिन बाहर आया तो नीतिन कुछ बोल नहीं सका।

क्यों आए हो मेरे घर पर?

आया तो तुमसे झगड़ा करने, शिकायत करने, पर तम्हारे डॉगी ने मित्रवत व्यवहार कर मुझे हैरान कर दिया है।

विपिन बोला- कल शाम मेरे साथ भी ऐसा हुआ था। मैं भी तुम्हारे डॉगी के व्यवहार से अभी तक हैरान हूं।

वे दोनों ऊंची आवाज में बात कर रहे थे। पड़ोस में रहने वाले एक बुजुर्ग ने उनकी बात सुन ली। वे दोनों को जानते थे और यह भी जानते थे कि दोनों में बनती नहीं है।

वे दोनों के पास आए और बोले- ‘तुम दोनों हैरान हो न कि डब्बू और बब्बू से कभी मिले नहीं, फिर वे तुम्हारे दोस्त कैसे बन गए? सुनो, दिन में जब तुम दोनों बाहर होते हो तब डब्बू-बब्बू घरों में अकेले रह जाते हैं। बोर हो जाते हैं इस अकेलेपन से। दोनों ने आपस में दोस्ती कर इस अकेलेपन से बचने का रास्ता निकाल लिया है। दोनों दिन में कई बार मिलते हैं, खेलते हैं।’

‘हो सकता है, ऐसा हो। पर हमारे दोस्त कैसे बन गए ये।’

‘यह जीव बड़ा समझदार होता है। केवल शक्ल नहीं, लोगों को शरीर की गंध से भी पहचानते हैं। जब तुम लोग घर आते हो तो तुम्हारे डब्बू, बब्बू तुमसे लिपटते हैं। उनके शरीरों की गंध तुम्हारे में रह जाती है। डब्बू को बब्बू की गंध विपिन को संूघने से मिली। अपने दोस्त की गंध जिसमें मिली, उसको इन्होंने अपना दोस्त मान लिया।’

विपिन और नीतिन ने एक-दूसरे की तरफ देखा, पर बोले नहीं।

बुजुर्ग बोले- ‘देखा इन जीवों को, कैसे दोस्ती कर लेते हैं और फिर उसे निभाते भी हैं। एक तुम हो, इंसान होकर भी बिना बात आपस में लड़ते-झगड़ते रहते हो, एक-दूसरे के प्रति मन में गांठ रखते हो।’

अब विपिन और नीतिन ने फिर एक-दूसरे की तरफ देखा और मिलाने के लिए हाथ आगे बढ़ा दिया।

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