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जानकारी- बर्फबारी

उनका आकार वातावरण में मौजूद हवा के तापमान और जल वाष्प के कणों पर निर्भर करता है।

Author February 5, 2017 6:00 AM
सांकेतिक तस्वीर

रजनी अरोरा

आ पको मालूम है कि बर्फ बनती कैसे है और यह बर्फबारी होती कैसे है?    धरती पर जल एक निरंतर चक्र में चलता है। सूर्य की गर्मी के कारण समुद्रों, नदियों, झीलों और अन्य स्रोतों से जल लगातार वाष्पीकृत होता रहता है। पानी भाप बन कर और हवा से हल्का होकर ऊपर वायुमंडल में पहुंच जाता है। ये वाष्पकण इकट्ठे होकर बादल का रूप ले लेते हैं। जब ये बादल आपस में टकराते हैं तो बारिश होती है। लेकिन जब यह बादल वातावरण में अधिक ऊपर चले जाते हैं जहां तापमान बहुत कम हो जाता है और वातावरण बहुत ठंडा होता है। बादल का तापमान हिमांक से नीचे पहुंचने पर बादलों में मौजूद वाष्प के ये कण नन्हे-नन्हे बर्फ-कणों में बदल जाते हंै। हवा इन बर्फ कणों का वजन सहन नहीं कर पाती और नीचे की ओर गिरने लगते हैं।  इस प्रक्रिया में वे एक-दूसरे से टकरा कर जुड़ने लगते हैं। इस तरह इनका आकार बड़ा होने लगता है। पृथ्वी पर ये हिमकण रुई के छोटे-छोटे नर्म सफेद फाहों के रूप में झरने लगते हैं, जिन्हें हिमपर्त कहते हैं। ये हिमपर्त षटकोणीय होते हैं और कोई दो हिमपर्त एक जैसे आकार के नहीं होते।

उनका आकार वातावरण में मौजूद हवा के तापमान और जल वाष्प के कणों पर निर्भर करता है। ऐसा नहीं है कि अधिक सर्दी होने पर ही बर्फ गिरती है। इसके लिए हवा में पानी के वाष्पकण होना भी जरूरी होते हैं। आसमान से गिरे हिमकण सूर्य का प्रकाश प्रतिबिंबित करते हैं, इसीलिए हमें यह बर्फ सफेद रंग की दिखाई देती है। बर्फबारी में धरती पर अक्सर बर्फ की सफेद चादर-सी बिछ जाती है। सबसे बड़ी बात है कि यह बर्फबारी हमेशा धरती पर न तो एकसार होती है और न ही हमेशा नर्म होती है। गिरते हुए यह एक जगह इकट्ठी न गिर कर हवा के साथ इधर-उधर फैल जाती है, इसलिए यह कहीं बहुत ज्यादा और कहीं बहुत कम मात्रा में भी गिरती है। बारिश के साथ कभी यह छोटे-छोटे पत्थर के रूप में सख्त ओलों के रूप में होती है तो कभी मुलायम फाहों के रूप में। हमारी धरती पर बर्फ चाहे जिस रूप में भी गिरे, ठंडी होने की वजह से न केवल उस जगह का तापमान काफी गिर जाता है बल्कि सर्द हवाओं की चपेट में दूरदराज के इलाके भी आ जाते हैं। यह सवाल जरूर उठता है कि यह बर्फबारी पहाड़ी इलाकों में ज्यादा क्यों होती है? यह बर्फबारी उन स्थानों पर अधिक होती है, जो या तो समुद्र से काफी ऊपर होते हैं या फिर भूमध्य रेखा से दूर ऊंचाई पर होते हैं।

हालांकि, प्रकृति में बर्फ का गठन काफी मात्रा में होता है। इसका छोटा हिस्सा ही नीचे पहाड़ों पर गिरता है। बाकी हिस्सा बारिश के रूप में नीचे आता है क्योंकि जब यह वातावरण में मौजूद ओजोन की गरम परतों के बीच से होकर गुजरता है तो यह बर्फ पिघल जाती है और बारिश में बदल जाती है। जबकि ऊंचे पहाड़ों और भूमध्य रेखा से दूर इलाकों में तापमान शून्य डिग्री से काफी कम होता है, इसलिए वहां बर्फबारी होती है। पहाड़ों पर गिरी यह बर्फ गर्मियों में सूरज की तपिश से पिघल कर नदियों में पानी की आपूर्ति करती है जो हमारे ही नहीं, सभी जीव-जंतुओं के जीवन का आधार है।       १  ल्लरजनी अरोरा  बर्फबारी

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