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नन्ही दुनिया- कविता और शब्द भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

Author February 11, 2018 04:09 am
प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रकाश मनु
याद मुझे आते नाना जी

चलो सुनाता हूं एक किस्सा
प्यारे नाना जी थे मेरे,
लंबी-चौड़ी काया उनकी
दिन भर खूब लगाती फेरे।

बड़ी दूर जंगल-पर्वत से
घोड़ा दौड़ाते आते थे,
आए नाना, आए नाना-
हम बच्चे तब चिल्लाते थे।

आंधी, पानी और बवंडर
रोक न पाते उनकी राह,
सरपट घोड़ा दौड़ा करता-
देख सभी कह उठते-वाह!

हमें घुमाते जंगल-जंगल
हरी घाटियां और पहाड़,
हंसती झीलें, हंसती नदियां,
फूलों वाले सुंदर झाड़।

सीना तान चला करते तो
खुद ही बन जाता था रस्ता,
सारा जंगल लगता उनको
खुशबू का प्यारा गुलदस्ता!

कभी राह मुश्किल आती तो
हंसकर कहते- मेरा घोड़ा,
यह खाई भी पार करेगा
पहुंचेगा सीधा अलमोड़ा!

हम बच्चों पर प्यार लुटाते
गोदी में लेकर नाना जी,
और सुनाते किस्से जिनका
बड़ा गजब ताना-बाना जी।

शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

सर / शर

कपाल या सिर को सर कहते हैं। सिर शब्द ही घिस कर सर बना है। उर्दू में इसका बहुतायत प्रयोग होता है। जबकि शर का अर्थ है वाण, तीर। भीष्म पितामह के शर शैया पर पड़े होने के बारे में तो आपने सुना-पढ़ा ही है।

मजेदार / मंझधार

जब कोई वस्तु खाने में स्वादिष्ट हो, कोई बात आनंददायक हो, तो उसे मजेदार कहते हैं। मजेदार यानी आनंददायक। जबकि मंझधार का अर्थ होता है धार के बीच का हिस्सा, जो सबसे खतरनाक माना जाता है।

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