सेहत: हड्डियों की कमजोरी

बीस से तीस साल तक हड्डियों का कैल्शियम यथावत रहता है। तीस के बाद हड्डियों से कैल्शियम का क्षरण शुरू हो जाता है और ध्यान नहीं देने पर हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।

हड्डियों की दिक्कतों को अनदेखा न करें।

घर और बाहर की जिम्मेदारी निभाने की भाग-दौड़ में महिलाएं खुद की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। सबकी जिम्मेदारी और सबका खयाल रखने में वे अपना ही खयाल रखना भूल जाती हैं। खानपान में लापरवाही और व्यायाम की कमी से महिलाएं हड्डी संबंधी गंभीर बीमारियों की शिकार बन रही हैं। हर व्यक्ति के शरीर का अठारह से बीस साल तक विकास होता है। उसके शरीर की हड्डियों में कैल्शियम जमा होता है। बीस से तीस साल तक हड्डियों का कैल्शियम यथावत रहता है। तीस के बाद हड्डियों से कैल्शियम का क्षरण शुरू हो जाता है और ध्यान नहीं देने पर हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। हड्डियों के कमजोर होने पर शरीर में दर्द और हल्की-सी चोट पर हड्डियों के टूटने का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि तीस की उम्र आते-आते ज्यादातर महिलाएं कमर, कंधे, पैर और जोड़ों के दर्द की शिकायत करती हैं। महिलाओं की इन शिकायतों पर चिकित्सक कैल्श्यिम, विटामिन-डी और आयरन की गोलियां लेने की सलाह देते हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व भर में बीस करोड़ लोग आॅस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के खोखले होने की समस्या से पीड़ित है। इसमें मरीज की हड्डियां जाले की तरह झिरझिरी दिखने लगती हैं। समय पर इलाज नहीं शुरू करने से हड्डियों में इतनी कमजोरी आ जाती है कि थोड़ा-सा टकराने या गिर जाने पर हड्डी टूट जाती है। बीमारी की चपेट में आने पर हड्डी के जुड़ने की क्षमता भी बहुत कम हो जाती है।

बीमारी की वजह

विटामिन डी की कमी
पिछले साल हुए एक शोध के मुताबिक उत्तर भारत में रहने वाली तकरीबन उनहत्तर फीसद महिलाओं में विटामिन-डी की कमी है। वहीं केवल पांच फीसद महिलाओं में ही सही मात्रा में विटामिन-डी पाया जाता है। शोध में इसकी वजह महिलाओं का धूप का सेवन कम करना और परिधान को बताया गया है। दरअसल, ज्यादातर भारतीय महिलाएं साड़ी पहनती हैं या सूट। इस वजह से उनके शरीर को धूप नहीं मिलती।

विटामिन-डी ऐसा विटामिन है, जिसे शरीर केवल धूप की रोशनी में ही बनाता है। विटामिन-डी की कमी होने पर शरीर में कैल्शियम सोखने की क्षमता कम हो जाती है। इससे हड्डियां मुलायम और कमजोर हो जाती हैं और इनके टूटने की आशंका बढ़ जाती है। इस वजह से हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा खतरा हड्डियों के टूटने का होता है। सूर्य की रोशनी विटामिन-डी का सबसे अच्छा स्रोत है।

आहार में कैल्शियम की कमी
ज्यादातर महिलाएं अपने खानपान को लेकर लापरवाह होती हैं। वहीं कुछ महिलाएं छरहरी दिखने के चक्कर में हद से ज्यादा भूखे पेट रहती हैं। ऐसी महिलाओं के आहार में जरूरी पोषक तत्त्वों की भारी कमी हो जाती है। लंबे समय तक दूध, दही सहित कैल्शियम युक्त दूसरे आहार के सेवन न करने से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और धीरे-धीरे व्यक्ति आॅस्टियोपोरोसिस का मरीज बन जाता है।

व्यायाम की कमी
घरेलू महिलाएं हों या फिर कामकाजी, वे दिन भर घर और दफ्तर के काम में तो व्यस्त रहती हैं, लेकिन व्यायाम या योग के लिए आधे से एक घंटे का समय नहीं निकाल पातीं। व्यायाम की कमी और खुद के प्रति लापरवाही हड्डियों या आॅस्टियोपोरोसिस की बीमारी की बड़ी वजह है।

हॉर्मोन में बदलाव
महिलाओं में होने वाला हॉर्मोन में बदलाव भी इस बीमारी की एक बड़ी वजह है। चालीस के बाद अधिकांश महिलाओं की माहवारी बंद होने लगती है। उसके बाद हड्डियों का क्षरण तेजी से होने लगता है। बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाएं भी हड्डी के दर्द से परेशान रहती हैं।

उपाय
नियमित व्यायाम य योग करें।
अपने वजन को नियंत्रित रखें। वजन बढ़ने से हड्डियों पर अतिरिक्त भार पड़ता है, जिससे हड्डियों के कमजोर होने या टूटने का डर हमेशा बना रहता है।
धूम्रपान और शराब को ना कह कर हड्डियों को मजबूत रखा जा सकता है।
कोल्ड ड्रिंक, जंकफूड, फास्टफूड से बचें।
हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम का सेवन महत्त्वपूर्ण है। इसलिए अपने आहार में दूध, दही, पनीर, चीज को शामिल करें।
पालक और लाल साग जैसी पत्तेदार सब्जियों में भी आयरन और कैल्शियम भरपूर होता है। आहार में राजमा, चना दाल, संतरा, मुसंबी, बादाम और बीन्स को भी शामिल करें।
सुबह की धूप का सेवन करें।

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