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नन्ही दुनिया: कविता और शब्द-भेद

अनुप्रिया कविता चले खेलने होली भोर हुई और निकल पड़ी घर से बच्चों की टोली रजिया, गुनगुन, रोहन, बबली चले खेलने होली चेहरे पर है सजा गुलाल पीला, हरा, बैंगनी, लाल मानो इंद्रधनुष ने आकर रची नई रंगोली दहीवड़े और मालपुए संग खूब जमाया रंग फागुन ने चुपके से आकर मिश्री हवा में घोली रजिया, […]

Author March 17, 2019 2:58 AM
प्रतीकात्मक फोटो

अनुप्रिया

कविता

चले खेलने होली

भोर हुई और निकल पड़ी
घर से बच्चों की टोली
रजिया, गुनगुन, रोहन, बबली
चले खेलने होली

चेहरे पर है सजा गुलाल
पीला, हरा, बैंगनी, लाल
मानो इंद्रधनुष ने आकर
रची नई रंगोली

दहीवड़े और मालपुए संग
खूब जमाया रंग
फागुन ने चुपके से आकर
मिश्री हवा में घोली

रजिया, गुनगुन, रोहन, बबली
चले खेलने होली।

शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

परिहार / प्रहार
किसी दोष, अनिष्ट आदि को दूर करने के लिए उपाय करना परिहार कहलाता है। जैसे ग्रह-दोषों का परिहार। जबकि प्रहार का अर्थ होता है हमला करना। अगर कोई व्यक्ति किसी को कड़वी बाते कहता है, तो उसके लिए भी प्रहार करना शब्द इस्तेमाल होता है।ं

परुष / पुरुष
कठोर, कटु, अप्रिय निष्ठुर, निर्दय आदि के लिए परुष शब्द का उपयोग होता है। कोमल शब्द का विलोम है परुष। जबकि पुरुष शब्द स्त्री का विलोम होता है। इस शब्द से आप सब परिचित ही हैं।

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