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नवजात की देखभाल

सर्दी के मौसम में कई तरह की बीमारियां होने लगती हैं। इन बीमारियों से बच्चों को ज्यादा परेशानी होती है। बड़े फिर भी अपनी देखभाल कर लेते हैं, पर नवजात शिशु माता-पिता पर आश्रित रहते हैं। नवजात शिशु को सर्दी हो या गर्मी, सभी मौसम में अधिक देखभाल की जरूरत पड़ती है। उसे मौसम की मार से कैसे बचाएं? उसकी मालिश कैसे करें? उसे माताएं दूध कैसे पिलाएं? आदि सवालों से वे लोग ज्यादा जूझते हैं, जो पहली बार माता-पिता बनते हैं। दूसरे वे लोग, जिनके घरों में कोई बुजुर्ग मार्गदर्शन करने वाला नहीं होता। नवजात शिशु की देखभाल इस मौसम में कैसे करें, आइए जानते हैं।

Author January 27, 2019 12:51 AM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Pixabay)

सर्दी के मौसम में कई तरह की बीमारियां होने लगती हैं। इन बीमारियों से बच्चों को ज्यादा परेशानी होती है। बड़े फिर भी अपनी देखभाल कर लेते हैं, पर नवजात शिशु माता-पिता पर आश्रित रहते हैं। नवजात शिशु को सर्दी हो या गर्मी, सभी मौसम में अधिक देखभाल की जरूरत पड़ती है। उसे मौसम की मार से कैसे बचाएं? उसकी मालिश कैसे करें? उसे माताएं दूध कैसे पिलाएं? आदि सवालों से वे लोग ज्यादा जूझते हैं, जो पहली बार माता-पिता बनते हैं। दूसरे वे लोग, जिनके घरों में कोई बुजुर्ग मार्गदर्शन करने वाला नहीं होता। नवजात शिशु की देखभाल इस मौसम में कैसे करें, आइए जानते हैं।

संक्रमण से बचाएं
यों तो सर्दियां लोगों को पसंद होती हैं, लेकिन नवजात शिशु के लिए सर्दी अधिक सेहतमंद नहीं होती। इस मौसम में सर्दी, जुकाम जैसी समस्याएं लगी रहती हैं। ये समस्याएं संक्रमण की वजह से भी होती हैं। यही वजह है कि जब भी कोई नवजात शिशु को अपनी गोद में लेता है, तो घर के बड़े कहते हैं कि हाथ साफ करके लेना या जिस कमरे में नवजात होता है, उस कमरे की सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।

गुनगुने तेल की मालिश करें
नवजात को मालिश की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। चूंकि बचपन में उसकी जो सेवा होगी उसके अनुसार ही उसका शरीर विकास करेगा। सर्दी की गुनगुनी धूप में नवजात की हल्के गरम सरसों के तेल से मालिश करनी चाहिए। मालिश से बच्चे को एक तो अच्छी नींद आती है, दूसरा शिशु की हड्डियां मजबूत होती हैं। मालिश करने से बच्चे को न तो कभी निमोनिया होगा और न ही सर्दी लगेगी।

ठंड से बचाएं
दरअसल, शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता उतनी मजबूत नहीं होती, जितनी कि बड़ों की। इसलिए शिशु को रोग जल्दी होते हैं। इसलिए उसे ठंड से बचा कर रखना चाहिए। ठंड से बचाने के लिए माताएं बच्चे को खूब सारे गरम कपड़े पहना देती हैं। इतने कपड़ों से बच्चों को कई बार परेशानी होने लगती है। इसलिए जरूरी है कि माता समेत परिवार के सभी सदस्यों को मालूम होना चाहिए कि सर्दी से बचाने के लिए बच्चे को ठीक से और साफ कपड़े में लपेटे में। ऐसे कपड़े में लपेटें, जो नर्म और मुलायम हो। और ऐसे लपेटें जिससे कि वह अपने हाथ पैर चला सके।

नहलाना जरूरी नहीं
ठंड के मौसम में यह जरूरी नहीं है कि नवजात शिशु को हर रोज नहलाया जाए। नवजात की साफ-सफाई के लिए किसी साफ कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर बच्चे को पोंछ दें। नहलाने से पहले बच्चे की मालिश जरूर करें।

मां का दूध
मां का दूध बच्चे के लिए अमृत कहा गया है। इसलिए बच्चे के जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराना जरूरी होता है। मां का बच्चे को दूध पिलाना औषधि माना गया है। मां का दूध बच्चे को कई रोगों से बचाता है। शिशु को छह महीने तक स्तनपान कराना आवश्यक होता है। बच्चे का समय पर टीकाकरण भी जरूरी है।

शिशु के मुंह की सफाई
बहुत-सी माताओं को नहीं मालूम होता कि शिशु के मुंह की सफाई कैसे करें। शिशु के मुंह की सफाई में बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है। इसके लिए सूती कपड़े को गुनगुने पानी में डुबो कर तर्जनी उंगली का प्रयोग कर जीभ पर उंगली को गोल-गोल घुमा कर सफाई करें। इसके अलावा शिशु के मसूड़े भी सूती कपड़े से आराम से साफ करें। शिशु के मुंह से बदबू न आए, इसलिए उसके मुंह की सफाई जरूरी है। सर्दी के मौसम में बच्चे के होंठ सूखने लगते हैं। इससे बचने के लिए उसके होंठों पर लिपबाम या पेट्रोलियम जैली लगाएं।

शिशु के रोने से घबराएं नहीं
नवजात शिशु जब रोते हैं तो कई बार घर के सदस्य परेशान हो जाते हैं। माताएं अधिक परेशान होने लगती हैं। उन्हें कई बार उसके रोने का कारण समझ नहीं आता। बच्चे के रोने से मां को लगता है कि बच्चा किसी तकलीफ में है, लेकिन हमेशा बच्चा तकलीफ की वजह से नहीं रोता। कई बार कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। शिशु का रोना उसके लिए एक अच्छा अभ्यास है। हां, अगर बच्चा लगातार रो रहा है तो चिकित्सक से संपर्क करें। बच्चे के रोने पर उसे डांटें-पीटें नहीं, बल्कि प्यार से चुप कराएं।

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