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शख्सियत: गोविंद बल्लभ पंत

उत्तर प्रदेश में स्थायी सरकार देने के साथ उन्होंने जमींदारी व्यवस्था का उन्मूलन किया। इसके अलावा उन्होंने हिंदू कोड बिल पारित किया और हिंदू पुरुषों के लिए एकाधिकार अनिवार्य कर दिया।

Author Updated: September 8, 2019 5:39 AM
पंडित गोविंद बल्लभ पंत

पंडित गोविंद बल्लभ पंत यानी जीबी पंत स्वतंत्रता सेनानी, उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री और देश के चौथे गृहमंत्री थे। उनका जन्म अल्मोड़ा जिले के खूंट गांव में हुआ था। पिता की सरकारी नौकरी और हर साल तबादले के कारण गोविंद बल्लभ पंत का लालन-पालन उनके नाना बद्रीदत्त जोशी के यहां हुआ। उनके व्यक्तित्व और राजनीतिक विचारों पर उनके नाना का गहरा प्रभाव था।

राजनीति में प्रवेश
गोविंद बल्लभ पंत 1905 में वे अल्मोड़ा से इलाहाबाद आ गए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की और काशीपुर में वकालत शुरू कर दी। कांग्रेस पार्टी ने रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान और काकोरी मामले में शामिल अन्य क्रांतिकारियों के मुकदमे की पैरवी के लिए उन्हें वकील नियुक्त किया। 1914 में उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलनों में हिस्सा लेना शुरू किया। 1921 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत की विधानसभा के लिए चुने गए। 1930 में उन्होंने महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह में भाग लिया, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उन्हें कई हफ्तों तक जेल में रहना पड़ा। 1935 में उन पर लगा प्रतिबंध रद्द कर दिया गया और वे नए विधान परिषद में शामिल हो गए। बाद में उन्हें विधानसभा में कांग्रेस पार्टी का उपनेता चुना गया।

1940 में सत्याग्रह आंदोलन को संगठित करने में मदद के आरोप में पंत को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें जेल में डाल दिया गया। भारत छोड़ो प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के लिए 1942 में उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया। मार्च 1945 तक उन्होंने कांग्रेस कार्यकारिणी समिति के अन्य सदस्यों के साथ अहमदनगर किले में तीन साल बिताए। बाद में उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पंत की रिहाई के लिए अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री से गृहमंत्री
1937 से 1939 तक उन्होंने ब्रिटिश भारत में संयुक्त प्रांत के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला। संयुक्त प्रांत में 1946 के चुनावों में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाया गया। वे 1946 से 1947 तक संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश) के मुख्यमंत्री रहे।

उत्तर प्रदेश में स्थायी सरकार देने के साथ उन्होंने जमींदारी व्यवस्था का उन्मूलन किया। इसके अलावा उन्होंने हिंदू कोड बिल पारित किया और हिंदू पुरुषों के लिए एकाधिकार अनिवार्य कर दिया। हिंदू महिलाओं को पैतृक संपत्ति के लिए तलाक और विरासत का अधिकार दिया। गोविंद बल्लभ पंत 3 जनवरी, 1955 को केंद्रीय मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए लखनऊ से नई दिल्ली आ गए। वे 1955 से 1961 तक गृहमंत्री के पद पर कार्यरत थे।

उपलब्धियां
गोविंद बल्लभ पंत के कार्यों को देखते हुए उनके नाम पर देश के कई अस्पताल, शैक्षणिक संस्थानों का नाम रखा गया है। हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित कराने में भी उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। एक स्वतंत्र कार्यकर्ता, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के रूप में अपनी निस्वार्थ सेवा के लिए उन्हें 1957 में देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

निधन
सन 1961 में चौहत्तर साल की अवस्था में उनका निधन हो गया।

 

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