ताज़ा खबर
 

जाती सर्दी में बागबानी

सर्दी में फूलों की सजावट घर की खूबसूरती को चार चांद लगा देती है। इस मौसम में प्राय: सभी फूलदार पौधों वाले दो-चार गमले खरीद कर अपनी बालकनी में रखना पसंद करते हैं। जिन लोगों के पास जगह अधिक है, वे अधिक फूल उगाते या गमलों में लगाते हैं। इस मौसम में फूलों की विविधता भी खूब होती है। मगर सर्दी के इस मौसम में पौधों की देखभाल ठीक से न हो, तो फूल जल्दी सूखने और अपना सौंदर्य खोने लगते हैं। इसी तरह गरमी के लिए भी इसी मौसम में तैयारी करनी होती है। इस मौसम में बागवानी के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और अगले मौसम के लिए कैसी तैयारी की जरूरत है, बता रहे हैं रवि डे।

Author January 27, 2019 1:48 AM
प्रतीकात्मक फोटो (Source: Agency)

रवि डे

जनवरी बीतने को है। बसंत के आगमन की आहट सुनाई देने लगी है। फरवरी के शुरुआती दिनों में मौसम का तापमान सोलह से अठारह डिग्री सेंटीग्रेड के बीच कई दिनों तक बना रहता है। इस तापमान का अर्थ है कि मौसम में न तो अधिक सूखापन होता है और न अधिक आर्द्रता। इसी तापमान में आम की मंजरियां फूटने लगती हैं। हवाओं में खुश्की उतरने लगती है। यह मौसम पेड़-पौधों के लिए नई करवट लेने का होता है। कई पेड़ों के पत्ते पीले पड़ने और गिरने लगते हैं। नए पत्ते निकलने लगते हैं। फूलदार पौधों में फूलों का रंग चटखने लगता है। इन दिनों मिट्टी में बदलाव शुरू हो जाता है। इसलिए इस मौसम में बागवानी में कुछ सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

सिंचाई और धुलाई
इस मौसम में पौधों को बहुत सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। ध्यान रखना जरूरी है कि अगर आपने फूलदार पौधे गमलों में लगा रखे हैं, तो उनके पेंदे से अतिरिक्त पानी का निकास समुचित हो सके। यह भी समझना जरूरी है कि जिस तरह पौधे सूरज की रोशनी से अपना भोजन बनाते हैं, उसी तरह हवा से नमी खींच कर भी अपना भोजन लेते हैं। इसलिए इस मौसम में बहुत ज्यादा पानी डालने की जरूरत नहीं होती। अधिक पानी डालने से पौधों की जड़ों में अधिक पानी जमा होता है और जब ठंड बढ़ती है, तो उनकी बढ़वार में बाधा डालता है। इससे पौधों में नए फूल नहीं फूटते। इसलिए इस मौसम में पानी दिन में ही डालें, रात में सिंचाई न करें। इतना ही पानी डालें, जिससे मिट्टी में बस नमी बनी रहे, पानी जमा न हो। मिट्टी में जितना भुरभुरापन बना रहेगा, फूलों का विकास भी उतना ही ठीक से होगा।

इस मौसम में हवा में मौजूद धूल और धुएं के कण बहुत ऊपर तक नहीं जाते। पृथ्वी की सतह के आसपास बने रहते हैं। हवा में नमी की वजह से वे पेड़-पौधों के पत्तों पर चिपक जाते हैं। इस तरह पौधों की पत्तियों पर धूल और धुएं के कण लगातार चिपकते रहने की वजह से उनके भोजन बनाने की प्रक्रिया बाधित होती है। इससे पौधों के विकास पर असर पड़ता है। इसलिए पौधों की पत्तियों की लगातार धुलाई करते रहना जरूरी होता है। मगर फूलदार पौधों पर तेज धार से पानी डाल कर धुलाई करने से फूलों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

ऐसे में हल्की फुहारें छोड़ने वाले नलके का इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसे नलके बाजार में आसानी से उपलब्ध होते हैं। अगर आपके पास गमले ज्यादा नहीं हैं, तो पौधों की पत्तियों की धुलाई के लिए बोतल वाले स्प्रे का भी उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए कोलीन जैसे पदार्थों की खाली बोतल को साफ करके और उसमें पानी भर कर धुलाई की जा सकती है। फव्वारे वाली बोतलें बाजार में भी आसानी से मिल जाती हैं। कीट-पतंगे इस बदलते मौसम में कई तरह के कीट-पतंगे भी सक्रिय हो जाते हैं। खासकर फूलदार पौधों पर कीट-पतंगे मंडराने लगते हैं। पौधों की पत्तियों, टहनियों और कलियों-फूलों पर काले-भूरे रंग के कीट चिपकने शुरू हो जाते हैं। ये चिपके ही रहते हैं। ये पौधों का रस खींचते और उनके विकास में बाधा डालते हैं। इसलिए इन कीटों से पौधों का बचाव बहुत जरूरी होता है। इसके लिए पानी में नमक डालें और फव्वारे से पौधों की पत्तियों की धुलाई करें। इससे पत्तियों पर जमा गंदगी भी धुलेगी और उन पर चिपकने वाले कीटों से भी मुक्ति मिलेगी। अगर कीट की समस्या अधिक है, तो पानी में एल्ड्रीन या दूसरे कीटनाशक रसायनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये रसायन नर्सरियों और बागवानी उपकरण बेचने वाली दुकानों पर आसानी से मिल जाते हैं।

