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नन्ही दुनिया: मिंकी की होली

अब तक की हर होली में मिंकी बंदर का काम दूसरों को गहरे रंगों से रंग देना होता था, जो कई दिन तक छूटते नहीं थे। वह होली के बहाने लोगों को कीचड़-पानी से सराबोर करने से भी नहीं चूकता था। मगर इस साल उसने घोषणा कर दी थी कि वह रंगों और कीचड़ वाली होली नहीं खेलेगा। उसने दोस्तों को अपने घर जलपान के लिए बुलाया था।

Author Published on: March 17, 2019 2:49 AM
प्रतीकात्मक फोटो

हरीश कुमार ‘अमित’

अब तक की हर होली में मिंकी बंदर का काम दूसरों को गहरे रंगों से रंग देना होता था, जो कई दिन तक छूटते नहीं थे। वह होली के बहाने लोगों को कीचड़-पानी से सराबोर करने से भी नहीं चूकता था। मगर इस साल उसने घोषणा कर दी थी कि वह रंगों और कीचड़ वाली होली नहीं खेलेगा। उसने दोस्तों को अपने घर जलपान के लिए बुलाया था। उसने यह भी कहा था कि कोई दोस्त उसे रंग वगैरह न लगाए, क्योंकि इस बार वह अलग तरह की होली मनाना चाहता है। मिंकी बंदर के दोस्तों ने भी रंगों वाली होली न खेलने की बात सोच ली।

मिंकी के निमंत्रण के अनुसार होली वाले दिन पिंकू खरगोश, टीटू पिल्ला, ननकू चूहा, पिनपिन लोमड़ और बंटी गीदड़ सुबह नौ बजे जलपान के लिए मिंकी के यहां पहुंच गए। पर वे मन ही मन डर रहे थे कि कहीं वह पिछले वर्षों की तरह उन पर रंग और कीचड़ की बौछार न कर दे, मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। इससे दोस्तों के मन का डर दूर हो गया।
मिंकी ने उन्हें सोफे पर बिठाया। फिर गुझिया और गुलाब जामुन की दो प्लेटें ले आया। पहले उसने गुझिया की प्लेट सबके आगे की। सबने एक-एक गुझिया उठा ली और खाने लगे। गुझिया बड़ी मीठी और स्वादिष्ट थी। उसके बाद मिंकी ने गुलाब जामुन वाली प्लेट आगे बढ़ाई। सब जानवरों ने एक-एक गुलाब जामुन उठा ली।
तभी मिंकी ने कहा, ‘दोस्तो, गुलाब जामुन को खाने का असली मजा तो तभी आता है जब उसे पूरे का पूरा मुंह में डाल कर गपागप खाया जाए।’
मिंकी की बात सुन कर उसके दोस्तों ने पूरे का पूरा गुलाब जामुन मुंह में डाल लिया और उसे गपागप खाने लगे। मगर यह क्या! गुलाब जामुन तो मीठा था ही नहीं। ऐसा लगता था जैसे उसे नमक के गाढ़े घोल में डुबो कर रखा गया हो।
पिंकू खरगोश बोला, ‘यह गुलाब जामुन है या नमक का ढेला!’
बाकी दोस्तों ने भी पिंकू की हां में हां मिलाई।

