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सेहत-दिल को रखें दुरुस्त

आजकल दौड़-भाग भरी जिंदगी ने लोगों का सुकून छीन लिया है। आज सबसे बड़ी समस्या है कि सेहत का खयाल कैसे रखें। दिल का दौरा आज एक आम समस्या हो गई है। खासकर भारत जैसे विकासशील देशों में यह बीमारी हर साल लाखों लोगों की जान ले लेती है। यों दिल का दौरा कभी भी, […]

Author November 26, 2017 2:37 AM
प्रतीकात्मक चित्र

आजकल दौड़-भाग भरी जिंदगी ने लोगों का सुकून छीन लिया है। आज सबसे बड़ी समस्या है कि सेहत का खयाल कैसे रखें। दिल का दौरा आज एक आम समस्या हो गई है। खासकर भारत जैसे विकासशील देशों में यह बीमारी हर साल लाखों लोगों की जान ले लेती है। यों दिल का दौरा कभी भी, किसी को भी पड़ सकता है। किसी भी उम्र में यह आपको शिकार बना सकता है। इसका सीधा संबंध जीवनशैली से है, पर तनाव, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी समस्याओं में दिल के रोगों का खतरा और बढ़ जाता है। तेज ठंड में दिल के दौरे के मामले ज्यादा देखने में आते हैं। सर्दी का मौसम है। इसलिए दिल की हिफाजत बहुत जरूरी है।

क्यों होता है हृदय रोग
लगातार मानसिक दबाव में रहने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) की समस्या शुरू होने लगती है। इसका सीधा और सबसे पहला असर हृदय पर पड़ता है। यहीं से दिल के लिए खतरे की घंटी बजने लगती है। इसके अलावा डायबिटीज भी हृदय रोगों को तेजी से बढ़ाती है। इसके कारण रक्त शर्करा बढ़ने लगती है और धीरे-धीरे यह धमनियों को ज्यादा जाम कर देती है। इससे हृदय को खून पहुंचाने वाली धमनिया संकरी और सख्त हो जाती हैं और शरीर के सभी हिस्सों को पर्याप्त खून नहीं मिल पाता। इसके अलावा जब खून में वसा की मात्रा बढ़ जाती है तो यह वसा धमनियों में जमने लगती है और उसकी भीतरी दीवारों पर मोटी परत-सी बना लेती हैं। धमनियों के भीतर वसा की परत जमने से धमनियां संकरी हो जाती है, जिससे रक्त प्रवाह मार्ग बंद-सा हो जाता है। यही वसा कोलेस्ट्राल कहलाता है।

हृदय रोग के लक्षण
शुरू-शुरू में हृदय रोग के खास लक्षण नजर नहीं आते। लेकिन जब रोगी को कोई शारीरिक श्रम, जैसे दूर तक पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना या फिर दौड़ने जैसे काम करने पड़ते हैं तो सांस फूलने, सीने में दर्द, कंधों और पीठ में दर्द, शरीर में भारीपन और दम घुटने जैसी शिकायतें होने लगती हैं। ये हृदय रोग के शुरुआती लक्षण होते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हृदय को ज्यादा काम करने के लिए अतिरिक्त खून की जरूरत होती है और नलियों में वसा जम जाने से ये नलियां संकरी हो जाती हैं। इस वजह से हृदय को पर्याप्त खून मिल नहीं पाता और सीने में दर्द होता है। यही स्थिति ‘दिल का दौरा’ (हार्ट अटैक) कहलाती है। जब दिल का दौरा पड़ता तो घबराहट, सांस लेने में दिक्कत, दिल का अनियमित रूप से धड़कना, तेज दर्द वाले झटके अनुभव होना, पसीना आना, चक्कर आना, जी मिचलाना, अचानक कमजोरी अनुभव होना या बेहोश हो जाना जैसे लक्षण सामने आते हैं।

ऐसा नहीं कि आराम करने के दौरान दिल का दौरा नहीं पड़ता। दिल के दौरे का दर्द आराम करते हुए भी बना रहता है।  एंजाइना का दर्द थकान के कारण होता है और विश्राम करने से दूर हो जाता है और उससे रक्तचाप और हृदय की धड़कन पर कुछ विशेष प्रभाव न पड़े तो ऐसी स्थिति में घबराने की कोई बात नहीं है। अगर थकान से हुआ दर्द आराम के बाद भी दूर नहीं होता और दर्द निवारक (एनालजैसिक्स) दवाइयों के सेवन से भी कोई लाभ न मिले तो समझना चाहिए कि दिल का दौरा पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द हृदय रोग विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए।

हृदय रोग में क्या खाएं
हृदय रोग में अनार, आंवले का मुरब्बा, सेब, सेब का मुरब्बा, नींबू का रस, अंगूर, थोडा-सा गुनगुना गाय का दूध, जौ का पानी, कच्चे नारियल का पानी, गाजर, पालक, लहसुन, कच्चा प्याज, छोटी हरड़, सौंफ, मेथीदाना, किशमिश, मुनक्का जैसी चीजें ली जा सकती हैं।  इसके अलवा गाय का शुद्ध घी, गेहूं का दलिया, चोकरयुक्त मोटे गेहूं के आटे की रोटी, चना और जौ को मिला कर बनाई गई मिस्सी रोटी, भिगोए हुए चने, भुने चनों का नियमित सेवन, हरी सब्जियां, ताजे फल, कम चिकनाई युक्त बिना मलाई वाला दूध से बने खाद्य पदार्थ नियमित रूप से लेने चाहिए।

ये न खाएं : हृदय रोग से बचने के लिए मांसाहार, मदिरापान, धूम्रपान, तंबाकू, कॉफी, नशीले पदार्थों का सेवन, अधिक नमक, घी, तेल, तेज मसालेदार चटपटे तले-भुने गरिष्ठ भोज्य पदार्थ, नूडल्स, पिज्जा, बर्गर जैसा फास्टफूड, चाकलेट, केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम आदि का सेवन ना करें या कम से कम करें।
कोलेस्ट्रॉल : हृदय रोग का सबसे बड़ा कारण कोलेस्ट्रॉल होता है। कोलेस्ट्रॉल वसायुक्त खाने जैसे- मक्खन, घी, मीट,अंडे की जर्दी, नारियल तेल, खोए की मिठाइयां, रबड़ी, मलाई, श्रीखंड आदि नहीं लेने चाहिए। इनके सेवन से बचना चाहिए।तनाव से बचें : हृदय रोग से बचने के लिए नियमित व्यायाम की दिनचर्या के साथ ही तनावरहित गहरी नींद, पूरा आराम और संयमित जीवनयापन जरूरी है। ल्ल

 

 

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