अगर आपके पास इनडोर यानी घर के भीतर रखने वाले पौधे हैं, तो उनकी पत्तियों की भी नियमित धुलाई करते रहें। बेहतर तो यह होता है कि इनडोर पौधों की पत्तियों को एक-एक कर हल्के हाथों से मुलायम कपड़े से पोछें। इससे पौधों की पत्तियों की सफाई होती है, उनमें चमक आती है और उन्हें अपना भोजन बनाने में आसानी होती है।

निराई-गुड़ाई
सर्दी में पौधों की जड़ों तक धूप और हवा पहुंचना बहुत जरूरी होता है, इसलिए गमलों या क्यारियों की नियमित गुड़ाई करते रहना चाहिए। कई दिन तक मिट्टी में नमी बने रहने की वजह से अक्सर उसकी ऊपरी परत सख्त हो जाती है, उस पर हरी काई की परत जमनी शुरू हो जाती है। इस परत को तोड़ना बहुत जरूरी होता है। इसलिए पौधों की गुड़ाई करते रहें और मिट्टी में भुरभुरापन बनाए रखें। इससे जड़ों तक धूप और हवा की पहुंच आसान होती है। अगर पौधों की जड़ों में अतिरिक्त कल्ले फूट आए हैं, खर-पतवार पनप गए हैं, तो उन्हें काट-छांट दें। जड़ों तक धूप और हवा की पहुंच में खर-पतवार बाधा बनते हैं।

शाक-भाजी
फरवरी का महीना गरमी में पैदा होने वाली शाक-भाजी लगाने उचित मौसम होता है। इस महीने में तापमान इस मौसम की सब्जियों उगाने में बहुत मददगार होता है। गरमी में फूल वाले पौधों की उपलब्धता कम होती है। अक्सर इस मौसम में हरियाली रचने वाले पौधे लगाए जाते हैं। इसलिए कोचिया, फर्न, क्रोटन वगैरह के साथ-साथ लौकी, करेला, तोरई, पालक जैसे शाक-भाजी के पौधे भी उगाएं तो घर में पैदा सब्जियां भी मिल जाती हैं और घर में हरियाली भी बनी रहती है।

मिट्टी की तैयारी
गरमी के पौधे रोपने या बीज बोने के लिए इसी मौसम में उसके लिए मिट्टी तैयार करनी चाहिए। अगर आपको क्यारियों में बीज बोना चाहते हैं तो पहले उनमें पानी से सिंचाई करें और फिर मिट्टी में हल्की नमी रह जाए तो गुड़ाई कर दें। कम से कम छह इंच गहरी गुड़ाई करें। ज्यादा गहरी खुदाई भी नहीं करनी चाहिए। फिर मिट्टी को सूखने दें। बीच में दो-तीन दिन बाद मिट्टी को पलट देना चाहिए। जब मिट्टी पूरी तरह सूख जाए तो हफ्ते भर बाद उसमें गोबर की खाद मिलाएं और क्यारी में पानी भर दें। दो-तीन दिन बाद जब मिट्टी में नमी थोड़ी रह जाए, तो एक बार फिर से गुड़ाई करें और मिट्टी में अच्छी तरह खाद को मिला दें। एक-दो दिन मिट्टी को ऐसे ही रहने दें।

अगर आपको गमलों में शाक-भाजी बोनी है, तो गमलों की मिट्टी को बाहर निकालें और उसे चीन-चार दिन तक सूखने दें। फिर उसमें मिट्टी के बराबर गोबर की खाद या कंपोस्ट मिलाएं और उस पर पानी डाल कर मिट्टी को गीला कर दें। फिर दो-तीन दिन बाद मिट्टी को उलट-पलट कर खाद के साथ ठीक से मिला दें। कम से कम एक दिन तक ऐसे ही रहने दें। जब मिट्टी ठीक से भुरभुरी हो जाए, तो उसे गमलों में भर दें। गमले के पेंदे में निकास का ध्यान रखें।

बुआई-रोपाई
मिट्टी में थोड़ी नमी और कम हो जाए तो क्यारी में मेड़ें बनाएं और उनमें करीब तीन इंच नीचे सब्जी भाजी के बीज थोड़े-थोड़े फासले पर बो दें। जब तक बीज से अंकुरित होकर पहला पत्ता न निकले, सिंचाई न करें। जब तने थोड़े सख्त लगने लगें औ पत्ते गाढ़े हरे हा जाएं, तब पहली सिंचाई करें। इस तरह पौधे गलेंगे नहीं। पौधों के तने के पास गोलाकार मिट्टी चढ़ा दें ताकि बाद में जब सिंचाई करें तो पानी उनकी जड़ों में अधिक जमा न हो।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App