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नन्ही दुनिया: कहानी- नोनी की सूझ

रविवारी कहानी

Author November 11, 2018 4:36 AM
प्रतीकात्मक फोटो

आशा शर्मा

नोनी! सुबह हो रही है, चलो खाना खा लो…। फिर हमारे सोने का समय हो जाएगा।’ खाने की प्लेट लगाते हुए नन्हे उल्लू नोनी की मां ने उसे आवाज लगाई। ‘मुझे नहीं खाना कोई खाना-वाना… मैं भगवान जी से नाराज हूं।’ कहते हुए नोनी ने अपने मुंह के साथ-साथ पंख भी कुछ और फुला लिए। ‘भगवान जी से नाराज? वो क्यों भला?’ मां ने आश्चर्य से पूछा। ‘उन्होंने ही तो मुझे रात में जागने का श्राप दिया है। सब पशु-पक्षी दिन में खेलते हैं, मस्ती करते हैं। सिर्फ मैं हूं जो दिन भर सोता रहता हूं। इसीलिए कोई दूसरा जानवर मेरा दोस्त भी नहीं है।’ नोनी ने अपने मन का गुबार मां के सामने निकाला। ‘बेटा! भगवान जी ने सभी प्राणियों को किसी न किसी खासियत का उपहार दिया है। बस यह तो हमारे देखने का नजरिया है कि हम उसे किस तरह देखते हैं। है कोई और पशु या पक्षी इस दुनिया में, जो हमारी तरह रात में दूर तक देख सकता है?’ मां ने नोनी को समझाने की कोशिश की, मगर वह आज कुछ भी सुनने के मूड में नहीं था। तभी दिन निकल आया और नोनी अपने कंबल में घुस कर सो गया।

सोते-सोते भी नोनी सपने में भगवान जी से शिकायत कर रहा था- ‘यह क्या भगवान जी! शेर को आपने ताकत दी, घोड़े को तेज चाल, बारहसिंगे को सुंदर सींग, लोमड़ी को चालाकी, चील को ऊंची उड़ान, लेकिन हम उल्लुओं को आपने रात में जागने की सजा क्यों दी? जब सारा जंगल सो जाता है, तब हम जागते हैं, अकेले। आपने ऐसा क्यों किया?’ इसी तरह के सवालों में उलझा हुआ नोनी दिन भर सोता रहा और शाम को जब हॉकर कालू कौवा सायंकालीन अखबार जोर से उनके कोटर में फेंक कर गया तो उसकी नींद खुली। अलसाया-सा नोनी बुझे मन से अखबार के पन्ने पलटने लगा। ‘क्या खबरें पढूं? हमारे जगने तक तो सारी खबरें बासी हो जाती हैं।’ सोचते हुए नोनी अखबार को समेट कर रखने ही वाला था कि उसकी नजर एक खबर पर पड़ी। लिखा था- ‘इन दिनों जंगल में एक बहुत शातिर चोरों के गिरोह ने आतंक मचा रखा है। कल तो पुलिस थाने से महज दो सौ मीटर की दूरी पर एक दुकान में रखे सामान पर इन चोरों ने हाथ साफ कर दिया।’

खबर पढ़ कर नोनी मन ही मन कुछ सोचने लगा। वह नहा-धो, नाश्ता करके अपने कोटर से बाहर निकला और पेड़ की सबसे ऊंची टहनी पर जाकर बैठ गया। जैसे-जैसे रात गहराने लगी, वैसे-वैसे जंगल की चहल-पहल भी सन्नाटे में बदलने लगी थी। रात के अंधेरे के साथ-साथ नोनी की आंखों की देखने की क्षमता भी बढ़ने लगी। अब वह काफी दूर तक साफ-साफ देख सकता था। उसने अपनी गर्दन उठाई और आंखों को गोल-गोल घुमाते हुए अपने आसपास का जायजा लेने लगा। अचानक उसे पड़ोसी वन की तरफ जाने वाले रास्ते पर कुछ परछाइयां-सी दिखाई दी। नोनी को दाल में कुछ काला नजर आया। उसने अपनी पैनी नजरें उन परछाइयों पर ही गड़ा दी। ‘अरे! यह तो भोला सियार और उसके साथी हैं। इन्हें पिछले दिनों महाराज शेर सिंह ने चोरी करने के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई थी और वे कुछ ही दिनों में जेल तोड़ कर भाग गए थे।’ नोनी ने उसे पहचान लिया था। वह सबसे नजरें बचा कर उनका पीछा करने लगा। भोला अपने साथियों के साथ ‘हस्तीमल डायमंड शॉप’ के पास रुक गया। नोनी भी वहीं पास ही एक पेड़ की टहनी पर छिप कर उनकी हरकतें देखने लगा। भोला ने अपने थैले से एक बड़ी-सी लोहे की रॉड निकाली और जोरदार प्रहार से दुकान का ताला तोड़ दिया। भोला और उसके साथियों ने दुकान के अंदर घुस कर उसका शटर बंद कर लिया। अब किसी को भी अंदेशा नहीं हो सकता था कि दुकान के भीतर क्या हो रहा है।

नोनी समझ गया कि अब उसे क्या करना है। वह तेजी से उड़ कर पास के पुलिस थाने पर गया और इंस्पेक्टर चीते सिंह को सारी घटना की जानकारी दी। चीते सिंह ने तुरंत अपने सिपाहियों के साथ दुकान को चारों तरफ से घेर लिया और भोला सहित पूरे गिरोह को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
अगले दिन जंगल के सभी समाचारपत्र नोनी की सूझबूझ के किस्सों से भरे पड़े थे। स्वयं महाराज शेर सिंह ने उसे दरबार में बुला कर सम्मानित किया।
‘ये सब नोनी की रात में दूर तक देखने की खूबी के कारण ही संभव हुआ था। हमें नोनी पर गर्व है।’ शेर सिंह से उसकी तारीफ करते हुए कहा।
‘नोनी! क्या अब भी तुम्हें भगवान जी से शिकायत है?’ उसकी मां ने प्यार से पूछा।
‘नहीं मां! तुम सही कहती हो। ईश्वर ने हरेक को कोई न कोई खूबी दी है। फर्क सिर्फ हमारे देखने के नजरिए में होता है।’ नोनी ने मुस्कुरा कर कहा। अब उसे भी अपनी इस खूबी पर गर्व महसूस हो रहा था। ०

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