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नन्ही दुनिया: कविता और शब्द भेद

पढ़ें आज की कवित और शब्द-भेद।

Author Updated: February 10, 2019 4:53 AM
प्रतीकात्मक फोटो

दी है दरियादिल

दी हंसमुख, दी बड़ी बहादुर
दी है दरियादिल।

दिखा उसे इक भूखा बच्चा
टिफिन खोल कर उसे खिलाया।
अपनी पानी की बोतल से
पूरा पानी उसे पिलाया।
खिला-पिला कर उसको बेहद
खुशी हुई हासिल।
दी है दरियादिल।

बैट घुमाया था मैंने, पर
दी ने फौरन कैच ले लिया।
आंसू लगा बहाने मैं, तो
चांस दुबारा मुझे दे दिया।
फिर से बल्लेबाजी पाकर
हंसा खिलिल-खिल-खिल।
दी है दरियादिल।

सोती कुतिया देख लकी ने
पत्थर लेकर उस पर ताना
‘ना! ना!’ करती दी दौड़ी, पर
वह नटखट बच्चा ना माना।
लगा पैर पर पत्थर दी के
खाल गई थी छिल।
दी है दरियादिल।

शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

उड़ी / ऊड़ी
उड़ने की क्रिया का स्त्रीलिंग होता है उड़ी। जैसे चिड़िया उड़ी। जबकि ऊड़ी एक पक्षी का नाम है। पनडुब्बी नाम की चिड़िया को ऊड़ी कहते हैं। इसके अलावा ऊड़ी का एक अर्थ लक्ष्य या निशाना भी होता है।

कवक / कवच
फंफूद के रूप में पैदा होने वाली वनस्पितियों को कवक कहते हैं, जैसे कुकुरमुत्ता एक कवक है। जबकि कवच का अर्थ होता है आवरण। जैसे युद्ध में पहले सैनिक छाती पर लोहे का कवच पहना करते थे। इसी तरह फलों के ऊपर की मोटी परत को भी कवच कहते हैं, जैसे बादाम आदि के ऊपर का छिलका।

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