इस पर मिंकी भोली-सी सूरत बनाते हुए कहने लगा, ‘ओ हो, लगता है गुलाब जामुनों के लिए चाशनी बनाते समय गलती से चीनी की जगह नमक पड़ गया। माफी चाहता हूं दोस्तो। मैं तुम लोगों के लिए गुझिया की एक और प्लेट लाता हूं। गुझिया से तुम लोगों के मुंह का स्वाद बदल जाएगा।’
वह गुझिया की एक और प्लेट ले आया। सब दोस्तों ने जल्दी से एक-एक गुझिया उठा ली और गपागप खाने लगे। लेकिन यह क्या? गुझिया में तो लाल मिर्च का पाउडर भरा था। मिंकी के दोस्तों का मिर्चों के मारे बुरा हाल हो गया। वे जोर-जोर से खांसने लगे और उनकी आंखों और नाक से पानी बहने लगा।
उनकी यह दशा देख कर मिंकी बंदर भोला-सा मुंह बनाते हुए कहने लगा, ‘ओह, लगता है, गुझिया बनाते समय गलती से मिर्चें भी पड़ गई हैं। तुम लोग घबराओ नहीं। मैं अभी तुम सबके लिए शर्बत लाता हूं। उसे पीने के बाद तुम ठीक हो जाओगे।’
मिंकी रसोई में चला गया। कुछ देर बाद वह लौटा तो उसके हाथ में शर्बत से भरे गिलास थे। मिर्चों के मारे सभी दोस्तों का हाल इतना बुरा था कि उन्होंने कुछ भी सोचे-समझे बिना ट्रे से एक-एक गिलास उठा लिया और गटागट पीने लगे।
मगर यह क्या? शर्बत में तो खूब सारा गरम मसाला डाला हुआ था। शर्बत पीते ही दोस्तों की हालत और खराब हो गई। टीटू पिल्ला अभी काफी छोटा था। वह तो दर्द और से चीखने और फर्श पर गिर कर तड़पने लगा।
टीटू की हालत देखकर पिंकू खरगोश, ननकू चूहा, पिनपिन लोमड़ और बंटी गीदड़ बहुत घबरा गए। बंटी गीदड़ बोला, ‘टीटू को किसी डॉक्टर के पास ले जाना पड़ेगा। कहीं इसकी हालत और न बिगड़ जाए।’
इस पर पिंकू खरगोश ने कहा, ‘मगर बंटी, होली के दिन कोई डॉक्टर मिलेगा कैसे?’

मिंकी पास ही खड़ा उनकी बातें सुन रहा था। वह बोला, ‘डॉक्टर बबलू जिराफ मेरे मामा जी हैं। वे यहां से ज्यादा दूर भी नहीं रहते। मैं उन्हें फोन करके यहां आने की विनती करता हूं। वे अपनी कार में आ जाएंगे।’
कुछ ही देर में बबलू जिराफ होली के हुड़दंग से बचते-बचाते अपनी कार में मिंकी बंदर के यहां पहुंच गए। मिंकी ने सारी बात उन्हें बता दी। उन्होंने टीटू पिल्ले का अच्छी तरह से मुआयना किया। फिर वे कहने लगे, ‘मैं ये दवाइयां दे रहा हूं। इन्हें फौरन टीटू को खिला दो। इसके बाद भी इसे अगले तीन दिनों तक दवाई खिलानी पड़ेगी, तभी यह पूरी तरह से ठीक हो पाएगा। अच्छा हुआ कि मुझे अभी बुला लिया, नहीं तो इसकी हालत बहुत ज्यादा बिगड़ सकती थी। मगर मिंकी, यह बताओ कि होली के बहाने अपने दोस्तों पर इतना अत्याचार करते तुम्हें शर्म नहीं आई?’
‘मगर यह सब तो होली का मजाक था, मामा जी!’ मिंकी बंदर ने कहा।
‘मिंकी, होली का मतलब यह नहीं कि तुम जो जी में आए, करते रहो। होली वाले दिन पहले तुम रंगों और कीचड़ से दूसरों को परेशान किया करते थे और अब खाने की चीजों में नमक, मिर्च और गरम मसाला मिला कर लोगों को परेशान कर रहे हो। मान लो, अगर तुम्हारे साथ कोई इस तरह का मजाक करे, तो कैसा लगेगा तुम्हें?’ डॉ. बबलू जिराफ ने कहा।
मिंकी बंदर ने सिर झुका लिया। फिर वह बोला, ‘मामा जी, मैं वाकई बहुत शर्मिंदा हूं। मैं अपने दोस्तों से माफी मांगता हूं। आज के बाद ऐसी शरारत मैं कभी नहीं करूंगा।’

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