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नन्ही दुनिया: बिजली वाले मास्टरजी

विनय विज्ञान का अध्यापक है। उसकी पहली तैनाती एक छोटे से गांव खारी में मिली। चूंकि खारी शहर से दूर था, इसलिए उसने गांव में ही रहना तय किया। स्कूल में पहला दिन उसे बहुत अच्छा लगा, लेकिन ज्यों ही शाम हुई, बत्ती गुल और पूरा गांव अंधेरे में डूब गया। विनय को अंधेरे में रहने का अभ्यास नहीं था। उसने किसी तरह मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में खाना बनाया, खाया और बिस्तर में दुबक लिया।

Author March 10, 2019 2:14 AM
प्रतीकात्मक फोटो

आशा शर्मा

विनय विज्ञान का अध्यापक है। उसकी पहली तैनाती एक छोटे से गांव खारी में मिली। चूंकि खारी शहर से दूर था, इसलिए उसने गांव में ही रहना तय किया। स्कूल में पहला दिन उसे बहुत अच्छा लगा, लेकिन ज्यों ही शाम हुई, बत्ती गुल और पूरा गांव अंधेरे में डूब गया। विनय को अंधेरे में रहने का अभ्यास नहीं था। उसने किसी तरह मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में खाना बनाया, खाया और बिस्तर में दुबक लिया।

‘बिजली न होना तो अपने आप में अभिशाप है। कैसे रहते हैं बेचारे गांव के लोग। शहर में तो जरा-सी देर बिजली जाने पर कितना हल्ला मच जाता है। यहां कितनी परेशानी होती होगी सबको। रोशनी के बिना बच्चे रात में पढ़ नहीं पाते होंगे। सारी तकनीक भी तो बिजली पर आधारित होती है। इस तरह तो गांव के बच्चे शहरी बच्चों से पिछड़ जाएंगे। शायद इसीलिए बच्चे गांव छोड़ कर शहर पढ़ने जाते हैं और कई बार बुरी संगत में पड़ कर अपना भविष्य चौपट कर लेते हैं। लेकिन यह समस्या एक दिन की तो है नहीं। लगता है सबने हालात से समझौता कर लिया है।’ विनय रात भर बिजली से जुड़ी समस्याओं पर विचार करता रहा।
वह इस बारे में गांव के सरपंच से बात करना चाहता था। अर्धवार्षिक परीक्षा शुरू होने वाली थी। विनय बच्चों के साथ बहुत मेहनत कर रहा था। उसने विशेष कक्षाएं लगा कर बच्चों को सभी विषय बहुत अच्छी तरह से समझाए। उसे पूरा भरोसा था कि कोई न कोई बच्चा अवश्य जिले की मेरिट में जगह बनाएगा, लेकिन जब वह परीक्षा के बाद कॉपियां जांचने लगा, तो उसका माथा ठनका। किसी भी बच्चे ने उसकी आशा के अनुरूप उत्तर नहीं लिखे थे। उसने आठवीं कक्षा के सभी बच्चों को अपने कमरे में बुलाया।

‘बच्चो! आप लोगों की कॉपियां देख कर मुझे बहुत अफसोस हुआ। मैंने सभी विषय अच्छे से समझाए थे, उसके बावजूद किसी भी बच्चे ने ठीक से उत्तर नहीं लिखे। इस तरह जिले की मेरिट में आना तो दूर, कोई अच्छे नंबरों से पास तक नहीं हो सकता। लगता है आप लोग घर जाकर अभ्यास नहीं करते।’ विनय ने अपनी नाराजगी जताई।
‘सर! अभ्यास करें तो कैसे करें। गांव में रात को बिजली कहां रहती है।’ रमन ने समस्या बताई। यही तो विनय सुनना चाहता था। उसे सरपंच से बात करने का सही अवसर मिल गया।
‘बिना बिजली बच्चों की पढ़ाई में बहुत बाधा आ रही है। हमें इसका समाधान सोचना चाहिए।’ विनय बच्चों को साथ लेकर सरपंच से मिला। फिर सरपंच जी को साथ लेकर बिजली विभाग के दफ्तर गया और वहां के अधिकारी को इस समस्या से अवगत कराया।
‘यह समस्या सिर्फ आपकी ही नहीं, बल्कि बहुत से गांवों की है। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे, लेकिन आप तो जानते हैं कि इन समस्याओं के तत्काल हल नहीं निकलते।’ अधिकारी ने कहा।
‘तब क्या किया जाए?’ विनय और सरपंच ने एक-दूसरे की तरफ देखा।
‘आप लोग गांव में सोलर लाइट क्यों नहीं लगवा लेते। सरकार तो इस पर अनुदान देती ही है, बिजली विभाग भी देता है।’ अधिकारी ने उन्हें परेशान देख कर सलाह दी।
‘यह बहुत अच्छा रहेगा। मैं कल ही शहर जाकर इसके बारे में जानकारी जुटाता हूं।’ विनय को आशा की किरण नजर आई।
अगले दिन विनय शहर जाकर सुरेश नामक अधिकारी से मिला। दो दिन बाद सुरेश गांव में मौका मुआइना करने आ पहुंचा।
‘हम छतों पर सोलर सिस्टम लगाएंगे। यह सिस्टम सौर ऊर्जा पर आधारित होता है। दिन में सूर्य की ताकत को इस पैनल के जरिए बैटरी में जमा कर लेंगे और रात में आप इससे अपनी बत्तियां जला सकते हैं। अगर कोई पूरा सिस्टम न लगवाना चाहे, तो सौर ऊर्जा से जलने वाली लालटेन भी इस्तेमाल की जा सकती है।’ सुरेश ने समझाया तो सबके चेहरे खिल उठे।
‘स्कूल, अस्पताल और आंगनबाड़ी में सोलर लाइट लगवाने का खर्चा मेरी तरफ से। आप कल से ही ये काम शुरू कर सकते हैं।’ सरपंच ने कहा तो सबने उत्साह से तालियां बजाई।
‘आठवीं कक्षा के हरेक बच्चे को एक सोलर लालटेन मैं अपनी तरफ से देना चाहता हूं।’ हेडमास्टर जी ने घोषणा की।
दूसरे दिन स्कूल में सौर ऊर्जा ही चर्चा का विषय बना हुआ था। बच्चों ने विनय को घेर लिया।
‘सर! क्या सचमुच सूर्य की रोशनी से बिजली बन सकती है?’ बच्चों की जिज्ञासा चरम पर थी।
‘बिल्कुल! हमने विज्ञान के ऊर्जा संरक्षण नियम में पढ़ा था न कि ऊर्जा को न बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, बस उसका रूप परिवर्तित किया जा सकता है। मॉड्यूल से सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।’ विनय ने समझाया तो बच्चों कि आंखें आश्चर्य से फैल गर्इं।
कुछ ही दिनों में खारी में सोलर सिस्टम लग गया। कलेक्टर साहब ने उसका उद्घाटन किया। खारी सौर ऊर्जा इस्तेमाल करने वाला पहला आदर्श गांव घोषित किया गया।
अब बच्चे देर रात तक सौर ऊर्जा की रोशनी में पढ़ने लगे। रात भर गांव में जगह-जगह सौर लालटेनें जगमग करतीं। गांव की तरक्की पर सब बहुत गर्व महसूस करते थे। इससे प्रेरित होकर आसपास के गावों ने भी सूर्य की ताकत को नमन किया और सोलर प्लांट लगवाए।
विनय को लोग सम्मान से ‘बिजली वाले मास्टरजी’ कहने लगे। वह भी यह नया नाम पाकर बहुत खुश था।

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