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कहानी- कीमत

बहुत पुरानी बात है। एक गांव में एक किसान रहता था। किसान का खेत बहुत बड़ा था, इसलिए उसे खेती में बहुत सारे मजदूरों की जरूरत पड़ती थी।

Author February 5, 2017 5:50 AM
प्रतीकात्मक चीत्र।

बहुत पुरानी बात है। एक गांव में एक किसान रहता था। किसान का खेत बहुत बड़ा था, इसलिए उसे खेती में बहुत सारे मजदूरों की जरूरत पड़ती थी। किसान बेहद समझदार और दयालु था। वह अपने मजदूरों को अन्य किसानों के मुकाबले ज्यादा मजदूरी देता था। इसलिए मजदूर भी उससे खुश रहते थे। किसान का एक बेटा था। जब किसान का बेटा बड़ा हुआ तो वह भी खेती की देखभाल और जिम्मेदारी में अपने पिता का हाथ बंटाने लगा। एक दिन उसने अपने पिताजी से कहा, ‘आप दूसरे किसानों के मुकाबले मजदूरों को काफी ज्यादा मजदूरी देते हैं। मैंने हिसाब लगाया है कि अगर हम उतनी ही मजदूरी दें, जितनी कि अन्य किसान देते हैं तो भी हमें आसानी से मजदूर मिल जाएंगे, लेकिन इससे हमारे बहुत पैसे बचेंगे।’

किसान ने अपने बेटे को समझाने की बहुत कोशिश की कि वह पहले की ही तरह मजदूरों को मजदूरी दे, लेकिन जब उसके बेटे ने ज्यादा जिद की तो उसने उसे मजदूरों की मजदूरी में कटौती की इजाजत दे दी। इस बार फसल उगाने की पूरी जिम्मेदारी किसान ने अपने बेटे को ही सौंप दी। मजदूरों ने उसके बेटे की देखरेख में खेत जोता, फसल बोई और अंत में फसल काटी। लेकिन इस बार खेत में उतनी फसल नहीं हुई जितनी हर बार होती थी। उसके बेटे को इस बात पर बहुत ही हैरानी हुई कि सब कुछ ठीक तरीके से होने के बावजूद उसे पहले जैसा लाभ क्यों नहीं हुआ। उसने अपने पिता से इसका कारण पूछा। किसान ने कहा, ‘बेटा मैंने तो तुम्हें पहले ही समझाया था, लेकिन तुमने मेरी बात नहीं मानी। दरअसल, बात यह है कि जब हम किसी व्यक्ति को उसके काम के बदले में थोड़ा ज्यादा मेहनताना देते हैं तो वह व्यक्ति प्रसन्नापूर्वक पूरी लगन और ईमानदारी के साथ बेहतर ढंग से काम करता है। इसलिए काम अच्छी तरह और अधिक मात्रा में हो जाता है। दूसरी बात यह भी है कि थोड़ा ज्यादा मेहनताना देने से व्यक्ति उस काम को छोड़ कर दूसरी जगह काम करने नहीं जाना चाहता। इसलिए वह अपने मालिक को खुश रखने के लिए भी अच्छे से अच्छा काम करता है कि कहीं उसका मालिक नाराज होकर इस फायदेमंद काम से उसे हटा न दे।

किसान के बेटे को अपने पिता की नसीहत अच्छी तरह समझ में आ गई। उसने आगे से कभी भी मजदूरों को कम मजदूरी नहीं दी, बल्कि अब वह उनकी सुख-सुविधा का पूरा ध्यान रखता था और उनके साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करता था। अब उसे भी खेती से खूब लाभ होने लगा और उसकी गिनती अपने इलाके के सबसे सफल किसानों में होने लगी । १

 

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